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बाल कविता

Posted On June - 30 - 2019

फिर लौटी जुलाई
फिर लौट आई जुलाई,
जम के करो अब पढ़ाई।
बस्ता लेकर नया-नया,
राहुल भैया स्कूल गया।
पहन के नयी गणवेश,
तैयार खड़ी बहन दया।
स्कूलों में रौनक छाई,
फिर लौट आई जुलाई।
जूते नये, टाई नयी,
कॉपी सभी आई नयी।
लंच बॉक्स मन लुभाते,
छतरी खूब छाई नयी।
बरखा रानी भी आई,
फिर लौट आई जुलाई।
पैन-पेंसिल रबड़ न्यारे,
बच्चों को लगते प्यारे।
ज्योमैट्री बॉक्स में ये,
खेले आपस में सारे।
बुक्स ने ली अंगड़ाई,
फिर लौट आई जुलाई।

गोविन्द भारद्वाज


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