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बाल कविता

Posted On June - 9 - 2019

सूरज दादा
सूरज दादा, सूरज दादा
आज करो इक हमसे वादा।
नरमी थोड़ा दिखलाओ ना,
आग ज़रा कम बरसाओ ना।
जल उठा है धरती का बदन,
मुरझा गया है खिलता चमन।
सताती है ये धूप ज्यादा,
सूरज दादा, सूरज दादा।
सूख गये सब ताल तलैया,
पसीने में तर बहन-भैया।
सूने सारे खेत-खलिहान,
ठाली बैठें हैं सब किसान।
बदलो ज़रा अब तो इरादा,
सूरज दादा, सूरज दादा।
सुन लो अब बच्चों की पुकार,
बरसाओं बूंदों की फुहार।
भेजो बादलों की टोलियां,
समझो परिंदों की बोलियां।
झुलस रहे नर हो या मादा,
सूरज दादा, सूरज दादा।

                         – गोविंद भारद्वाज


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