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बदल गया नाम

Posted On June - 9 - 2019

स्कूल में पहला दिन

कृष्णलता यादव

बहुत से लोगों की तरह स्कूल का पहला दिन मेरी स्मृतियों में आज भी बसा हुआ है। आज भी स्मृतियों के खजाने में प्रवेश करती हूं तो स्वयं को अपने गांव की प्राथमिक पाठशाला के प्रांगण में बाऊजी की कमीज का कोना पकड़े खड़ी पाती हूं। हमारे स्कूल में कोई बहनजी नहीं थी। प्रवेश-फॉर्म भरने के लिए मास्टरजी ने मेरा नाम पूछा तो मैंने कहा, ‘कृष्णा।’ बाऊजी के सुपरिचित मास्टरजी ने तत्काल अपनी कलम रोक दी और बोले, ‘मेजर साहब, बच्ची का नाम अधूरा-सा है, आप कहें तो ‘कृष्णलता’ लिख दूं?’ बाऊजी मुस्करा दिए, शायद मुस्कुराहट को सहमति का पर्याय मानकर मेरा नाम बदल दिया गया। मुझे ‘कच्ची’ कक्षा में बैठने का आदेश मिला। कक्षा में उपस्थित हम 5-7 बच्चे एक-दूसरे के मोहल्ले का नाम पूछ रहे थे। मैं कायदा (वर्णमाला पुस्तिका) धारी अपने बस्ते को सम्भाले चुपचाप बैठी रही। धमाचौकड़ी का सवाल ही नहीं उठता था। कुछ दूर कुर्सी पर विराजमान मास्टरजी हम पर निगरानी रख रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्मुक्त उड़ान भरने वाले परिंदों को पिंजरों में बंद कर दिया गया था। हम, बुझे-बुझे चेहरों वाले, पिंजरों के दरवाजे खुलने के इंतजार में थे। तभी घंटी बजी और हम किलकारी भरते हुए घरों की ओर दौड़ पड़े। परिजनों के सामने अपने नए नाम का खुलासा करने के लिए मैं कुछ ज़्यादा ही उतावली में थी। घर पहुंचकर सबको बताया कि आज मेरा नया नामकरण हुआ है।

कृष्णलता यादव


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