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प्राकृतिक स्वच्छता के लिए यज्ञ जरूरी : आचार्य देवव्रत

Posted On June - 18 - 2019

शिमला, 17 जून (निस)
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रेम, शांति और प्राकृतिक संरक्षण हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने यज्ञ को प्राकृतिक स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य कहा है, लेकिन इसे आज हम छोड़ चुके हैं। राज्यपाल आज शिमला के गेयटी थियेटर में सोका गक्कई इंटरनेशनल और भारत सोका गक्कई की ओर से आयोजित प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने पर्यावरण संरक्षण और शांति के चिंतन से वर्षों पूर्व ही मानव को अवगत करवा दिया था। हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग वेद हर मंत्र शांति से ही आरम्भ होता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में भोगवादी संस्कृति ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। विकास के बावजूद हम अपने ऋषि-मुनियों के दिखाए मार्ग और चिंतन तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि मानव का पर्यावरण के साथ गहरा नाता है तथा प्रदर्शनी के माध्यम से इस संबंध को उजागर करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेश भर में एक दिन में करीब 11 लाख पौधारोपण करने की योजना तैयार की जा रही है।


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