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पैतृक संपत्ति में बेटी का हक

Posted On June - 9 - 2019

अधिकार

मधु गोयल
पैतृक संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक है, जितना एक बेटे का। महिला के तौर पर पारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदारी के अधिकार के लिए कुछ बातें, जो जानना ज़रूरी हैं। इस बारे जानकारी दे रहे हैं दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट एनके अग्रवाल।
पैतृक संपत्ति पर महिलाओं के अधिकारों के बारे में बताएं?
विरासत के कानून हमेशा महिलाओं के पक्ष में नहीं रहे हैं। हालांकि, कुछ सालों से इनमें बदलाव भी आया है। अब से कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन करते हुए अधिकार दिया था कि महिलाएं जन्म के साथ ही संपत्ति की उत्तराधिकारी भी मानी जाएंगी। इसका मतलब यह हुआ कि पैतृक संपत्ति में वह अपना हिस्सा भी मांग सकती हैं। भले ही वह शादीशुदा हो या अविवाहित, बस एक ही शर्त है कि वे वयस्क हों।
क्या शादीशुदा बेटी का पिता की संपत्ति में हक है?
वर्ष 2005 में हुए हिंदू उत्तराधिकारी कानून संशोधन के बाद विवाहित या अविवाहित बेटी को पिता के हिंदू अविभाजित परिवार का हिस्सा माना जाता है। इस आधार पर पिता की संपत्ति में हक का कानूनी अधिकार है।
हालांकि, इस अधिकार का प्रयोग करने के भी कुछ नियम हैं जैसे कि जब लड़की के पिता की मृत्यु 9 सितंबर, 2005 के बाद हुई हो।
विवाहिता के पैतृक संपत्ति में क्या अधिकार हैं?
कोई भी संपत्ति बीती चार पीढ़ियों तक पुरुषों के बीच अविभाजित चली आ रही हो, उसे पैतृक संपत्ति माना जाता है। कोई संपत्ति उस स्थिति में भी पैतृक संपत्ति बन जाती है अगर किसी पिता की मौत अपनी संपत्ति की वसीयत के बिना ही हो जाती है। हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 के तहत जन्म के साथ ही लड़की अपने भाइयों-बहनों के साथ संपत्ति के अधिकार की हकदार बन जाती है। ऐसे में वह संपत्ति में हिस्सा मांग सकती है। यह 9 सितंबर, 2005 से सभी जीवित उत्तराधिकारियों पर लागू होता है भले ही वह कभी भी पैदा हुए हैं। लेकिन कुछ परिस्थितियों में लड़की संपत्ति पर कोई कानूनी हक नहीं मांग सकती जैसे— यदि पिता ने संपत्ति अपने दम पर हासिल की है न कि उसे विरासत में मिली है। पिता ने संपत्ति अपने साधनों से जोड़ी हो तो लड़की पैतृक संपत्ति के अधिकार से बाहर है। लेकिन यहां एक बात और है कि पिता ने अपने दम पर संपत्ति हासिल की हो, मगर बिना वसीयत बनाए ही उसकी मौत हो जाती है तो यह पैतृक संपत्ति मानी जाएगी। इस स्थिति में मां, भाइयों के साथ लड़की के पास भी संपत्ति का बराबर कानूनी हक है।
क्या दादा की संपत्ति में शादीशुदा लड़की का कानूनी हक है?
हर किसी की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी और अधिकार है बशर्ते कि वह पुरुषों की 4 पीढ़ियों के बीच अविभाजित रही है या फिर बिना वसीयत बनाई पिता की मौत हो गई हो। हालांकि, यदि दादा ने अपने दम पर ही संपत्ति जुटाई है न कि विरासत में मिली है और बिना वसीयत बनाए दादा की मृत्यु हो जाती है तो पिता या माता ही संपत्ति के अधिकारी होंगे न कि लड़की। लड़की और उसके भाई का केवल उस स्थिति में दादा की संपत्ति में अधिकार होगा जब पिता की मृत्यु दादाजी से पहले हो जाए।
मां की मौत के बाद नाना की संपत्ति में विवाहिता का अधिकार है?
लड़की के नाना ने संपत्ति चाहे खुद से या विरासत में पाई हो लड़की की मां और उसके भाई-बहन यानी कि (मामा, मौसी और मां) ही कानूनी अधिकारी होंगे। उनका ही संपत्ति पर अधिकार होगा।


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