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पापा का प्यार

Posted On June - 16 - 2019

ललित शौर्य
मोनू बड़ा शरारती लड़का था। हर समय कुछ न कुछ धमाल करता रहता। घर, स्कूल हर जगह उसकी शैतानी के खूब चर्चे थे। सभी उसको समझा कर थक चुके थे। पापा मोनू को उसकी शरारतों पर डांट लगाते थे। इसीलिए वो हमेशा पापा से नाराज रहता। उसे मम्मी ही सबसे प्यारी लगती। पापा से नाराजगी इतनी ज्यादा रहती कि वो जानबूझ कर उनका कहा नहीं मानता। पापा कभी पानी का गिलास मांग लें तो वो वहां से उठकर कहीं और चला जाता। या फिर कोई बहाना बना लेता। मोनू ने पापा की डांट की वजह से उनसे ज्यादा बातें करना ही बंद कर दिया था। उसने उनसे दूरियां सी बना ली थी।
लेकिन अब भी जब कोई विशेष पर्व होता तो वो मम्मी के जरिये पापा से अपने लिए चींजें मंगवाता। नए कपड़े, खिलौने आदि। पापा मोनू के लिए किसी भी चीज की कमी नहीं छोड़ते। बस मोनू का व्यवहार ही ठीक नहीं था।
रोज की तरह एकदिन मोनू सुबह-सुबह स्कूल पहुंचता है। स्कूल के सूचना पट पर एक प्रतियोगिता की सूचना लगी थी, जिस पर लिखा होता है कि ‘फादर्स डे’ पर निबंध लिखिए और शानदार ईनाम जीतिए।
फादर्स डे पढ़ते ही मोनू ने अजीब सा मुंह बना लिया। वो सोचने लगा,’ पापा का काम तो बस डांट लगाना है। बार-बार टोकना है।’ उनके बारे में क्या लिखा जाये। तब तक उसका दोस्त विक्रम वहां पहुंच जाता है। विक्रम ने भी वो सूचना पढ़ी। सूचना पढ़ते ही विक्रम की आंखों में आसूं आ गये।
मोनू ने पूछा,’ क्या हुआ भाई। तुम्हारी आंखों में ये आंसू कैसे? क्या तुम्हें भी पिताजी ने डांट कर तो स्कूल नहीं भेजा।’
विक्रम ने आंसू पोंछते हुए कहा,’ अरे नहीं, मोनू ऐसी कोई बात नहीं है।’
ऐसा कहने के बाद भी विक्रम सिसक रहा था। उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
मोनू ने दोबारा पूछते हुए कहा,’ क्या बात है विक्रम। बताओ। मुझे भी नहीं बताओगे।’
विक्रम ने अपने आसूं पोछते हुए जवाब दिया,’ भाई। पिछले साल मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई है। जब तक वो थे हमें किसी भी चीज की कमी नहीं थी। मैं जब जो कहता तब वो मुझे मिल जाता। वो बेशक मेरी शैतानियों पर मुझे डांटते थे पर मेरी खुशियों के लिए दिन-रात मेहनत करते, काम करते। अब उनके जाने के बाद परिवार की स्थिति बिल्कुल खराब हो चुकी है। मम्मी को दूसरों के घरों में खाना, झाड़ू-पोंछा लगाने को जाना पड़ता है। जिससे हमारा परिवार चल रहा है। वास्तव में एक पिता ही हमारे पूरे परिवार की रीढ़ है। जो परिवार की गाड़ी को आगे की ओर खींचते हैं। ‘
मोनू ये सब सुनकर एकदम खामोश हो गया। अब उसे अपनी गलतियों का अहसास हो चुका था। जीवन में पिता का क्या महत्व है, परिवार के लिए, एक बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण के लिए पिता कितना सब कुछ करते हैं वो इसे महसूस कर रहा था। थोड़ी देर में घंटी बज जाती है। मोनू भी प्रतियोगिता में सम्मिलित होने के लिए अपना नाम देता है। पिता के प्रति उसके सारे भाव बदल चुके थे। वो ‘फादर्स डे’ पर ‘पापा का प्यार’ शीर्षक पर निबंध लिखता है और पूरे स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करता है। उसे स्कूल की तरफ से एक बड़ा सा गिफ्ट मिलता है।
छुट्टी के बाद घर जाते ही मोनू सबसे पहले पापा के पैर छूता है। उन्हें अपना गिफ्ट भेंट करता है। अपना लिखा निबंध सुनाता है। वो संकल्प लेता है कि आज से पापा की हर बात मानेगा।
पापा मोनू को गले से लगा लेते हैं। मोनू पापा के प्यार को महसूस करता है।


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