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नकारात्मक किरदार निभाना चुनौतीपूर्ण

Posted On June - 1 - 2019

रूबरू/अंकुर नय्यर

मेघा
टीवी के चर्चित चेहरे अंकुर नय्यर को भला कौन नहीं जानता। टीवी जगत में उनका एक अलग स्थान है। ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ में वे इन दिनों फैज़ल खान के साथ नज़र आ रहे हैं।
महाराणा प्रताप से चंद्रगुप्त मौर्य तक की यात्रा कैसी रही है?
मुझे याद है कि जब हम आमगांव में महाराणा प्रताप की शूटिंग करते थे तो हमें अंदाज़ा नहीं था कि घर जाने पर कैसी प्रतिक्रिया मिलेगी, क्योंकि वहां कोई डेटा सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। अब 4 साल बाद भी लोग मुझसे बाहर मिलते हैं तो कहते हैं, ‘अरे आप महाराणा प्रताप में गुरु की भूमिका निभा रहे थे।’ ये छोटे-छोटे भाव ही हैं जो मुझे आगे बढ़ने और नई भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। अब ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ में अम्बी कुमार का किरदार कर रहा हूं । अम्बी कुमार एक स्वतंत्र व्यक्ति था, जिसे निर्णय लेने और नेतृत्व करने में मज़ा आता था। यह किरदार मुझे बहुत कुछ सिखा रहा है। उम्मीद है दर्शक भी इससे सीखेंगे।
फैज़ल खान के साथ फिर से स्क्रीन शेयर करना कैसा लग रहा है?
फैज़ल के साथ वापस आना और काम करना अद्भुत लगता है। मुझे याद है कि जब मैंने महाराणा प्रताप में गुरु आचार्य की भूमिका के साथ शुरुआत की थी तो यह एक संस्कारी चरित्र बन गया था और दर्शकों के बीच हिट हो गया था। अब जो मैंने पहले निभाया है, यह किरदार उससे पूरी तरह से अलग होने जा रहा है। ये दो विपरीत भूमिकाएं हैं। महाराणा प्रताप में, मैं उनका गुरु था और अब चंद्रगुप्त मौर्य में अम्बी कुमार के रूप में, मैं उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बनूंगा। यह मुझे एक अभिनेता के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है।
आपने नकारात्मक किरदार क्यों चुना?
इस किरदार के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात खुद की तरह रहना है और एक अभिनेता के लिए यह सबसे मुश्किल काम है। नकारात्मक किरदार चुनौतीपूर्ण भी होते हैं लेकिन आप जानते हैं कि जब आपकी सीमाएं होती हैं तो आपको उन सीमाओं के भीतर खड़े होकर काम करना होता है।
आपने चंद्रगुप्त के बारे में पढ़ा या शोध किया था?
हां, जब मैं अपने चरित्र के लिए शोध कर रहा था और चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन के बारे में पढ़ रहा था तो मुझे महसूस हुआ कि उनकी यात्रा कितनी प्रेरणादायक है। मुझे लगता है कि उनकी कहानी हमारे स्कूल के पाठ्यक्रम में होनी चाहिए। आज के युवाओं को इसे कम से कम एक बार अवश्य इसे पढ़ना चाहिए। भारतीय इतिहास इतना विशाल और प्रेरणादायक है कि अगर हम इसे पढ़ें और इसके सबक और गुणों को आत्मसात करें तो यह हमें अच्छा इनसान बना सकता है।
डेली सोप की तुलना में ऐतिहासिक शो में करना कैसे अलग है?
ऐतिहासिक शो की बात आती है तो वे सामान्य डेली सोप से पूरी तरह से अलग होते हैं। इस तरह के शो में आपकी बॉडी लैंग्वेज, बात करने का स्टाइल, आपकी वेशभूषा, सब कुछ बिल्कुल अलग होता है। ऐतिहासिक शो के सभी किरदार जीवन से बड़े हैं और जब ऐसे पात्रों को निभाने के काम की बात आती है तो आपको बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है। आप किरदार के बारे में क्या अनुभव करते हैं और जो आप निभाते हैं, वह उसी तर्ज पर होना चाहिए, जैसा कि आपके दर्शकों को उस चरित्र के बारे में भी पता चलेगा।


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