गौमांस तस्करी के शक में 2 लोगों को पीटा !    चौपाल निर्माण में घटिया सामग्री लगाने का आरोप !    नकदी नहीं मिली तो बंदूक ले गये चोर !    पीजीआई में कोरोनरी एंजियोप्लास्टी का लाइव ट्रांसमिशन !    गंगा स्नान कर लौट रहे युवक की चाकू मारकर हत्या !    यमुना प्रदूषण के मामले में 5 विभागों को नोटिस !    लिव-इन से जुड़वां बच्चों को जन्म देकर मां चल बसी !    हर्बल नेचर पार्क में लगी आग, 5 एकड़ क्षेत्र जला !    ड्रेन की आधी अधूरी सफाई से किसानों में रोष !    राहगीरों की राह में रोड़ा 3 एकड़ जमीन का टुकड़ा !    

तिरछी नज़र

Posted On June - 12 - 2019

चिलचिलाती धूप में जिंदगी की चकमक
मोहनलाल मौर्य

मेरी चलती बाइक के बाएं शीशे पर एकाएक चिलचिलाती धूप की ऐसी चमक पड़ी कि शीशा चटक गया, जिसमें से पीछे सरपट दौड़ते वाहनों को निहारना मुश्किल हो गया। समीप चलते वाहन दूर और दूर चलते वाहन समीप दिखने लगे। ट्रक बस दिखने लगी और बस ट्रक दिखने लगा। स्पीड सूई रूठकर अस्सी से चालीस की हो गई, जिसके कारण चलती बाइक पर भी चिलचिलाती धूप आलपिन की तरह चुभने लगी।
हेलमेट का शीशा उठाकर देखने लगा तो आंखें चौंधियाने लगीं। बगैर शीशे में देखे बिना बाइक चलाना मौत को बुलाना है। यह सड़क किनारे लगे एक बोर्ड पर लिखा था। सड़क किनारे लगे बोर्डों पर लिखे आदर्श वाक्य को पढ़कर चलने वाले इतनी दूर चले जाते हैं कि कभी वापस नहीं आते और पढ़कर पालन करने वाले यहीं घूमते-फिरते रहते हैं।
दाएं शीशे को पीछे बैठी प्रेयसी के चेहरे पर सेट कर रखा था ताकि गर्मी का एहसास नहीं हो। गर्मी है कि रत्ती भर भी नरमी नहीं बरत रही थी। वह भी मेरी तरह अपने प्रचंड पथ पर तीव्र गति से चल रही थी। और उसकी प्रेयसी लू तो मेघ की छांव में भी पूरी वेग से चल रही थी। जबकि मेरी प्रेयसी चिपक कर बैठने के बजाय मुंह पर दुपट्टा बांधकर मेरी पीठ में मुंह छुपाए बैठी थी।
बाइक रोककर सड़क किनारे किसी पेड़ की छांव में पांव रखने का मन इसलिए नहीं कर रहा था कि धूप धूम मचाने लग गई थी। और बाएं शीशे ने स्पीड कम कराकर बाइक पर रोमांस का जो मजा था, उस पर साइड नहीं मिलने पर हॉर्न बजाकर आगे निकलने वाले वाहनों ने पानी फेर दिया था। उस समय घर पहुंचकर कूलर की गूलर जैसी हवा खाने की स्पीड पर भी बाइक नहीं चल रही थी और प्रेयसी सीलिंग फैन की स्पीड पर चलाने के लिए बार-बार जोर दे रही थी क्योंकि चिलचिलाती धूप उसे भी अपनी गिरफ्त में ले चुकी थी। उसके माथे पर पसीने की बूंदें मोती की तरह चमकने लगी थी।
शुक्र है कि शीशा चटककर लटका नहीं। लटक जाता तो नीचे गिरता और नीचे गिरता तो पिछले टायर के नीचे आता और टायर के नीचे आता तो टायर पंक्चर होता। टायर पंक्चर हो जाता तो प्रेयसी से ब्रेकअप होना सुनिश्चित था क्योंकि भरी दुपहरी में वह पैदल चलती नहीं और मेरे अकेले से पंक्चर बाइक दो कदम भी नहीं चलती। ऐसी स्थिति में इजहार नहीं तकरार होती। तकरार में ब्रेकअप स्वाभाविक है।


Comments Off on तिरछी नज़र
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.