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कार्यकाल पूरा होने के बावजूद पद पर बने रहेंगे वार्डन

Posted On June - 13 - 2019

चंडीगढ़, 12 जून (ट्रिन्यू)
डीएसडब्ल्यू प्रो. इमानुअल नाहर, प्रो. नीना कपलाश और प्रो. रंजन कुमार को एक साल की एक्सटेंशन देने के मुद्दे पर सिंडिकेट से हारे कुलपति प्रो. राजकुमार अभी तक हॉस्टल वार्डनों की नियुक्ति को लेकर भी कोई निर्णय नहीं ले पाये। हालांकि यह निर्णय पूरी तरह से कुलपति का ही होता है कि वे किसे वार्डन लगायें और किसे नहीं। वार्डन लगाने में सिंडिकेट या सीनेट का कोई रोल नहीं होता और न ही इसे लेकर कैलेंडर में कोई प्रावधान है। मगर डीएसडब्ल्यू प्रकरण में अपनी हार के बाद से वे इन नियुक्तियों को लेकर भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। हॉस्टल नंबर-7 के डॉ. दिनेश कुमार और हॉस्टल नंबर-8 के वार्डन नरेश कुमार का 5 साल का कार्यकाल वैसे तो मई में ही समाप्त हो चुका है मगर आज जारी एक सर्कुलर के मुताबिक उन्हें पार्ट टाइम वार्डन के तौर पर अपने पद पर बने रहने को कहा गया है। गर्ल्स हॉस्टल नंबर-1 की वार्डन डॉ. सुमन मोर और गर्ल्स हॉस्टल नंबर-9 की वार्डन कंवलप्रीत कौर को भी अगले आदेशों तक पद पर बने रहने को कहा गया है। गर्ल्स हॉस्टल नंबर-1 व 9 की वार्डन का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसके अलावा नये बन रहे हॉस्टल नंबर-11 में भी वार्डन की नियुक्ति होनी है।
डीएसडब्ल्यू की कुर्सी पर कुलपति अपने सचिव के तौर पर काम कर रहे लॉ विभाग के प्रो. देविंदर सिंह को बैठाने की जुगत में थे और उन्होंने संघ व भाजपा से पूरा दबाव भी बना रखा था, लेकिन सारी सिंडिकेट एक तरफ हो गयी और कुलपति को अपनी चलती न देख डाइसेंट देना पड़ा। अब वार्डनों को लेकर भी तलवारें खिंची हुई हैं। वैसे इसमें पीयू के कैलेंडर में वरिष्ठता का कोई नियम नहीं है कुलपति अपनी मर्जी से किसी को भी यह जिम्मा दे सकते हैं।
पूटा प्रधान प्रो. राजेश गिल ने कहा है कि हॉस्टल वार्डनों के लिये अर्जी मांगने के साथ ही मांग कर डाली कि वरिष्ठता को ही वरीयता दी जाए ताकि फैकल्टी के बीच कोई गलत मैसेज न जाये और किसी प्रकार का भेदभाव व मनमुटाव न हो। इतिहास विभाग के जसबीर सिंह और बायोटेक के कश्मीर सिंह, भूगोल के सुच्चा सिंह, एंथ्रोपॉलोजी के डॉ. जेएस सहरावत, जगत सिंह, रमेश साहनी और अरुण ठाकुर भी वार्डन बनने की लंबी लाइन में हैं।


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