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हरियाणा के 338 स्कूलों में साइंस की पढ़ाई बंद

Posted On May - 15 - 2019

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 14 मई
हरियाणा में लोकसभा चुनावों की वोटिंग होते ही प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया है। प्रदेश के 906 प्राइमरी स्कूलों के साथ-साथ 338 सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में साइंस संकाय को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की कम संख्या के आधार पर यह कार्यवाही हुई है। कर्मचारी संगठन सरकार के इस फैसले के विरोध में आ डटे हैं और आंदोलन की चेतावनी दे दी है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा व विद्यालय अध्यापक संघ का कहना है कि इससे पहले भी सरकार राज्य में हजारों सरकारी स्कूलों को बंद कर चुकी है। संघ नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूल बंद करना विकास का नहीं, विनाश का मॉडल है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष धर्मबीर सिंह फौगाट, महासचिव सुभाष लांबा व प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि भाजपा सरकार आम गरीब जनता के अप्रत्यक्ष टैक्स से भरा खजाना व जनता की मेहनत की कमाई को कुछ अमीर प्राइवेट स्कूलों के मालिकों को लुटा देना चाहती है। लाम्बा ने कहा कि छात्र संख्या कम होने की आड़ में स्कूलों को बंद करने की बजाय स्कूलों में सुविधा बढ़ाकर संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के पहले से ही हाशिये पर बच्चे किसी भी तरह पड़ोस के गांवों के स्कूलों में नहीं जा सकते हैं। इसी तरह पहले से ही जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम साइंस संकाय के सरकारी स्कूल हैं। जरूरत तो इन्हें केंद्र स्तर पर करने की है, लेकिन सरकार इन्हे भी बंद कर गरीब बच्चों को साइंस की पढ़ाई से वंचित करने पर तुली है। इसे प्रदेश का अध्यापक, कर्मचारी व अभिवावक कभी सहन नहीं करेगा।
नरेश कुमार शास्त्री, राजेंद्र सिंह बाटू व सतीश सेठी ने कहा कि भाजपा के स्वच्छता अभियान के ढकोसले के बावजूद लगभग 80 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कोई सफाई कर्मचारी ही नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सवा साल से बच्चों की प्रोत्साहन राशि बकाया है। पदोन्नति जो साल में 2 बार होनी होती है, 5 साल में एक बार ही वह भी अधूरी जारी हुई है। प्राथमिक शिक्षकों का पिछले 5 साल में भाजपा सरकार ने एकमात्र असफल सामान्य तबादला किया है। इसकी त्रुटियां आज तक ठीक नहीं हुई।

निजी स्कूलों ने मांगा समय, विभाग ने किया मना, कहा-तुरंत करो दाखिले
सोनीपत (हप्र) : नियम 134 ए के तहत विद्यार्थियों को दाखिला नहीं देने वाले निजी स्कूलों के संचालकों ने शिक्षा विभाग से अब 15 दिनों का समय मांगा है, परन्तु शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने निजी स्कूलों की इस मांग को ठुकरा कर तुरन्त प्रभाव से दाखिला देने की बात कही है। यही नही जिन स्कूलों ने शिक्षा विभाग के नोटिस का जवाब नही दिया है, उन स्कूलों के खिलाफ भी मंगलवार को फाइनल नोटिस जारी करके मान्यता रद्द करने की चेतावनी जारी की गई है।
दरअसल, नियम 134-ए के तहत 30 अप्रैल को विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट होने के बावजूद निजी स्कूल दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं, जिसके चलते शिक्षा विभाग द्वारा करीब 30 स्कूलों को दाखिला देने या फिर मान्यता रद्द करने की चेतावनी वाले नोटिस जारी किए थे। सोमवार को व्यक्तिगत तौर पर भी 28 स्कूलों के खिलाफ एक बार फिर से नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद मंगलवार को कई स्कूलों ने शिक्षा विभाग से 15 दिनों का समय देने की मांग की है। इन स्कूलों में विवेकानंद, ऋषिकूल, शिव मॉडर्न, दिल्ली विद्यापीट, जानकीदास, हैप्पी चाइल्ड जैसे स्कूल शामिल हैं। वहीं, सोमवार को मान्यता रद्द करने को लेकर जारी किए गए नोटिस का कई बड़े स्कूलों ने जवाब नही दिया।
इसके खिलाफ शिक्षा विभाग ने मंगलवार को ऐसे स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद्द करने का फाइनल नोटिस जारी किया।
हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को जारी किए गए नोटिसों के बाद कई स्कूलों ने विद्यार्थियों को दाखिला देना शुरू कर दिया है। पहले चरण की दाखिला प्रक्रिया 17 मई तक चलेगी। बाद में दूसरे चरण में सीट खाली रहने पर विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा।

नियम 134ए विवाद
दाखिला नहीं देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सोमवार को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद कुछ निजी स्कूलों ने विभाग से 15 दिनों का समय मांगा है। स्कूलों की इस मांग को नकार दिया गया है। जिन स्कूलों ने नोटिस का जवाब नही दिया है, उनके खिलाफ फाइनल नोटिस जारी किया गया है।
-मनोज वर्मा, नोडल अधिकारी


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