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बुंदेला राजवंश की ‘ओरछा’ बनेगी यूनेस्को विश्व धरोहर

Posted On May - 27 - 2019

नयी दिल्ली, 26 मई (एजेंसी)
बुंदेला राजवंश के वास्तुशिल्प को प्रदर्शित करने वाली, मध्यप्रदेश स्थित ‘ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों’ को यूनेस्को की धरोहरों की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एक अधिकारी ने बताया कि ओरछा स्थित इन प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों को चिन्हित कर इनके ऐतिहासिक तथ्यों के विवरण के साथ एएसआई ने यूनेस्को को 15 अप्रैल 2019 को प्रस्ताव भेजा था।
किसी ऐतिहासिक विरासत या स्थल का, विश्व धरोहर स्थलों की सूची में जगह पाने से पहले अस्थायी सूची में शामिल होना जरूरी है। अस्थायी सूची में शामिल होने के बाद अब नियमानुसार विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी कर एक मुख्य प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा जाएगा। इससे पहले एएसआई के प्रस्ताव में ओरछा की धरोहरों को सांस्कृतिक धरोहर के वर्ग में शामिल करने का आग्रह किया गया था। ओरछा मप्र के टीकमगढ़ जिले से 80 किलोमीटर और उप्र के झांसी से 15 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के तट पर स्थित है। कहा जाता है कि ओरछा की स्थापना 16वीं सदी के बुंदेला राजा रूद्र प्रताप सिंह ने की थी। ओरछा अपने रामराजा मंदिर, शीश महल, जहांगीर महल, राम मंदिर, उद्यान और मंडप के लिए प्रसिद्ध है।


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