बच्चों की जगह रोबोट भी जा सकेगा स्कूल !    क्रिसमस की टेस्टी डिशेज़ !    खुद से पहले दूसरों की सोचें !    आ गई समझ !    अवसाद के दौर को समझिये !    बच्चों को ये खेल भी सिखाएं !    नानाजी का इनाम !    निर्माण के दौरान नहीं उड़ा सकते धूल !    घर में सुख-समृद्धि की हरियाली !    सीता को मुंहदिखाई में मिला था कनक मंडप !    

…शक्तिरूपेण संस्थिता

Posted On April - 1 - 2019

सत्यव्रत बेंजवाल
शक्ति पूजन, शक्ति संवर्धन और शक्ति संचय के दिन होते हैं नवरात्र। मान्यता है कि चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन मां जगदम्बा का आविर्भाव हुआ था। चैत्र नवरात्र में ही भगवान विष्णु का सप्तम अवतार ‘राम’ के रूप में हुआ। ‘नवरात्र’ में ‘नव’ शब्द का अर्थ ‘नया’ भी है और ‘नौ’ भी। नूतन संवत्सर के पहले दिन होने के कारण इन दिनों को ‘नव’ कहना जहां सुसंगत है, वहां ये ‘दुर्गा’ मां के नौ स्वरूपों के लिए भी हैं। नवरात्र खुद को जगाने के दिन हैं। ‘शक्तिरूपेण संस्थिता…’ यानी जिस देवी में सम्पूर्ण जगत की शक्ति निहित है, उस मां भगवती से नव शक्ति पाने के दिन हैं।
इस बार चैत्र नवरात्र पूरे नौ दिन रहेंगे। इस दौरान पांच सर्वार्थसिद्धि के साथ दो रवि- योग और एक रवि-पुष्य संयोग बन रहा है। ऐसे योग यदा-कदा ही बनते हैं। ऐसे में देवी साधकों के लिए ये नवरात्र बेहद खास रहेंगे। दूसरे नवरात्र यानी 7 अप्रैल को सर्वार्थसिद्धि योग बनेगा। इसके अगले दिन तृतीया के साथ रवि-योग बन रहा है। वहीं, 9 अप्रैल को फिर सर्वार्थसिद्धि बन रहा है। भूमि व मकान खरीदने जैसे काम के लिए यह बेहद शुभ समय होगा। इसके अगले दिन 10 अप्रैल को पंचमी के साथ सर्वार्थसिद्धि (लक्ष्मी पंचमी) योग बनेगा। 11 अप्रैल को छठ के साथ रवि योग बनेगा, जो संतान सुरक्षा संबंधी उपायों व पूजा के लिए विशेष समय होगा। वहीं, 12 अप्रैल सप्तमी के साथ बन रहे सर्वार्थसिद्धि योग के दौरान नये संबंधों की चर्चा शुरू करना फलदायी होगा। इसके बाद 13 अप्रैल को अष्टमी पर कुल देवी पूजन का योग और 14 अप्रैल को नवमी पर रवि-पुष्य व सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। इस दिन सुबह 9.37 बजे तक नवमी रहने के कारण इसी दिन दुर्गा नवमी व राम नवमी मनाई जाएगी।

घटस्थापन मुहूर्त
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 6 अप्रैल को दोपहर 12.06 से 12.54 तक अभिजित मुहूर्त है। इसी दौरान घटस्थापन करना शुभ रहेगा। इससे पहले वैधृति योग की अड़चन है। ‘देवी भागवत’ के अनुसार चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में घटस्थापन शुभकारक नहीं है।

जौ बीजने का महत्व
चैत्र नवरात्र में पहले दिन ‘कलश स्थापना’ (घटस्थापन) की जाती है। कलश को सुख-समृद्धि, वैभव, मंगलकार्यों का प्रतीक माना जाता है। श्री दुर्गा, गणेश, शिव आदि की प्रतिमा के सम्मुख शुद्ध चित्त होकर विधिपूर्वक कलश स्थापित करें और ज्योति जलाकर पूजा करें। कलश के इर्द-गिर्द मिट्टी में ‘जौ’ (ज्वार) बोएं। जौ की खेतरी बोने के पीछे मान्यता है कि सृष्टि के शुभारंभ में जो फसल सबसे पहले उत्पन्न हुई, वह जौ ही थी। पूजा-पाठ एवं हर धार्मिक अनुष्ठान में जौ को शुभ माना जाता है। नवरात्र में प्रतिदिन ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करने से सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

व्रती का ऐसा हो आचरण
नवरात्र में व्रती के लिए कई नियम बताए गये हैं। उसे जमीन पर सोना चाहिये। कम खाना चाहिये। आचरण में दया, उदारता रखनी चाहिये। क्रोध, लोभ, मोह का त्याग करना चाहिये और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिये। अष्टमी या नवमी को नवान्न यज्ञ के बाद कंजक पूजन करके व्रत का पारण करना चाहिये। नवरात्र में कन्या पूजन (कंजक) का अति महत्व है। शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन से धन, बल, विजय और समस्त अभीष्ट प्राप्त होते हैं।

इन रंगाें से करें देवी का शृंगार
प्रथमा (शैलपुत्री)                     लाल
द्वितीया (ब्रह्मचारिणी)         नीला
तृतीया (चंद्रघंटा)                   पीला
चतुर्थी (कूष्मांडा)                   हरा
पंचमी (स्कंदमाता)                ग्रे
षष्ठी (कात्यायनी)                नारंगी
सप्तमी (कालरात्रि)               सफेद
अष्टमी (महागौरी)                गुलाबी
नवमी (सिद्धिधात्री)               आसमानी


Comments Off on …शक्तिरूपेण संस्थिता
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.