दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित का निधन !    5 मिनट में फिट !    बीमारियां भी लाता है मानसून !    तापसी की 'सस्ती पब्लिसिटी' !    सिल्वर स्क्रीन !    फ्लैशबैक !    सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार !    खबर है !    हेलो हाॅलीवुड !    हरप्रीत सिद्धू फिर एसटीएफ प्रमुख नियुक्त !    

सर्जिकल स्ट्राइक के दावों के किंतु-परंतु

Posted On March - 14 - 2019

अजय साहनी

आज की तारीख में यदि आप सरकार अथवा सत्तारूढ़ दल द्वारा फैलाई जा रही सूचनाओं पर सवाल उठाते हैं तो कहा जाता है कि आप भारतीय सशस्त्र बलों का अपमान कर रहे हैं। अगर आप उन लोगों से सुबूतों के लिए कहें तो वे तुरंत आप को सीधे राष्ट्र-विरोधी ठहरा देते हैं!
लेकिन जब कहा जाता है कि हमारे 12 लड़ाकू जहाजों ने हजार किलो से ज्यादा बम दुश्मन के इलाके के काफी तक अंदर जाकर सख्त निगरानी वाले किलेबंदी जैसे परिसर पर गिराए हैं जहां इस्लामिक आतंकी तैयार किए जाते रहे हैं तो इनको क्या लगता है कि दुनिया इस दावे पर आंखें मूंदकर यकीन कर लेगी? जिस इलाके की बात कही जा रही है, वह ऐसा भूभाग है, जिसे विश्व के सबसे अशांत और गड़बड़ी फैलाऊ क्षेत्रों में गिना जाता है और वहां की गतिविधियों पर विश्व की निगाह रही है। आगामी आम चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के मंतव्य से उक्त दावा करने वाले ये लोग भले ही खबरिया चैनलों पर चिल्लाने वाले तथाकथित सुरक्षा विशेषज्ञों को साधकर युद्धोन्माद की हवा बनाने के अलावा ऐसा दर्शाना चाहते हैं कि पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय से बैठकर देश को अपने इशारों पर नचाने वाली पाकिस्तानी सेना मानो कोई हलवे जैसी मुलायम वस्तु है। पहले तो यह जुमला उछाला गया कि भारतीय कार्रवाई किसी सरकार या लोगों के विरुद्ध न होकर केवल आतंकियों के खिलाफ ‘गैर-सैन्य एहतियातन हमला’ है। उसके बाद बिना सुबूत पेश किए श्रेय लेने वाले इसकी सफलता का ढिंढोरा पीट रहे हैं जबकि विरोधी मुल्क इस तथाकथित ‘सफलता’ का प्रमाण सबको पेश कर रहा है।
हालांकि ताजा हवाई कार्रवाई ने भारत द्वारा हाल तक जिस सामरिक लीक को अपनाए रखा था, उसे नाटकीय ढंग से बदल दिया है। तथापि सतारूढ़ दल का प्रपंच भी एकदम साफ दिखाई दे रहा है, इसके द्वारा फैलाए जा रहे प्रचार ने भारत की साख को बट्टा लगाया है। मौजूदा द्वंद्व का जो भी परिणाम निकलेगा लेकिन इतना स्पष्ट है कि जहां एक ओर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत छायायुद्ध में पाकिस्तान से मात खा चुका है वहीं पाकिस्तानी रुख ने कुछ समर्थन हासिल कर लिया है, जबकि कुछ हफ्ते पहले हुई पुलवामा आतंकी घटना के बाद वह अपनी भूमिका को लेकर लगभग सभी देशों की भर्त्सना का कोपभाजन बना था।
इस शोर भरे माहौल में जो कुछ पुराना ध्वस्त हुआ है, उसमें अव्वल तथ्य यह है कि देश के मौजूदा नेतृत्व ने निर्भीक फैसले लेते हुए लंबे समय से स्थापित गलत लीक का पुनर्निर्धारण किया है कि पाकिस्तान की ओर से भड़काहट भले ही कितनी भी गंभीर क्यों न हो लेकिन भारत उसकी वायुसीमा का अतिक्रमण नहीं करेगा। इस ‘सिद्धांत’ को कारगिल युद्ध के दौरान भी अक्षुण्ण रखा गया था। दूजा, भारत ने सीमा रेखा के पार जाकर पाक नियंत्रित कश्मीर में छोटी दूरी के वायु-हमले करने की बजाय पाकिस्तान के काफी अंदर घुसकर कार्रवाई की है। इन प्रतिक्रियाओं से उसे भारत की नई राजनीतिक इच्छाशक्ति और दृढ़ता से यह संदेश बखूबी मिल जाना चाहिए कि रायसीना पहाड़ी के प्रतिष्ठानों में बैठने वाले भारतीय नेतृत्व की ओर से पाकिस्तान-समर्थित आतंकी दुस्साहसों के जवाब अब नए स्तर पर मिला करेंगे।
किसी भी देश के सामरिक संवाद का मुख्य सिद्धांत यह है कि राष्ट्रीय एजेंसियां तथ्यों की पूरी जांच के बाद ही संयम और पूरे अधिकार के साथ अपने वक्तव्य देती हैं और उनमें ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए, जिसे आगे चलकर झूठा ठहराया जा सके। इसकी बजाय हुआ यह कि सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से लगातार डींगें हांकने से भारत मजाक का विषय बनकर रह गया है। खुद वायुसेना ने बालाकोट हमले में मारे गए आतंकियों की अनाधिकारिक संख्या तस्दीक करने से मना कर दिया है।
उपग्रह फोटो के आधार पर अब अंतर्राष्ट्रीय स्रोत पुष्टि कर रहे हैं कि बालाकोट के पास जाबा नामक पहाड़ी की चोटी पर बना आतंकी कैंप, जिसे भारत के विदेश सचिव ने मुख्य निशाना बताया है, उसको कोई भारी नुकसान नहीं पहुंचा है, अलबत्ता कैंप के नजदीक लगभग 150-200 मीटर की दूरी पर तीन ऐसे बिंदु जरूर हैं जहां कुछ नुकसान हुआ दिखाई दिया है। मारे गए आतंकियों की कथित संख्या और आतंकी कैंप को हुआ ‘नुकसान’ भाजपा के चुनाव प्रचार का अंग बन गया है। पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने मारे गए आतंकियों का आंकड़ा 250 कहा है और सोशल मीडिया पर सरकार समर्थक यह दलील दे रहे हैं : ‘बड़ी बात यह है कि हमने दुश्मन की सीमा के काफी अंदर तक जाकर वार किया है।’
अतिरेक भरे यह दावे भी किए जा रहे हैं कि इससे पाकिस्तान की मानसिकता पर गहरा असर हुआ है, वह घुटनों पर आ गया है और इतना मजबूर बना दिया गया है कि डर के मारे उसे शांति के लिए गुहार लगानी पड़ रही है। यह जैसा दिखाया जा रहा है, दरअसल वैसा है नहीं। वहीं प्रपंच रचने में पाकिस्तान का कोई सानी नहीं है। उसकी बाजीगरी का आलम यह है कि वह एक ऐसा मुल्क है जो लंबे समय से न केवल अमेरिकी मदद पर टिका है और उसकी बात न मानने पर कई तरह की दंडात्मक कार्रवाई अहद होने की संभावना भी रही है, एक ऐसी भूमि जिस पर मौजूद आतंकी अड्डों पर अमेरिकी ड्रोनों ने ताबड़तोड़ हमले करने से गुरेज नहीं रखा है, लेकिन इन सबके बावजूद अफगानिस्तान में अमेरिकी मंतव्यों को असफल करने से पाकिस्तान कभी बाज नहीं आया है और न ही इसने अपनी कुख्यात ‘अफगान नीति’ को कभी छोड़ा है।
हवाई कार्रवाई के बाद इमरान खान द्वारा एक सुलझे हुए राजनेता की भांति विचार व्यक्त करने को लेकर काफी कुछ कहा गया है। उन्होंने दोनों मुल्कों को चेताया कि गणना में हुई चूक ऐसी तबाहकुन लड़ाई में तबदील हो सकती है जो दोनों प्रधानमंत्रियों के काबू में नहीं रहेगी और वार्ता के लिए आह्वान किया है। भारतीय वायुसेना के हमले के तुरंत बाद इमरान ने पलटवार की धमकी दी थी और इसे पूरा भी कर दिखाया था। इसके अलावा इमरान खान के कथन के बाद सीमा-पारीय युद्धविराम उल्लंघना में काफी वृद्धि हुई है। जहां तक बात पाकिस्तानी भूमि से सक्रिय आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने की है तो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित किए गए गुटों के लिए जारी निर्देश सूची में इसके सरगनाओं को एहतियातन गिरफ्तार करना एक उपाय है, लेकिन पाकिस्तान ऐसा कुछ करेगा, इसकी उम्मीद कतई नहीं है। वह अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने से पूर्व यह मांग रखता है कि भारत पहले अपनी धरती पर हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तानी मिलीभगत का सुबूत पेश करे।
लेकिन बात जब ‘सुरक्षा बलों के अपमान’ पर आती है तो ऐसा कहने वाले लोग ही हैं जो खुद भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, वायुसेना के नाम पर अतिरेकता से भरे दावे कर रहे हैं। गलत तथ्य देने वालों में टीवी चैनलों के ऐसे एंकर भी हैं जो मिलेट्री की वर्दी पहनकर स्टूडियो में बैठकर जनरलों की तरह व्यवहार करते हुए अभियानों की रूपरेखा बनाने लगे थे। ये वही लोग हैं, जिनके पास सच बताने का साहस नहीं है। थोथी बुनियाद पर आप एक मजबूत देश नहीं बना सकते।

लेखक इंस्टीट्यूट फॉर कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।


Comments Off on सर्जिकल स्ट्राइक के दावों के किंतु-परंतु
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.