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‘संजीवनी’ है पुनर्नवा से बनी दवा

Posted On March - 14 - 2019

नयी दिल्ली, 13 मार्च (ट्रिन्यू)
किडनी रोग से जूझ रहे रोगियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। इस रोग का आयुर्वेद में इलाज मिल गया है। आयुर्वेद में उल्लेखित पुनर्नवा पौधे में ऐसी क्षमता है, जिससे किडनी फेलियर के रोगी को नया जीवन दिया जा सकता है। संक्रमण के अलावा किडनी प्रत्यारोपण की नौबत से भी बचा जा सकेगा। पुनर्नवा पौधे पर रिसर्च से तैयार नीरी केएफ्टी दवा के सफल परिणाम भी दिख रहे हैं।
विश्व किडनी दिवस, 14 मार्च के, अवसर पर देशभर के आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने कहा कि इस रोग के उपचार के लिए आयुर्वेद जैसी वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए। एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल के अनुसार यहां रोजाना लगभग 200 किडनी रोगी पहुंच रहे हैं। इनमें 70 फीसदी केस किडनी फेल या डायलिसिस के होते हैं। बनारस हिंदू विवि के प्रोफेसर डॉ. केएन द्विवेदी का कहना है कि कुछ समय पहले बीएचयू में हुए अध्ययन में नीरी केएफ्टी कारगर साबित हुई है।
इंडो अमेरिकन जर्नल ऑफ फॉर्मास्यूटीकल रिसर्च में प्रकाशित शोध के अनुसार पुनर्नवा के साथ गोखरु, वरुण, पत्थरपुरा, पाषाणभेद, कमल ककड़ी बूटियों से बनी नीरी केएफ्टी किडनी में क्रिएटिनिन, यूरिया व प्रोटीन को नियंत्रित करती है। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को स्वस्थ करने के अलावा हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाती है। एमिल फॉर्मास्यूटीकल के संचित शर्मा का कहना है कि इस उपचार को जापान, कोरिया और अमेरिका भी अपना रहे हैं। मधुमेह व सफेद दाग की बीजीआर-34 व ल्यूकोस्किन को भी सराहा जा रहा है।
आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 12,500 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की मंजूरी दी है। वर्ष 2021 तक यहां किडनी की न सिर्फ जांच, बल्कि नीरी केएफ्टी जैसी दवाओं से उपचार भी दिया जाएगा। सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. मनीष मलिक का कहना है कि देश में लंबे समय से किडनी विशेषज्ञों की कमी है, ऐसे में डॉक्टरों को आयुर्वेद जैसी वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए। एम्स के डॉ. अग्रवाल का कहना है कि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर साल 6 हजार किडनी प्रत्यारोपण हो रहे हैं, इसलिए जागरूकता बेहद जरूरी है।


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