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विधानसभा की रौनक

Posted On March - 1 - 2019

महेन्द्रगढ़ वाले पंडितजी अकेले ऐसे नेता हैं, जो विधानसभा में रौनक लगाए रखते हैं। पक्ष और विपक्ष में कितना भी टकराव क्यों न हो, पंडितजी में ऐसी कला है कि वे उसे तुरंत हंसी-मजाक में बदल देते हैं। विपक्ष की हर बात का तोड़ रखने वाले दादा अकेले ही पूरे विपक्ष से निपट लेते हैं। बजट सत्र में भी कई बार ऐसे मौके आए जब दोनों पक्षों में काफी तकरार बढ़ गई, लेकिन उन्होंने अपने किस्सों से मामले को निपटा दिया। बातों-बातों में ही कटाक्ष करने की भी उनमें कला है। वे भाजपा इनेलो और कांग्रेस नेताओं की तारीफ करने से पीछे नहीं हटते। बेशक, इसके लिए कई बार उनके अपने भी उनसे नाराज़ होते हों, लेकिन उनके चेहरे पर कभी इसकी शिकन देखने को नहीं मिली। अब अपने सांघी वाले ताऊ को लेकर भी वे लगातार चुटकियां लेते रहे कि जींद उपचुनाव में हुड्डा साहब का कांटा निकल गया। उनका इशारा रणदीप सुरजेवाला की हार की ओर था। अब यह तो सभी जानते हैं कि कांटा तो पंडितजी का भी फंसा हुआ है, लेकिन इसके निकलने का कोई समय तय नहीं है। कुछ है तो बस इंतजार।

ताऊ का ‘आत्मघाती दस्ता’
सांघी वाले ताऊ यानी पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के इर्द-गिर्द भी ‘आत्मघाती दस्ते’ की कोई कमी नहीं है। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जिन्हें राजनीति का लम्बा-चौड़ा अनुभव तो है, लेकिन जुबान पर लगाम नहीं है। हमेशा ही मरने-मारने को तैयार रहते हैं। इसका नज़ारा विधानसभा के बजट सत्र में देखने को मिला। ताऊ के खासमखास एक विधायक महोदय ने बाढ़सा के एम्स-।। के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए यहां तक धमकी दे दी कि अगर यहां से एम्स शिफ्ट हुआ या नहीं बना तो जान-माल का नुकसान हो जाएगा। अब इन्हें कौन समझाए कि ऐसी भाषा से ही तो लोगों को परेशानी है। अब ताऊ भी करें तो क्या। रोक भी नहीं सकते। जानते वे भी हैं कि जो कुछ बोला जा रहा है, वह सही नहीं। खैर, राजनीति है, इसमें सब जायज है! वैसे भाजपाई लोगों को इसमें आनंद आ रहा है। एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि ऐसे लोगों को तो अधिक से अधिक बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।

भाजपाइयों का संग्राम
दाढ़ी वाले कामरेड बाबा यानी अनिल विज और अंबाला सिटी से भाजपा विधायक असीम गोयल की भी नहीं बन रही है। कहने को बेशक, किसी तरह का विवाद न हो, लेकिन बजट सत्र के प्रश्नकाल में गोयल ने इसके संकेत दिए। सीएम ने अंबाला सिटी में 12 महीनों वाले स्विमिंग पूल स्पोर्ट्स स्टेडियम की घोषणा तो कर दी, लेकिन पूरी नहीं की। पूरी इसलिए नहीं हो सकी, क्योंकि ये दोनों सुविधाएं अंबाला कैंट में दी जा चुकी हैं। अब गोयल अपनी ही सरकार पर भड़क उठे। कहने लगे, अंबाला कैंट में जो चाहे बनाओ, लेकिन हमारा तो रद्द न करो। सीएम की ओर से जवाब दे रहे पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर को जब कुछ नहीं सूझा तो कहने लगे, अब विज साहब खेल मंत्री हैं और वे ये दोनों प्रोजेक्ट अपने यहां ले गए तो मैं क्या करूं।

पंडितजी का फरसा
पिछले दिनों सांघी वाले ताऊ की दिल्ली कोठी पर 2 नेताओं में ठन गई। बादली वाले पंडितजी यानी कुलदीप वत्स कोठी पर गए हुए थे तो वहां ताऊ के एक करीबी विधायक को उनकी वहां मौजूदगी रास नहीं आई। आती भी कैसे, बादली वाले पूर्व विधायक के साथ उनका ‘प्यार-प्रेम’ इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ा हुआ है। पंडितजी को देखते हुए इन धोती वाले नेताजी ने उनकी जाति पर ऐसी टिप्पणी की कि वत्स भड़क उठे। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि दोनों में खूब कहासुनी हुई। बताते हैं कि अपनी उम्र का भी लिहाज किए बिना जब इन विधायक महोदय ने हाथ उठाने की कोशिश की तो पंडितजी ने भी अपना परशुराम रूप दिखा दिया। बात बड़ी मुश्किल से संभली, लेकिन जब इतनी बात हुई तो दूर तक जानी ही थी।

काका के तेवर
‘खट्टर काका’ इन दिनों खुलकर बैटिंग कर रहे हैं। जींद उपचुनाव के नतीजों के बाद तो कुछ ज्यादा ही बोल्ड हो गए हैं। बताते हैं कि अब तो अफसरों को भी लताड़ने लगे हैं। राज्यपाल अभिभाषण का जवाब देते हुए तो विपक्ष पर हमलावर हुए ही बाद में बजट सत्र के आखिरी दिन पीएलपीए कानून में बदलाव पर भी अड़ गए। कांग्रेस और इनेलो ने विरोध भी खूब किया और हंगामा भी हुआ, लेकिन काका ने दो-टूक कहा कि मुझे किसी की चिंता नहीं। कोई कुछ भी आरोप लगाए और कुछ कहता रहे, मैं वहीं करूंगा जो मुझे लोगों के लिए सही लगेगा। काका का यह नया रूप अफसरशाही के अलावा सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

एडजस्टमेंट की कोशिश
हरियाणा के कम से कम आधा दर्जन आईएएस अपने ‘सुखद भविष्य’ के लिए गोटियां सेट करने में जुटे हैं। एक साहब तो रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले ही वीआरएस ले गए। अब जब वीआरएस ली है तो कोई ठोस कारण भी रहा होगा। जी हां, ये साहब हैं अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे रामनिवास, जिन्हें सरकार ने हरियाणा पुलिस कम्पलेंट अथॉरिटी का चेयरमैन भी नियुक्त कर दिया है। कुछ और साहब हैं, जिनकी रिटायरमेंट नजदीक है। वे भी विभिन्न आयोगों में एडजस्टमेंट के लिए लॉबिंग करने में जुटे हैं। ब्यूरोक्रेसी वाले ‘बड़े बाबू’ भी एक आयोग में चेयरमैन के लिए अप्लाई कर चुके हैं। वैसे काका की सरकार में ‘संघ संस्कृति’ अधिक महत्व रखती है। हैरान अपने भाजपाई भाई लोग भी हैं। कह रहे हैं, पूर्ववर्ती सरकारों में भी मुख्यमंत्री के खासमखास रहे नौकरशाह अब ‘संघी भाइयों’ के भी खास कैस हो गए। अब इन्हें कौन समझाए कि अफसरशाही का कोई ‘अपना’ कोई ‘पराया’ नहीं होता।

‘बिल्लू’ की ताकत
इनेलो वाले ‘बिल्लू’ भाई साहब भी शुक्रवार को ताकत दिखाने वाले हैं। वे हिसार के हांसी में बड़ी रैली कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। बड़े चौधरी यानी इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला रैली में मुख्यातिथि होंगे। इनेलो के टूटने और दुष्यंत द्वारा जननायक जनता पार्टी का गठन करने के बाद इनेलो की यह पहली रैली होगी। अब देखना यह होगा कि बिल्लू भाई कितनी भीड़ हांसी में जुटाते हैं।
-दिनेश भारद्वाज


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