चुनाव आयोग की हिदायतों का असर : खट्टर सरकार ने बदले 14 शहरों के एसडीएम !    अस्पताल में भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़ !    यमुना का सीना चीर नदी के बीचोंबीच हो रहा अवैध खनन !    जाकिर हुसैन समेत 4 हस्तियों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप !    स्टोक्स को मिल सकती है ‘नाइटहुड’ की उपाधि !    ब्रिटेन में पहली बार 2 आदिवासी नृत्य !    मानहानि का मुकदमा जीते गेल !    शिमला में असुरक्षित भवनों का निरीक्षण शुरू !    पीओके में बाढ़ का कहर, 28 की मौत !    कांग्रेस ने लोकसभा से किया वाकआउट !    

मुखर हुई महिलाएं

Posted On March - 8 - 2019

महिलाओं के प्रति हिंसा के कई कारण हैं। एक तो महिलाएं मुखर हुई हैं, भली औरत के तमगे से खुद को आज़ाद किया और बुरी औरत कहलाने का साहस जुटा लिया। उसने सामाजिक निंदा और आरोपों की परवाह करना बंद कर दिया। उसने अपने को पहचाना, उसके भीतर अपनी पहचान की छटपटाहट आई और उसने चुनौतियां स्वीकार कीं। अपने दम पर आगे बढ़ीं। उन्होंने रूढ़ियों से विद्रोह किया और ख़तरे उठाए। उनकी प्रगति, उनका बेखौफपन पितृसत्तात्मक व्यवस्था को कैसे पसंद आएगा। अब तक महिलाएं उनकी उपनिवेश थीं, जिन पर वे राज करते थे। उनके बिना महिलाएं एक कदम आगे नहीं बढ़ा सकती थीं। अब वो कठपुतलियां नहीं रहीं। हर क्षेत्र में अपनी धमक बनाई है। वे शिक्षित हुईं और आर्थिक ताकत हासिल की।
एक बड़ा शासक वर्ग विचलित हुआ। उसके हाथ से सत्ता खिसकने लगी। अचानक चंगुल से गुलाम छिटकने लगे। वे अपना निर्णय खुद लेने लगीं, खुद मुख्तार हो गईं। इससे हलचल तो मचेगी ही। महिलाओं पर घरेलू हिंसा बढ़ी, दफ्तरों में कमतर बता-बता कर मानसिक हिंसा होने लगी। ऑनर किलिंग हुई। इसे खत्म करने के दो ही उपाय कि औरतें आर्थिक रूप से आज़ाद हों और हर तरह की हिंसा के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें चाहे इसके लिए उन्हें कंफर्ट ज़ोन से क्यों न बाहर आना पड़े। बिना मरे स्वर्ग नहीं मिलता…ये ध्यान रहे।
‘मी टू’ एक आंदोलन ने उन तमाम औरतों को साहस दिया है जो चुपचाप यौन हिंसा सहन कर रही थीं। आज वे सक्षम हैं। उन्हें इतना दबा कर, डरा कर रखा गया कि एक दिन भयहीन होना ही था। ‘मी टू’ अभियान ने उन्हें और निर्भय कर दिया। ग्रामीण महिलाओं तक अभी महिला मुक्ति आंदोलन नहीं पहुंचा है। अभी उनकी ज़रूरतें अलग हैं। वे इतनी शिक्षित नहीं हैं, न कोई आर्थिक आधार है। वे आज भी पिस रही हैं। घुटन में हैं। हालांकि धीरे-धीरे तस्वीर बदल रही है। पंचायतों में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ा है। कुछ न सही, राजनीतिक चेतना तो जगी है। पहले ये जरूरी है कि ग्रामीण औरतों तक उनके अधिकारों की बात पहुंचे। वे शिक्षा का महत्व समझें। तभी हालात बदलेंगे।
-गीताश्री (लेखिका)


Comments Off on मुखर हुई महिलाएं
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.