दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित का निधन !    5 मिनट में फिट !    बीमारियां भी लाता है मानसून !    तापसी की 'सस्ती पब्लिसिटी' !    सिल्वर स्क्रीन !    फ्लैशबैक !    सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार !    खबर है !    हेलो हाॅलीवुड !    हरप्रीत सिद्धू फिर एसटीएफ प्रमुख नियुक्त !    

निगरानी में कोताही

Posted On March - 14 - 2019

उम्मीदवारों की दिन-रात बढ़ती संपत्ति
एक बार फिर  देश की शीर्ष अदालत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अब जबकि देश आम चुनावों की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है तब भी  उम्मीदवारों की संपत्ति पर निगरानी के लिए कारगर तंत्र क्यों नहीं बनाया जा सका। इस मामले में गंभीर सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिये दो सप्ताह का समय दिया है। दरअसल, बीते साल सुप्रीमकोर्ट ने चिंता जताई थी कि जनप्रतिनिधि और उनके परिजन ऐसे तौर-तरीके  अपनाते हैं कि वे धन-संपदा जुटाने के बावजूद भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के दायरे से बच जाते हैं। जिसके चलते शीर्ष अदालत ने इनकी भ्रष्ट कारगुजारियों पर अंकुश लगाने के लिये सरकार से कहा था कि स्थायी निगरानी के लिये कारगर व्यवस्था करे। साथ ही उम्मीदवार और उनके आश्रितों की आय के स्रोतों की जानकारी जुटाने को कहा गया था। लेकिन अब जबकि सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा हो चुकी है, ऐसी पहल की आवश्यकता तत्काल महसूस की जा रही है। एक सर्वेक्षण में कुछ जनप्रतिनिधियों की आय में सौ प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से सुप्रीमकोर्ट की चिंता से सहमत हुआ जा सकता है।
एक गैर सरकारी संगठन की अवमानना याचिका पर चर्चा के दौरान मंगलवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की  अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार को जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए चेताया कि अदालत इस बात का कोई नोटिस जारी नहीं कर रही है मगर वह सरकार का पक्ष सुनना चाहती है कि उसने निगरानी तंत्र तैयार क्यों नहीं किया? आखिर उसने अदालत के निर्णय का पालन क्यों नहीं किया? अदालत ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या निर्वाचन के फार्म-26 में संशोधन करके उसमें अयोग्यता का प्रावधान जोड़ा गया है? देश में चुनावों के दौरान जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से भी ज्यादा धन खर्च होने की संभावना है, ऐसे में उम्मीदवारों के पैसा पानी की तरह बहाने के मूल में कहीं न कहीं नंबर दो के स्रोत से आय अर्जित करना भी है। उम्मीदवारों द्वारा अपवित्र संसाधनों से धन जुटाने की ही वजह यह भी है कि देश में चुनाव लड़ना बहुत महंगा हो गया है, जिसके चलते ईमानदार व वाकई योग्य जनप्रतिनिधि चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो गये हैं। इसे लोकतंत्र की ‍विफलता के रूप में देखा जा सकता है। जाहिर सी बात है कि अपवित्र तौर-तरीकों से अर्जित धन संपदा देश में लोकतंत्र की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रही है। इस तरह चुनाव धनबल के भौंडे प्रदर्शन का सबब बनकर रह जाता है।


Comments Off on निगरानी में कोताही
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.