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धर्म वाक्य

Posted On March - 18 - 2019

विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनं
विद्या भोगकरी यश:सुखकरी विद्या गुरूणां गुरु:।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परं दैवतं
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीन: पशु:।।
विद्या मनुष्य का एक विशेष सौन्दर्य है, छिपा हुआ सुरक्षित धन है, विद्या, भोग, यश और सुख को देने वाली है; विद्या गुरुओं की भी गुरु है, वह परदेश में जाने पर स्वजन के समान सहायता करने वाली है। विद्या ही सबसे बड़ी देवता है, राजाओं में विद्या का ही सम्मान होता है, धन का नहीं, विद्या के बिना तो मनुष्य पशु के समान है।

रे रे चातक सावधानमनसा मित्र क्षणं श्रुयता-
मम्भोदा बहवो वसन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशा:।
केचिद‍् वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचिद‍् वृथा
यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वच:।।
अरे मित्र पपीहे! सावधान मन से जरा एक क्षण सुन तो! अरे, आकाश में मेघ तो बहुत हैं, किन्तु सब एक-से ही नहीं हैं, कोई तो बार-बार वर्षा करके पृथ्वी को गीली कर देते हैं और कोई व्यर्थ ही गरजते हैं, तू जिस-जिस को देखे उसी-उसी के सामने दीन  वचन मत बोल।

मौनान्मूक: प्रवचनपखुश्चाटुलो जल्पको वा
धृष्ट: पार्श्वे वसति च तदा दूरतश्चाप्रगल्भ:।
क्षान्त्या भीरुर्यदि न सहते प्रायशो नाभिजात:
सेवाधर्म: परमगहनो योगिनामप्यगम्य:।।
मनुष्य चुप रहने से गूंगा, चतुर वक्ता होने से चापलूस या बकवादी कहलाता है, इसी प्रकार यदि पास में बैठे हो तो ढीठ, दूर रहे तो दब्बू, क्षमा रखे तो डरपोक और अन्याय न सह सके तो प्राय: बुरा समझा जाता है, इसलिए सेवा धर्म बहुत ही कठिन है, इसे योगी भी नहीं जान पाते।

व्रत-पर्व
18 मार्च- सोम प्रदोष व्रत, गोविन्द द्वादशी, श्री नृसिंह द्वादशी (उत्तर भारत)।
19 मार्च- महेश्वर व्रत, वृष दान।
20 मार्च- होलिका दहन (भद्रा बाद-रात 8.59 बाद),
श्री सत्यनारायण व्रत, लक्ष्मी नारायण व्रत, उत्तर गोल प्रारंभ, महाविषुव दिन चौमासी चौदस (जैन)।
21 मार्च- फाल्गुन पूर्णिमा (स्नानदानादि), हरौली, हरड़ी होलाष्टक समाप्त, होली पर्व, धुलैंडी, होलिका विभूति धारण, होला-मेला (श्री आनंदपुर व पांवटा साहिब), धूलिवन्दन, ध्वजारोहण आम्र कुसुम प्राशन, श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती।
22 मार्च- सन्त तुकाराम जयंती, चित्रगुप्त पूजा, भाई दोज (म.प्र.), राष्ट्रीय नव वर्ष शक 1941 प्रारंभ।
24 मार्च- गणेश चतुर्थी व्रत।

-सत्यव्रत बेंजवाल


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