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काका का रोड-शो

Posted On March - 29 - 2019

‘खट्टर काका’ लोकसभा चुनाव के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं। बेशक, पार्टी ने अभी उम्मीदवारों का फैसला नहीं किया है, लेकिन काका ने इससे पहले ही मोर्चाबंदी कर डाली है। चुनाव प्रचार के दौरान वे पूरे प्रदेश को नापेंगे, लेकिन फिलहाल रोड-शो व चुनावी सभाओं के लिए काका चुनिंदा क्षेत्रों में जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के रोहतक संसदीय क्षेत्र के मातनहेल गांव को उन्होंने जनसभा के लिए चुना। मातनहेल पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल का मायका है। इसी तरह से भूतपूर्व सीएम बंसीलाल के पैतृक गांव गोलागढ़ से सटे जुई को चुना। पानीपत में भी काका रोड-शो कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि इन क्ष्ोत्रों का चयन काका ने सोच-समझ कर किया। कहने वाले कह रहे हैं कि काका पानीपत में रोड-शो के जरिये पुराने संघी साथी के लिए ग्राउंड तैयार करने में जुटे हैं। करनाल से संजय भाटिया उनकी पहली पसंद हैं। ऐसे में वे भाटिया को टिकट दिलाने ही नहीं, बल्कि उनकी जीत तय करने में जोर लगा रहे हैं।

राजनीति और आईपीएल
बिश्नोई दंपति यानी कुलदीप और रेणुका बिश्नोई इन दिनों हरियाणा से बाहर हैं। लोकसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। भाई साहब अपने बेटे भव्य बिश्नोई को राजनीति में स्थापित कराना चाहते हैं। इसके लिए पापड़ भी बेलने पड़ रहे हैं, लेकिन चुनाव के समय में उनका प्रदेश से बाहर होना कई सवाल खड़े कर रहा है। बताते हैं साहब, परिवार सहित स्टेडियम में आईपीएल मैच देखने में व्यस्त थे। ऐसे में कांग्रेस की
परिवर्तन रथयात्रा में भाग लेते तो भी कैसे। अब कहने वालों का कोई मुंह नहीं बंद कर सकता। कहने वाले कह रहे हैं, जहां बातचीत चल रही थी, वहां बात नहीं बनी। ऐसे में अब साहब अपने समर्थकों सहित शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के हरियाणा दौरे में पहुंचेंगे। यानी लम्बे अरसे बाद ‘युवराज’ के’दर्शन’ हो सकेंगे।

रिश्तों की दुहाई
जब चुनाव नजदीक आते हैं तो सियासी दुश्मनों से भी दोस्ती हो जाती है। ऐसे में रिश्तों की दुहाई देनी भी स्वाभाविक है। अब जब सभी कांग्रेसी भाई एक बस में सवार हो चुके हैं तो पुराने गिले-शिकवे भी दूर हो गए हैं। बेशक, कहने को ही सही, लेकिन कम से कम लोगों को तो यह संदेश दे रहे हैं कि ‘अब हम एक हैं’। कांग्रेस की परिवर्तन बस यात्रा ने जैसे ही भिवानी संसदीय क्षेत्र में प्रवेश किया तो कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी भी सभी पुराने झगड़ों और विवाद को दूर करती नज़र आईं। ‘जेठजी’ का नाम भी उन्होंने बड़े अदब और सम्मान के साथ लिया। जी हां, हम रणबीर महेंद्रा की ही बात कर रहे हैं। वैसे सांघी वाले ताऊ यानी भूपेंद्र सिंह हड्डा ने महेंद्रा से सियासी रिश्ते निभाने के चक्कर में कई अपनों को खुद से  दूर कर लिया है। अब यह दूरी क्या गुल खिलाएगी यह तो समय ही बताएगा।

प्रधानजी से नाराजगी
फरीदाबाद वाले प्रधानजी का पूरा विरोध हो रहा है। रातों-रात पूरे शहर में पोस्टर लग गए। समस्त फरीदाबादवासियों के नाम पर अज्ञात लोगों द्वारा लगाए पोस्टरों में लिखा गया है ‘मोदी से बैर नहीं, कृष्णपाल तेरी खैर नहीं’। हरियाणा के लोकसभा चुनाव प्रभारी कलराज मिश्र ने चुनावी तैयारियों के लिए बैठक क्या बुलाई, सियासी हंगामा ही हो गया। बैठक में भी ऐसे ही नारे लगाए गए। वैसे प्रधानजी और ‘खट्टर काका’ के रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन शहर के दूसरे नेताओं की नाराज़गी भी कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि प्रधानजी और उनके ‘मामाजी’ किस तरह से इन हालात का मुकाबला करते हैं।

बिल्लू भाई की कुर्सी
इनेलो वाले ‘बिल्लू भाई’ के हाथों से नेता प्रतिपक्ष का पद जाता रहा। कुर्सी को रोकने की तो तमाम कोशिशें हुईं, लेकिन बात नहीं बनी। सबसे अधिक डर तो ‘अपनों’ से था, लेकिन अपनों के बजाय करीबियों ने ही ‘धोखा’ दे दिया। 4 विधायकों द्वारा जजपा का समर्थन किया जा रहा है, लेकिन बिल्लू भाई के 2 करीबी साथियों रणबीर गंगवा और केहर रावत के इस्तीफा देने से उनकी कुर्सी जाती रही। वैसे स्पीकर के फैसले को चुनौती देने की बात कही जा रही है, लेकिन राहत की उम्मीद नहीं है। विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका है, जब विपक्ष के नेता को पद से हटाया गया है। वैसे भी सदन में स्पीकर के फैसले के साथ ही रूल बनते हैं। नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर किसी तरह के नियम भी नहीं हैं। सो, अब बिल्लू भाई को हाईकोर्ट से भी राहत मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

पंडितजी की ग्रहचाल
करनाल वाले पंडितजी यानी अरविंद शर्मा की ग्रहचाल बिगड़ी हुई है। आनन-फानन में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल तो हो गए, लेकिन अब टिकट के लाले पड़े हैं। साहब करनाल से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं और करनाल में काका पंजाबी नेता पर दांव लगाना चाहते हैं। बड़ी मुश्किल से तो एक सीट पर पंजाबियों का अधिकार हुआ है। इसे मुख्यमंत्री इतनी आसानी से छोड़ें भी तो कैसे? अब पंडितजी की कुंडली में क्या है, यह तो वे खुद भी देख-समझ सकते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि करनाल से टिकट नहीं मिला तो पंडितजी बड़ा ‘गेम’ भी कर सकते हैं।
-दिनेश भारद्वाज


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