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उम्र का बंधन

Posted On March - 29 - 2019

हरीश लखेड़ा

लोकसभा के महासमर के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। 2014 के महासमर के कई अजेय योद्धा 2019 के चुनावी रण में नहीं दिखेंगे। इस बार ‘चुनावी महाभारत’ में भाजपा के भीष्म पितामह माने जाने वाले वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर डा. मुरली मनोहर जोशी समेत कई बुजुर्ग नेताओं को घर में ‘आराम’ करने के लिए छोड़ दिया गया है। हालांकि, अपनी पारिवारिक पार्टी जनतादल (सेक्युलर) के प्रमुख व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा उम्रदराज होने के बावजूद 85 साल की उम्र में भी लोकसभा में पहुंचने के अपने मोह से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। वे अपने पोते के साथ चुनाव मैदान में होंगे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान तो किया है, लेकिन इसलिए कि उनकी बेटी और पोता चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस के पी चिदंबर ने भी अपने बेटे का टिकट पक्का करने के बाद चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। इस बार अब तक कोई ऐसा नेता सामने नहीं आया है, जो महाबली बलराम की तरह ‘चुनावी महाभारत’ में शामिल होने के बजाय तीर्थ यात्रा पर चला जाए। कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसने उम्रदराज होने के बावजूद राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया हो।
लोकसभा का यह चुनाव राज्यों में भले ही बहुकोणीय दिख रहा हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह चुनावी जंग मोटे तौर पर भाजपा और कांग्रेस में दिख रही है। भाजपा ने इस बार 75 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को टिकट नहीं दिया है, जबकि दूसरे खेमे में अब भी बड़ी संख्या में ऐसे नेता चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं, जिनकी उम्र भी बहुत ज्यादा हो गई है
और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। इसके बावजूद वे अपने दलों में नये लोगों के लिए जगह छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर आंकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 2 करोड़ युवा 18 वर्ष की उम्र को पार कर रहे हैं, इसलिए इन युवा मतदताओं पर सभी दलों की नजर रहती है। खास बात यह है कि एक ओर इस चुनाव में पहली बार 10 करोड़ से ज्यादा युवा मतदाता अपने मत का उपयोग करेंगे, जबकि दूसरी ओर 85 साल के एचडी देवगौड़ा, 79 वर्ष के मुलायम सिंह यादव समेत कई वयोवृद्ध नेता अपने कुनबे के साथ इन युवा मतदाताओं से वोट मांगते दिखेंगे। भाजपा ने तो अपने 75 साल की उम्र पार कर चुके वयोवृद्ध नेताओं को चुनाव मैदान में उतराने की बजाय घर में आराम करने के लिए छोड़ दिया है। यहां तक कि आडवाणी और जोशी को स्टार प्रचारक भी नहीं बनाया है। हालांकि, भाजपा के ये बुजुर्ग नेता इस फैसले से खुश नहीं हैं। जीवन की अंतिम बेला में भी इनमें चुनावी राजनीति के प्रति मोह देखा जा रहा है। भाजपा के इस फैसले की तर्ज पर अब देर-सबेर दूसरे दलों को भी अपने उम्रदराज नेताओं को लेकर फैसला करना ही होगा।
भाजपा ने 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं आडवाणी और जोशी के अलावा उत्तराखंड के 2 मुख्यमंत्रियों भुवन चंद्र खंडूरी व भगत सिंह कोश्यारी, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री करिया मुंडा के टिकट काट दिए हैं। हालांकि, खंडूरी की बेटी विधायक हैं। लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन को भी टिकट मिलने की संभावना कम है। 75 साल की उम्र पार करने के बाद मोदी मंत्रिमंडल से बाहर हुए कलराज मिश्र ने टिकट मिलने की कोई संभावना नहीं देखकर चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया। सांसद हुकुम देव नारायण का टिकट तो काटा गया, लेकिन बदले में उनके बेटे को टिकट दे दिया गया। दार्जिलिंग से सासंद एसएस अाहलूवालिया को भी टिकट नहीं मिला है। फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ने का आग्रह किया है, लेकिन भाजपा हाईकमान ने उनके आग्रह को अभी स्वीकार नहीं किया है।
बहरहाल, इस चुनावी जंग में आडवाणी, जोशी, बीसी खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी, पी चिदंबरम, लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान, करिया मुंडा समेत कई बुजुर्ग नेता नहीं दिखेंगे। लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान लोकसभा की बजाय अब राज्यसभा जाएंगे। राष्ट्रीय जनतादल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अदालत से सजा पाने के कारण अब चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। असम से राज्यसभा सदस्य मनमोहन सिंह का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। इसलिए उन्हें अमृतसर से चुनाव लड़ाने की चर्चा भी हुई, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इन अटकलों को यह
कह कर विराम दे दिया कि डा. सिंह चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। इसी तरह, 72 वर्षीय पी चिदंबरम ने अपनी परंपरागत सीट पर अपने बेटे को कांग्रेस प्रत्याशी बनाने के बाद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। हालांकि, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष 72 वर्षीय सोनिया गांधी फिर से रायबरेली लोकसभा सीट और 74 वर्षीय श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं।

देश के 2 प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष 55 साल की उम्र से कम के हैं, लेकिन इन दलों में कई उम्रदराज नेता आज भी युवाओं के लिए पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कई साल पहले कांग्रेस के एक नेता ने कहा था कि कांग्रेस एक ऐसी ट्रेन है, जिसके भरे डिब्बे में पहले तो नये यात्रियों को घुसने नहीं दिया जाता है, यदि वह घुस भी गया तो डिब्बे में घुसने के बाद वह भी नये लोगों के लिए जगह बनाने की बजाय उन्हें रोकने की कोशिश करता है।
वामपंथी आंदोलन इसलिए लगभग खत्म हो गया कि उसके उम्र दराज नेताओं ने कुर्सी नहीं छोड़ी। माकपा व भाकपा में महासचिवों के चुनाव की परंपरा अब शुरू हुई, जबकि कभी एक बार महासचिव बनने के बाद वे नेता जीवन के अंतिम दौर तक उस पद पर डटे रहते थे। इससे महत्वाकांक्षी लोग दूसरे दलों में चले गए। माकपा के महासचिव रहे हरकिशन सिंह सुरजीत व भाकपा के महासचिव रहे एबी वर्धन का उदाहरण सामने है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर ज्योति बसु तब तक रहे जब तक किउनके शरीर ने साथ देना नहीं छोड़ा। माना जाता है कि माकपा में अब भी महासचिव पद सीताराम येचुरी और प्रकाश करात के बीच झूलता रहेगा।
बहरहाल, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम में तो ज्यादातर युवा नेता ज्यादा हैं। पार्टी ने संगठन में भी पद पाने के लिए 75 साल की सीमा तय कर दी है। जबकि कांग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेता तो हैं, लेकिन साथ ही 89 वर्षीय मोतीलाल वोरा, 69 साल के गुलाम नबी आजाद, 68 साल के अहमद पटेल, 77 साल के एके एंटनी, 72 साल के चिदंबरम व 69 साल के हरीश रावत जैसे उम्रदराज नेता भी हैं। इससे नये नेताओं को मौका नहीं मिल पाता है। इसलिए भाजपा का 75 साल उम्र पार कर चुके नेताओं को टिकट न देने का फैसला अब देर-सबेर सभी दलों में रंग अवश्य दिखाएगा।

85 साल के देवगौड़ा पोते के साथ मैदान में
चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे उम्रदराज नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री 85 वर्षीय एचडी देवगौड़ा शामिल हैं। उन्होंने अपनी हासन सीट अपने पोते प्रज्ज्वल रेवन्ना के लिए छोड़ी है, वे तुमकुर से चुनाव लड़ेंगे। सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव 79 साल की उम्र में अब मैनपुरी सीट से मैदान में हैं। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री 74 वर्षीय जीतन राम मांझी बिहार के गया से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने डा. जोशी का टिकट काटकर जिन सत्यदेव पचौरी को कानपुर से प्रत्याशी बनाया है वे भी 71 साल के हैं। उम्र दराज समाजवादी नेता शरद यादव भी अब चुनाव लड़ने जा रहे हैं।


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