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‘माननीयों’ का मर्ज

Posted On February - 22 - 2019

हरीश लखेड़ा

हरियाणा को सेहतमंद और तंदरुस्ती वाले प्रदेशों में गिना जाता है, लेकिन उसी हरियाणा के लोग ‘माननीय’ विधायक बनने के बाद ‘बीमार’ हो रहे हैं। विधायक ही नहीं, उनके जीवनसाथी भी बीमार रहे हैं। ‘बीमारी’ भी ऐसी कि लगभग हर माह उन्हें हजारों रुपये की दवा खानी पड़ रही है। पूर्व विधायक बनने पर उनकी ‘बीमारी’ और बढ़ जाती है। कम से कम हरियाणा विधानसभा सचिवालय का रिकार्ड तो यही कह रहा है। रिकार्ड के अनुसार इन ‘बीमार’ विधायकों और पूर्व विधायकों के इलाज पर हरियाणा सरकार के खजाने से हर साल मोटी रकम खर्च हो रही है। आरटीआई से मिली जानकारी में यह खुलासा हुआ है।
इस संबंध में आरटीआई में मार्च, 2005 से 31 जुलाई, 2017 का ब्योरा दिया गया है। आरटीआई में मिले विधानसभा के दस्तावेजों के अनुसार, हरियाणा के कई ‘माननीय’ विधायकों और पूर्व विधायकों में से बड़ी संख्या में तो ऐसे हैं, जो ‘असाध्य’ बीमारियों से ग्रसित हैं। अपनी बीमारी के इलाज के लिए विधायकों व पूर्व विधायकों ने पिछले एक दशक के दौरान विधानसभा सचिवालय को जो कागजाद जमा कराएं हैं, उनसे भी उनकी बीमारियों का पता चलता है। आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, कई पूर्व विधायक तो ऐसे हैं, जिन्हें उनके मेडिकल बिलों के रिम्बर्समेंट के तहत सालाना 2 लाख रुपये से ज्यादा की राशि का भुगतान किया गया। बड़ी संख्या में विधायक ऐसे भी हैं, जिन्होंने औसतन हर माह 20 हजार से ज्यादा की राशि मेडिकल बिलों से ली।

एक साल में 2-2 लाख का मेडिकल बिल
आरटीआई के अनुसार, मार्च 2005 से 31 जुलाई, 2017 के दौरान 53 ऐसे पूर्व विधायक हैं, जिन्होंने मेडिकल बिलों के आधार पर औसतन हर माह में 20 हजार रुपये से ज्यादा की राशि का दावा किया। इस अवधि के दौरान कई विधायक ऐसे भी रहे जिन्होंने एक साल के दौरान 2-2 लाख रुपये के मेडिकल बिल दिए और राशि ली। खास बात यह है कि ज्यादातर पूर्व विधायकों ने किसी अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने की बजाय डिस्पेंसरी या अस्पतालों में डाक्टरों की पर्ची के आधार पर बाजार से ली गई दवाई के बिल जमा कराए।
इन विधायकों में 2 शशिपाल मेहता और पीके चौधरी ने एक साल में 2-2 लाख से ज्यादा के रिम्बर्समेंट का दावा किया। पीके चौधरी ने 2016-17 में 2 लाख 86 हजार 4 रुपये के बिल दिए। शशिपाल मेहता ने 2015-16 में 2 लाख 53 हजार 939 रुपये और 2016-17 में 2 लाख 80 हजार 824 रुपये का दावा किया। कई विधायक ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस अवधि के दौरान 10-10 लाख से ज्यादा के बिलों की राशि वसूल की। इनमें शशिपाल मेहता ने 13 लाख 19 हजार 719 रुपये, बिजेंंद्र सिंह कादियान ने 10 लाख 36 जार 889 रुपये और सुरेंद्र कुमार मदान ने 10 लाख 7 हजार 554 रुपये लिए। इनके अलावा, कैलाश चंद्र शर्मा के 7 लाख 41 हजार 526 रुपये, जगपाल चौधरी 3 लाख 89 हजार 758 रुपये, ओपी जैन एक लाख 51 हजार 106 रुपये, वेदपाल एक लाख 30 हजार 909, बृजमोहन सिंगला एक लाख 27 हजार 856 रुपये, मांगेराम 4 लाख 55 हजार 26 रुपये, सतबीर कादियान 6 लाख 49 हजार 376 रुपये, लाल सिंह एक लाख 56 हजार 648 रुपये, राम कुमार कटपाल 3 लाख 40 हजार 274 रुपये, कुंवर रामपाल सिंह 6 लाख 37 हजार 929 रुपये, सुरेंद्र सिंह औजला 3 लाख 83 हजार 575 रुपये, रघु यादव 2 लाख 47 हजार 349 रुपये, एक अन्य कुंवर रामपाल सिंह 4 लाख 46 हजार 414 रुपये, धर्मपाल मलिक 7 लाख 21 हजार 656 रुपये, गिरिराज किशोर एक लाख 81 हजार 22 रुपये, नफे सिंह 3 लाख 80 हजार 365 रुपये व एक अन्य रघु यादव 2 लाख 72 हजार 560 रुपये, एसएस भारद्वाज 2 लाख 4 हजार 170 रुपये, एमसी गंभीर 2 लाख 41 हजार 547 रुपये, मनीराम एक लाख 4 हजार 48 रुपये, एक अन्य कुंवर रामपाल सिंह 4 लाख 43 हजार 665 रुपये, रणबीर सिंह महेंद्रा 8 लाख 69 हजार 110 रुपये, एसी चौधरी एक लाख 44 हजार 862 रुपये, माखन सिंह एक लाख 27 हजार 752 रुपये, मुनीलाल रंगा 3 लाख 20 हजार 874 रुपये, सोमवीर सिंह एक लाख 43 हजार 875 रुपये, दरियाव सिंह राजोरा 2 लाख 9 हजार 123 रुपये, गोपीचंद गहलोत 2 लाख 18 हजार 533 रुपये, एक अन्य पीके चौधरी 4 लाख 33 हजार 67 रुपये, जसवीर मल्लौर 2 लाख 11 हजार 872 रुपये, भागीराम एक लाख 34 हजार 787 रुपये, जिले राम शर्मा एक लाख 31 हजार 354 रुपये और गणेशी लाल के एक लाख 53 हजार 525 रुपये शामिल हैं।
धर्मपाल ओबरा ने 68 हजार 416 रुपये, प्रो. छत्तर पाल ने 98 हजार 619 रुपये, सुभाष गोयल ने 94 हजार 765 रुपये, महासिंह ने 26 हजार 21 रुपये, बृज आनंद ने 47 हजार 778 रुपये, सुभाष चंद गोयल ने 50 हजार 615 रुपये, सुहाब सिंह सैनी ने 67 हजार 416 रुपये, श्याम चंद ने 41 हजार 985 रुपये, रमेश गुप्ता ने 21 हजार 512 रुपये, कंवल सिंह ने 20 हजार 749 रुपये, वेद सिंह मलिक ने 24 हजार 14 रुपये, डा. महासिंह ने 54 हजार 391 रुपये, निर्मल सिंह ने 39 हजार 942 रुपये और भारत सिंह कल्यात ने 36 हजार 473 रुपए के बिलों का दावा किया। विधायकों व पूर्व विधायकों के मेडिकल क्लेम के बारे में विधानसभा सचिवालय ने आरटीआई में बताया कि विधानसभा के सितंबर 2009 से अक्तूबर 2015 के दौरान कुल 302 विधायक और पूर्व विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने इस अवधि में 20-20 हजार रुपये से ज्यादा की राशि के मेडिकल क्लेम लिए। विधायकों और पूर्व विधायकों ने अपनी पत्नियों के नाम पर भी मेडिकल क्लेम लिए। इससे कम राशि का क्लेम करने वालों के नाम इस सूची में शामिल नहीं हैं। खास बात यह है कि कई उदाहरण ऐसे हैं जब ‘माननीयों’ ने 15-15 लाख रुपये की राशि मेडिकल क्लेम से ली है। कई माननीय तो लंबे समय से मोटी राशि ले रहे हैं। सचिवालय ने यह भी माना है कि इतनी मोटी राशि के क्लेम करने वाले ‘माननीयों’ और उनकी पत्नियों या पतियों के स्वास्थ्य की जांच विधानसभा द्वारा मेडिकल बोर्ड से नहीं कराई गई।

एक से 10 लाख के बीच क्लेम करने वाले
दो विभिन्न आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, सितंबर 2009 से अक्तूबर 2017 के दौरान माननीयों के इंडोर या आउट डोर बिल एक लाख से 10 लाख रुपये तक रहे हैं। इनमें पूर्व विधायक आजाद मोहम्मद, एसी चौधरी, आत्मा सिंह गिल, आनंद कुमार शर्मा, अशोक कश्यप, डा. ब्रिज मोहन गुप्ता, बलवंत सिंह मैना, भागीराम, बिजेंद्र सिंह कादियान, बूटा सिंह, भगवान सहाय रावत, भाग सिंह, भारत सिंह दहिया, भारत सिंह बेनीवाल, भारत भूषण बत्रा, प्रो. छतर सिंह, छत्तर सिंह चौहान, धाजा सिंह, दयानंद शर्मा, धर्मवीर गाबा, देबी सिंह, तेवतिया, दरियाव सिंह राजोरा, दिल्लू सिंह, धर्मपाल सिंह मलिक, धर्मपाल ओबरा, फकीर चंद, गौरी शंकर, गणेशी लाल, गिरिराज किशोर, गोपीचंद गहलोत, हर्षपाल सिंह, हरि सिंह सैनी, हसन मोहम्मद, ईश्वर सिंह, इंदर सिंह नैन, जसवंत सिंह नारनौड, जसमा देवी, जगदीश नेहरा, जसवीर मल्लौर, कैलाश चंद्र शर्मा, कमला वर्मा, कंवल सिंह, कुलवीर सिंह मलिक, किताब सिंह, मनीराम, मखन सिंह, डा. महासिंह, मुनीलाल, नारायण सिंह, निर्मल सिंह, निशान सिंह, नफे सिंह, नरेश कुमार शर्मा, ओमप्रकाश जैन, फूल चंद रोहत, पीके चौधरी, पदम सिंह, राम किशन, रघु यादव, राम सिंह, राम कुमार केतवाल, राम रतन, रामजी लाल डागर, रामबीर सिंह मंडोला, रामबीर सिंह, राकेश कुमार गौतम, रमेश गुप्ता, रेखा राणा, रामपाल चिराना, राम किशन फौजी, रघुवीर सिंह तेवतिया, प्रदीप चौधरी, शारदा रानी, सुरेंद्र सिंह औजला, श्याम चंद, सुरेंद्र कुमार मदान, सोमवीर सिंह, सीताराम सिंगला, सतवीर सिंह कादियान, सत नारायण लाठर, शशिपाल मेहता, एसएस सुरजेवाला, सीतराम, डा. शिव शंकर भारद्वाज, सुशील इंदोरा, उदे सिंह दलाल, वेद सिंह मलिक, वेदपाल, वासुदेव शर्मा, जिले सिंह शर्मा, मोहन लाल पीपल, मनफूल सिंह, राम विलास शर्मा, मांगेराम रथी, आरएस कादियान, कुलवीर सिंह, परमिंदर धुल, जलेब खान, संपत सिंह, कुलदीप शर्मा, राव धर्मपाल, सरोज मोर, जगबीर सिंह मलिक, विनोद भयाना, रामेश्वर दयाल, रामकिशन हुड्डा, सरीफ देवी, हरिचंद मिड्ढा, अभय चौटाला, भारत भूषण बत्रा, अशोक कश्यप, संतोष चौहान श्रवण, रविंद्र माछरौली, उमेश अग्रवाल, विपुल गुप्ता शामिल हैं।

असाध्य बीमारियों से ग्रस्त हैं कई ‘माननीय’
आरटीआई के अनुसार कई विधायकों और पूर्व विधायकों में से बड़ी संख्या में ऐसे हैं, जो असाध्य बीमारियों से ग्रस्त हैं। असाध्य बीमारियां लंबे समय तक बनी रहती हैं और इनका इलाज काफी मुश्किल होता है। हरियाणा विधानसभा सचिवालय के दस्तावेजों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे ‘माननीय’ हैं, जो दिल की बीमारी, डायबिटीज, कैंसर, अस्थमा, लीवर, हाइपर टेंशन, प्रोस्टेटिक कैंसर, हेमोफोलिया, पेट की बीमारी, एनिमिया, अर्थराइटिस समेत कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। आरटीआई के अनुसार, कई माननीय तो ऐसे भी हैं, जिन्हें डाक्टर ने एक दिन में 16-17 गोलियां खाने के लिए लिखा है।

10-10 लाख के बिल
कई विधायक ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस अवधि के दौरान 10-10 लाख से ज्यादा के बिलों की राशि ली। इनमें शशिपाल मेहता ने 13 लाख 19 हजार 719 रुपये, बिजेंंद्र सिंह कादियान ने 10 लाख 36 जार 889 रुपये और सुरेंद्र कुमार मदान ने 10 लाख 7 हजार 554 रुपये लिए। इनके अलावा, कैलाश चंद्र शर्मा ने 7 लाख 41 हजार 526 रुपये, जगपाल चौधरी ने 3 लाख 89 हजार 758 रुपये के मेडिकल बिलों का क्लेम लिया।

महेंद्रा ने किया 217 बार क्लेम
मेडिकल क्लेम में दवाइयों के बिलों के अलावा अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने के बिल भी शामिल हैं। इस अवधि में भी विधानसभा से मेडिकल क्लेम के तौर पर बार-बार व मोटी रकम पाने वालों ‘माननीयों’ की फेहरिस्त भी लंबी है। सबसे ज्यादा बार मेडिकल क्लेम रणबीर सिंह महेंद्रा ने किया। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, महेंद्रा ने 6 अप्रैल 2005 से 22 फरवरी 2018 के दौरान खुद और पत्नी के इलाज को लेकर 217 बार मेडिकल क्लेम किया। इस दौरान, उन्हें लगभग 8 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।

एक ही राशि के कई बार दिए बिल और मिले भीे
खास बात यह है कि बड़ी संख्या में ऐसे भी मेडिकल क्लेम हैं, जब एक समान राशि का कई बार क्लेम किया गया। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, रणबीर सिंह महेंद्रा ने 11 जून 2012 और 15 जून 2012 को एक समान राशि 39,270 रुपये का क्लेम किया। शशिपाल मेहता ने 10 जून 2015 और 14 जुलाई 2015 को 25,296 रुपये की समान राशि का क्लेम किया। कैलाश चंद्र शर्मा ने भी 9 जुलाई 2012 और 9 अगस्त 2012 को 69,506 रुपये तथा 24 अगस्त 2015 और 25 अगस्त 2015 को एक समान राशि 42 हजार 640 रुपये के बिलों का क्लेम किया। एसपी जायसवाल ने 3 मई 2006 और 14 नवंबर 2007 को एक समान राशि 70,132 रुपये का क्लेम किया। प्रो. छत्तर पाल, मांगे राम, सतबीर सिंह कदियान, सुरेंद्र कुमार मदान, बिजेंद्र सिंह कादियान, सुरेंद्र सिंह औजुला, धर्मपाल मलिक, एसएस भारद्वाज, एम सी गंभीर, मुनीलाल रंगा आदि ने भी दो-दो बार एक ही समान राशि का क्लेम किया।

सीएम खट्टर ने नहीं किया कोई क्लेम, हुड्डा का सिर्फ 3803 रुपये बिल
एक अन्य आरटीआई में 2005 से नवंबर 2017 तक के दौरान मेडिकल क्लेम की जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नवंबर 2017 तक कोई क्लेम नहीं किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मात्र 3,803 रुपये और पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला ने भी 79 हजार 766 रुपये का क्लेम किया। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने 2.5 लाख रुपये से ज्यादा का क्लेम किया।

क्या हैं मेडिकल क्लेम के नियम
आरटीआई के अनुसार, सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक या सिविल सर्जन के हस्ताक्षर वाले मेडिकल क्लेम बिल मामनीय देते हैं। इसमें मेडिकल ऑफिसर एक सर्टिफिकेट देते हैं कि उनकी जांच अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने की है। उसी के आधार पर उन्हें इलाज और दवाइयाें का क्लेम मिलता है।

न जांच, न कार्रवाई
माननीयों की ओर से दिए गए बिल की कोई मेडिकल बोर्ड जांच नहीं करता है और अगर कोई गलत बिल दे भी देता है तो माननीयों पर कार्रवाई का कोई कानून नहीं है। खरीदने का अधिकार मिल जाता है।

हर महीने मिलते हैं 1.75 लाख के वेतन-भत्ते
हरियाणा के विधायकों को वेतन और विभिन्न तरह के भत्तों समेत हर महीने लगभग 1.75 लाख रुपये मिलते हैं। इनके अलावा, कई और सुविधाएं भी मिलती हैं। पूर्व विधायकों को प्रति माह लगभग 52 हजार रुपये पेंशन मिलती है। इसमें कई अलग प्रावधान होने से कई विधायकों की पेंशन राशि 2 लाख रुपये प्रति माह तक है।

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विधायक व पूर्व विधायक प्रदेश में ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस अवधि के दौरान अपने लिए और अपने जीवन साथी के लिए एक बार भी मेडिकल क्लेम नहीं लिया।

 


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