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‘टेंशन’ में भाई साहब

Posted On February - 22 - 2019

इनेलो वाले ‘भाई साहब’ आजकल ‘टेंशन’ में नजर आ रहे हैं। जिन्हें भाई साहब ने बच्चा समझा था, वे बड़ा ‘गच्चा’ दे गए। विधायकों की संख्या भी घट रही है। ऊपर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हिसार दौरे ने बेचैनी और बढ़ा दी है। बुधवार को बजट सत्र शुरू हुआ तो भाई साहब बार-बार विधायकों पर नजर डालते दिखे। सरकार के एक मंत्री ने तो इस पर चुटकी लेते हुए यहां तक कह दिया, लगता है भाई साहब गिनती करने में जुटे हैं। वैसे अगर गिनती बिगड़ गई तो साहब की ‘कुर्सी’ भी जा सकती है। रही-सही कसर, अपने दाढ़ी वाले ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में पूरी कर दी। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि इनेलो अब टूट गई है।

10 साल वाली मंत्री
भाजपाई भाई लोगों ने पूर्व शिक्षा मंत्री व झज्जर से विधायक गीता भुक्कल को खुश होने का बड़ा मौका दे दिया है। बादली वाले ‘छोटे स्वामीनाथन’ यानी ओपी धनखड़ अकसर गीता के प्रति इस बात को लेकर नाराज़गी जताते हैं कि वे हुड्डा सरकार में लगातार 10 साल मंत्री रहीं, लेकिन झज्जर के लिए कुछ नहीं करवा सकीं। संसदीय कार्यमंत्री रामबिलास शर्मा भी उन्हें 10 वर्षों की मंत्री बताते हैं। सच्चाई यह है कि गीता भुक्कल हुड्डा सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बनी थीं, इससे पहले वे विधायक ही थीं। कहने वाले कह रहे हैं कि इससे गीता भुक्कल को नुकसान होने की बजाय फायदा ही हो रहा है। कम से कम उन्हें दो बार की मंत्री तो कहा जा रहा है।

आजाद का दर्द
हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद को जींद उपचुनाव में हुई कांग्रेस की करारी शिकस्त का बड़ा मलाल है। वे तो पार्टी नेतृत्व के इस फैसले से भी सहमत नहीं हैं कि जींद उपचुनाव में रणदीप सुरजेवाला जैसे बड़े चेहरे को क्यों उतारा गया। हरियाणा के विधायकों, पूर्व सांसदों-विधायकों के अलावा 2014 में उम्मीदवार रहे नेताओं को बुलाकर फीडबैक ले रहे आजाद जींद उपचुनाव पर भी चर्चा कर रहे हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि जींद की हार के बाद पार्टी वर्करों का मनोबल टूटने का अहसास उन्हें है। वे तो यहां तक कहते हैं कि अगर उस समय वे प्रदेश प्रभारी होते तो किसी भी सूरत में सुरजेवाला को उपचुनाव नहीं लड़ने देते। यूपी की पूर्व सीएम मायावती का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि वे कभी भी उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारती। कारण साफ है कि जीत का इतना फायदा नहीं होता, जितना हार से नुकसान होता है। अब आजाद साहब को कौन समझाए कि इस उपचुनाव पर तो बड़ा दांव खेला गया था। अब उलटा पड़ गया तो कोई क्या करे।

पॉलिटिकल स्लेजिंग
क्रिकेट में राजनीति होते तो खूब देखी है, लेकिन भाजपा सरकार के आखिरी बजट सत्र में राजनीति में ही क्रिकेट आ गई। सत्र के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष और हेवीवेट बिल्लू भाई ‘पॉलिटिकल स्लेजिंग’ के शिकार हो गए। अकसर क्रिकेट में देखने में आया है कि विरोधी टीम के मजबूत खिलाड़ी का ध्यान भंग कराकर उसकी विकेट चटकाने की चाल चली जाती है। ऐसा ही कुछ विधानसभा में हुआ तो सबके मुंह पर पॉलिटिकल स्लेजिंग आ गई। दरअसल, राज्यपाल के अभिभाषण पर बात रखने के लिए तैयार बिल्लू भाई के ‘अंदरुनी दर्द’ पर पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने ऐसी छींटाकसी का वार किया, जिसके बाद अपनी बात रखते-रखते बिल्लू भाई मंत्रियों की टीका-टिप्पणी में उलझकर ट्रैक से उतर गए। डिप्टी स्पीकर से एक घंटा बोलने के लिए समय मांग रहे नेता प्रतिपक्ष आधा घंटा ऐसे अटके कि महेंद्रगढ़ वाले पंडितजी ने उनकी तैयारी पूरी नहीं कर पाने के दर्द को समझा और अगले दिन के लिए पर्याप्त समय दिला दिया।

भाजपा राजनीतिक गंगा
महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी का अलग ही अंदाज है। संसदीय कार्यमंत्री होने के नाते जब वे सदन में बात रखते हैं तो सभी को हंसाने के बाद ही बैठते हैं। सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के नेता अभय चौटाला व इनेलो विधायकों ने कुछ ऊंचे स्वर में बात क्या की, पंडितजी ने उन्हें अच्छा-खासा पाठ पढ़ा दिया। अभय को कहा कि आपके अब्बू (ओपी चौटाला) तो गठबंधन की बातें करते हैं और आप ऐसे कर रहे हैं। भाजपा तो देश की राजनीतिक गंगा है, इसमें सभी का सम्मान है। ठेठ बागड़ी भाषा में कहा कि बेरा नी कद के होज्जा। क्या पता कब किसे डुबकी लगानी पड़ जा।’ इस पर इनेलो वाले भाई लोग तो चुपचाप बैठ गए और अभय मंद-मंद मुस्कुराते रहे।

भूलने नहीं देंगे
जींद उपचुनाव से पहले 5 निगमों के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा को जिस तरह से मुद्दा बनाया था, उसी तरह से लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में भी इसे पूरी हवा दी जाएगी। इसकी शुरुआत भाजपा कर चुकी है। बजट सत्र के दौरान भी भाजपाई आगजनी, लूटपाट और हिंसा के मुद्दे पर कांग्रेसियों को खुलकर घेर रहे हैं। बृहस्पतिवार को एक ओर जहां जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता यशपाल मलिक झज्जर में बैठक करके आंदोलन का ऐलान कर रहे थे, वहीं विधानसभा में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ व पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा इस मामले में कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहे थे। भाजपाइयों के अंदाज से ऐसा लग रहा था, मानो कह रहे हों कि लोग तो भूल भी जाएं, लेकिन हम भूलने नहीं देंगे।

शाह का दौरा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर हरियाणा दौरे पर आ रहे हैं। 25 फरवरी को वे हिसार में बूथ स्तर के नेताओं व वर्करों की बैठक लेंगे। मिशन-2019 के लिए आ रहे शाह ने इस बैठक में उन तीन लोकसभा क्षेत्रों को ही चुना है, जहां 2014 में भाजपा ने शिकस्त खाई थी। शाह हिसार के अलावा रोहतक और सिरसा संसदीय क्षेत्र के बूथ स्तर के नेताओं से मिलेंगे और उन्हें जीत का मंत्र देंगे। बताते हैं कि वे इन तीनों सीटों पर जीत हासिल करने के लिए इस बार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले। वैसे ये तीनों ही ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा को सबसे अधिक जोर लगाना पड़ता है। सो, अब देखते हैं पार्टी के बड़े साहब क्या गुर पार्टी नेताओं को सिखाते हैं।

-दिनेश भारद्वाज


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