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फाइव स्टार इलेक्शन

Posted On January - 18 - 2019

आमतौर पर नेताओं पर ये आरोप लगते रहते हैं कि वे ग्राउंड की कम और फाइव स्टार कल्चर की राजनीति अधिक करते हैं। कभी-कभार ऐसा करना मजबूरी हो जाती है। अब जींद उपचुनाव को ही लें। जींद के अधिकांश होटल बुक हैं। अधिकांश राजनीतिक दलों के ‘वार रूम’ होटलों से ही चल रहे हैं। आलम यह है कि सभी दलों के पास एक-एक होटल है। वैसे भी होटल के मामले में जींद दूसरे शहरों से काफी पीछे है। यहां के सभी होटल हाउसफुल चल रहे हैं। होटलों से ही उपचुनाव की रणनीति तय हो रही है। दो दिन पहले, जब दो होटल मालिकों ने कमरे खाली करने को कहा, तो हालात बिगड़ गए। बताते हैं कि विवाह समारोह के लिए संबंधित डेट पर पहले से बुकिंग थी। कमरे खाली करने ही पड़े। बहरहाल, फिर से होटल से
चुनावी रणनीति शुरू हो गई है और 28 जनवरी तक ये होटल बुक रहने वाले हैं।

प्रचार बनाम परेशान
चुनावी प्रचार से जींद शहर के लोग काफी परेशान हो चुके हैं। दूसरे शहरों से अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने आए नेता अपनी गाडि़यां गलियों में खड़ी करके डोर-टू-डोर प्रचार पर जुट जाते हैं। प्रचार का काम सुबह से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में स्थानीय लोग जब अपनी गाडि़यां घर से बाहर निकालते हैं, तो उन्हें पार्किंग में परेशानी आती है। अब तो जींद पुलिस भी गाडि़याें की बढ़ी संख्या से तंग आ चुकी है। ऐसे में पुलिस ने मार्केट में गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी है।

दिग्विजय की चुटकी
जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) समर्थित उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चौटाला इन दिनों खूब चुटकी ले रहे हैं। संयोग देखिए, उन्हें चुनाव-चिह्न ही ऐसा मिला है कि दूसरे दलों के नेता अब चाय पीने से भी तौबा करने लगे हैं। उनका चुनाव-चिह्न कप-प्लेट है। हरियाणा में यह कल्चर आम है कि जब भी कोई घर आता है तो उसे चाय जरूर पूछी जाती है। इस पर चुटकी लेते हुए दिग्विजय ने कहा, कांग्रेस, भाजपा और इनेलो वाले तो अब चाय भी अवाॅयड करने लगे हैं। विपक्षी दलों के नेता कहने लगे हैं कि चाय देनी भी है तो गिलास में दे दो, कप-प्लेट में नहीं।

साइकिल से बाइक पर
साइकिल वाले प्रधानजी यानी अशोक तंवर इन दिनों बाइक को काफी पसंद कर रहे हैं। जींद उपचुनाव में रणदीप सुरजेवाला के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे तंवर प्रचार के दौरान कई बार बाइक चलाते नजर आए। उनकी बाइक पर पीछे बैठकर सुरजेवाला ने भी खूब प्रचार किया। दोनों नेताओं की जोड़ी चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। फिर भी कार्यालय दोनों नेताओं के अलग-अलग ही चल रहे हैं। सुरजेवाला ने अपना चुनावी कार्यालय जींद के कुंदन सिनेमा में बनाया है। वहीं तंवर ने पीसीसी का कैम्प कार्यालय जींद के जिला कांग्रेस कार्यालय में ही बनाया है।

‘सुप्रीम’ आर्डर
अपनी पसंद का डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) लगाने के खट्टर सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इस तमन्ना को पूरा करने के लिए एक दिन का विशेष शीतकालीन सत्र भी बुलाया गया और विधानसभा में विधेयक भी पास किया गया, लेकिन ‘सुप्रीम’ पावर के सामने सभी मंसूबे ढेर हो गए। सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा तय किए जाने वाले पैनल के अनुसार ही होगी। ऐसे में अब अपने पुलिस प्रमुख बीएस संधू साहब का जाना भी तय हो गया है। एक्सटेंशन के बाद उनका कार्यकाल 31 जनवरी तक का है, लेकिन खबरें हैं कि ‘खट्टर काका’ केंद्र से एक्सटेंशन बढ़वाने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है तो संधू साहब के रहते ही आगामी लोकसभा चुनाव भी हो सकते हैं। मतलब साफ है कि डीजीपी बनने का सपना देख रहे खाकी वाले कई साहब लोगों के सपनों को भी झटका लगेगा।

कर्ण-अर्जुन की नसीहत
इनेलो वाले बिल्लू भाई साहब यानी अभय सिंह चौटाला के दोनों बेटे- कर्ण व अर्जुन चौटाला भी जींद उपचुनाव में गठबंधन प्रत्याशी उमेद रेढू के लिए प्रचार करने में जुटे हैं। भाई लोगों की आॅडियो भी वायरल हो रही हैं। ताजा आॅडियो में कर्ण ने पार्टी वर्करों को नसीहत दी है कि उन्हें जननायक जनता पार्टी और इसके प्रत्याशी के बारे में किसी तरह की बात नहीं करनी है। न तो अच्छा कहना है और न ही बुरा। उनका मानना है कि जेजेपी का विरोध करने से भी उनका (दिग्विजय) का प्रचार हो रहा है। ऐसे में कर्ण ने सलाह दी है कि पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता जेजेपी के बारे में किसी तरह की बात नहीं करेगा। वैसे नामांकनपत्र जमा करवाने के दौरान दोनों भाइयों का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक भाई पुलिस जवान से उलझता दिख रहा था और दूसरा बीच-बचाव कर रहा था।

कांग्रेस की एकजुटता
जींद उपचुनाव में कांग्रेसी भाई लोगों की एकजुटता देखते ही बन रही है। सुरजेवाला के लिए प्रचार में तंवर तो पहले ही दिन से जुटे हैं। भजन पुत्र कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी सहित दूसरे वरिष्ठ नेता भी प्रचार में कूद पड़े हैं। अपने सांघी वाले ताऊ यानी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी बृहस्पतिवार को जींद में मोर्चा संभाल लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव भी नामांकनपत्र वाले दिन पहुंचे थे। कहने वाले कह रहे हैं कि कांग्रेसी भाई लोग शुरू से ही एक होकर चले होते तो पांच नगर निगमों के नतीजे भी कुछ और ही होते। खैर, अब इस एकजुटता का कितना फायदा सुरजेवाला को होगा, इसका पता तो 31 जनवरी को चुनावी नतीजों के समय ही लगेगा। फिलहाल, साथ खड़े तो दिख ही रहे हैं।

अपनी ढपली, अपना राग
जींद उपचुनाव में सभी दलों ने नारे दिए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला का नारा है, ‘जींद बदलेंगे, जिंदगी बदलेंगे’। भाजपा ने अपने प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा के लिए नारा दिया है, ‘जींद की जिद, भाजपा ईब’। जेजेपी समर्थित उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चौटाला कह रहे हैं कि सरकार चंडीगढ़ से नहीं जींद से ही चलेगी। इनेलो-बसपा प्रत्याशी उमेद रेढू के समर्थन में इनेलो नेता बाहरी और अपनों का मुद्दा उठा रहे हैं। हालात कुछ- ‘अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग’ वाले हैं।

रिश्तेदारों से जीत की आस
जींद में जीतने के लिए हर पार्टीiफाइव स्टार इलेक्शन आमतौर पर नेताओं पर ये आरोप लगते रहते हैं कि वे ग्राउंड की कम और फाइव स्टार कल्चर की राजनीति अधिक करते हैं। कभी-कभार ऐसा करना मजबूरी हो जाती है। अब जींद उपचुनाव को ही लें। जींद के अधिकांश होटल बुक हैं। अधिकांश राजनीतिक दलों के ‘वार रूम’ होटलों से ही चल रहे हैं। आलम यह है कि सभी दलों के पास एक-एक होटल है। वैसे भी होटल के मामले में जींद दूसरे शहरों से काफी पीछे है। यहां के सभी होटल हाउसफुल चल रहे हैं। होटलों से ही उपचुनाव की रणनीति तय हो रही है। दो दिन पहले, जब दो होटल मालिकों ने कमरे खाली करने को कहा, तो हालात बिगड़ गए। बताते हैं कि विवाह समारोह के लिए संबंधित डेट पर पहले से बुकिंग थी। कमरे खाली करने ही पड़े। बहरहाल, फिर से होटल से  चुनावी रणनीति शुरू हो गई है और 28 जनवरी तक ये होटल बुक रहने वाले हैं।

प्रचार बनाम परेशान
चुनावी प्रचार से जींद शहर के लोग काफी परेशान हो चुके हैं। दूसरे शहरों से अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने आए नेता अपनी गाडि़यां गलियों में खड़ी करके डोर-टू-डोर प्रचार पर जुट जाते हैं। प्रचार का काम सुबह से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में स्थानीय लोग जब अपनी गाडि़यां घर से बाहर निकालते हैं, तो उन्हें पार्किंग में परेशानी आती है। अब तो जींद पुलिस भी गाडि़याें की बढ़ी संख्या से तंग आ चुकी है। ऐसे में पुलिस ने मार्केट में गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी है।

दिग्विजय की चुटकी
जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) समर्थित उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चौटाला इन दिनों खूब चुटकी ले रहे हैं। संयोग देखिए, उन्हें चुनाव-चिह्न ही ऐसा मिला है कि दूसरे दलों के नेता अब चाय पीने से भी तौबा करने लगे हैं। उनका चुनाव-चिह्न कप-प्लेट है। हरियाणा में यह कल्चर आम है कि जब भी कोई घर आता है तो उसे चाय जरूर पूछी जाती है। इस पर चुटकी लेते हुए दिग्विजय ने कहा, कांग्रेस, भाजपा और इनेलो वाले तो अब चाय भी अवाॅयड करने लगे हैं। विपक्षी दलों के नेता कहने लगे हैं कि चाय देनी भी है तो गिलास में दे दो, कप-प्लेट में नहीं।

साइकिल से बाइक पर
साइकिल वाले प्रधानजी यानी अशोक तंवर इन दिनों बाइक को काफी पसंद कर रहे हैं। जींद उपचुनाव में रणदीप सुरजेवाला के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे तंवर प्रचार के दौरान कई बार बाइक चलाते नजर आए। उनकी बाइक पर पीछे बैठकर सुरजेवाला ने भी खूब प्रचार किया। दोनों नेताओं की जोड़ी चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। फिर भी कार्यालय दोनों नेताओं के अलग-अलग ही चल रहे हैं। सुरजेवाला ने अपना चुनावी कार्यालय जींद के कुंदन सिनेमा में बनाया है। वहीं तंवर ने पीसीसी का कैम्प कार्यालय जींद के जिला कांग्रेस कार्यालय में ही बनाया है।

‘सुप्रीम’ आर्डर
अपनी पसंद का डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) लगाने के खट्टर सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इस तमन्ना को पूरा करने के लिए एक दिन का विशेष शीतकालीन सत्र भी बुलाया गया और विधानसभा में विधेयक भी पास किया गया, लेकिन ‘सुप्रीम’ पावर के सामने सभी मंसूबे ढेर हो गए। सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा तय किए जाने वाले पैनल के अनुसार ही होगी। ऐसे में अब अपने पुलिस प्रमुख बीएस संधू साहब का जाना भी तय हो गया है। एक्सटेंशन के बाद उनका कार्यकाल 31 जनवरी तक का है, लेकिन खबरें हैं कि ‘खट्टर काका’ केंद्र से एक्सटेंशन बढ़वाने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है तो संधू साहब के रहते ही आगामी लोकसभा चुनाव भी हो सकते हैं। मतलब साफ है कि डीजीपी बनने का सपना देख रहे खाकी वाले कई साहब लोगों के सपनों को भी झटका लगेगा।

कर्ण-अर्जुन की नसीहत
इनेलो वाले बिल्लू भाई साहब यानी अभय सिंह चौटाला के दोनों बेटे- कर्ण व अर्जुन चौटाला भी जींद उपचुनाव में गठबंधन प्रत्याशी उमेद रेढू के लिए प्रचार करने में जुटे हैं। भाई लोगों की आॅडियो भी वायरल हो रही हैं। ताजा आॅडियो में कर्ण ने पार्टी वर्करों को नसीहत दी है कि उन्हें जननायक जनता पार्टी और इसके प्रत्याशी के बारे में किसी तरह की बात नहीं करनी है। न तो अच्छा कहना है और न ही बुरा। उनका मानना है कि जेजेपी का विरोध करने से भी उनका (दिग्विजय) का प्रचार हो रहा है। ऐसे में कर्ण ने सलाह दी है कि पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता जेजेपी के बारे में किसी तरह की बात नहीं करेगा। वैसे नामांकनपत्र जमा करवाने के दौरान दोनों भाइयों का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक भाई पुलिस जवान से उलझता दिख रहा था और दूसरा बीच-बचाव कर रहा था।

कांग्रेस की एकजुटता
जींद उपचुनाव में कांग्रेसी भाई लोगों की एकजुटता देखते ही बन रही है। सुरजेवाला के लिए प्रचार में तंवर तो पहले ही दिन से जुटे हैं। भजन पुत्र कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी सहित दूसरे वरिष्ठ नेता भी प्रचार में कूद पड़े हैं। अपने सांघी वाले ताऊ यानी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी बृहस्पतिवार को जींद में मोर्चा संभाल लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव भी नामांकनपत्र वाले दिन पहुंचे थे। कहने वाले कह रहे हैं कि कांग्रेसी भाई लोग शुरू से ही एक होकर चले होते तो पांच नगर निगमों के नतीजे भी कुछ और ही होते। खैर, अब इस एकजुटता का कितना फायदा सुरजेवाला को होगा, इसका पता तो 31 जनवरी को चुनावी नतीजों के समय ही लगेगा। फिलहाल, साथ खड़े तो दिख ही रहे हैं।

अपनी ढपली, अपना राग
जींद उपचुनाव में सभी दलों ने नारे दिए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला का नारा है, ‘जींद बदलेंगे, जिंदगी बदलेंगे’। भाजपा ने अपने प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा के लिए नारा दिया है, ‘जींद की जिद, भाजपा ईब’। जेजेपी समर्थित उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चौटाला कह रहे हैं कि सरकार चंडीगढ़ से नहीं जींद से ही चलेगी। इनेलो-बसपा प्रत्याशी उमेद रेढू के समर्थन में इनेलो नेता बाहरी और अपनों का मुद्दा उठा रहे हैं। हालात कुछ- ‘अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग’ वाले हैं।

रिश्तेदारों से जीत की आस
जींद में जीतने के लिए हर पार्टी कुछ नया करने में जुटी है। पंचायत चुनाव की तरह अब रिश्तेदारों को बुलाकर जींद विधानसभा के 35 गांवों में ही नहीं, शहर में भी लाया जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई घर बचा हो, जहां वोटरों के रिश्तेदारों को लेकर नहीं पहुंचा जा रहा। चूंकि अभी फसल कटाई का समय भी नहीं है, ऐसे में अधिकांश लोगों को चुनावी फिजा देखने का समय मिल रहा है। -दिनेश भारद्वाज कुछ नया करने में जुटी है। पंचायत चुनाव की तरह अब रिश्तेदारों को बुलाकर जींद विधानसभा के 35 गांवों में ही नहीं, शहर में भी लाया जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई घर बचा हो, जहां वोटरों के रिश्तेदारों को लेकर नहीं पहुंचा जा रहा। चूंकि अभी फसल कटाई का समय भी नहीं है, ऐसे में अधिकांश लोगों को चुनावी फिजा देखने का समय मिल रहा है। -दिनेश भारद्वाज


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