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कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक

Posted On January - 11 - 2019

जींद उपचुनाव में कांग्रेस ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। राहुल गांधी ने अपनी टीम के अहम सदस्य और मूल रूप से जींद जिला निवासी रणदीप सुरजेवाला को उपचुनाव में उतारा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में पार्टी की सरकार बनवाने के बाद कांग्रेस युवराज ने यह बड़ा दांव खेला है। सत्तारूढ़ भाजपा सहित दूसरे विपक्षी दलों के सभी समीकरणों को कांग्रेस ने अपनी पहली ही चाल में बिगाड़ दिया है। लेकिन अब यह देखना रोचक होगा कि कैथल से विधायक सुरजेवाला की मैनेजमेेंट जींद में कितनी कारगर साबित होती है। देर रात करीब साढ़े 11 बजे रणदीप के नाम का ऐलान हुआ और सुबह-सवेरे एक आॅडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस आॅडियो का यह हरियाणावी गीत- ‘जींद की धरती बाट देख री, तू बनकै आजा सहारा रै। धरतीपुत्र रणदीप आजा, पुकारा जींद यो सारा रै’ ने स्पष्ट कर दिया है कि बाकी चाहे किसी को पता हो या न हो, लेकिन रणदीप को इस बात का पहले से आभास हो चुका था कि जींद के इस रण में उन्हें उतरना है।
दूसरा विकल्प नहीं
जननायक जनता पार्टी (जजपा) के लिए जींद उपचुनाव काफी अहम हो चुका है। कांग्रेस से रणदीप के मैदान में आने से पहले तक पार्टी में इनसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के अलावा किसी गैर-जाट को चुनावी रण में उतारने पर मंथन चल रहा था। मगर सुरजेवाला के आते ही जजपा की रणनीति भी धराशाही हो गई। ऐसे में पार्टी के पास दिग्विजय को मैदान में उतारने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था। ऐसे में अब उपचुनाव जहां रोचक होगा, वहीं त्रिकोणीय मुकाबला बनने के आसार भी हो गए हैं। यह उपचुनाव इसलिए भी रोचक होगा, क्योंकि रणदीप इससे पहले नरवाना उपचुनाव में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के सामने मैदान में आ चुके हैं। अब एक बार फिर सुरजेवाला और चौटाला परिवार आमने-सामने होंगे। अंतर केवल इतना है कि उस समय खुद चौटाला मैदान में थे और इस बार उनके पोते दिग्विजय ने मोर्चा संभाला है।
बिल्लू भाई का खेल
जींद उपचुनाव से अपने इनेलो वाले बिल्लू भाई साहब यानी अभय सिंह चौटाला की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। एक तो पार्टी टूट गई और अब जींद का उपचुनाव। पांच नगर निगमों में मिली करारी हार के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि अब जींद उपचुनाव में प्रत्याशी चयन में ही पसीने छूट गए। वैसे उमेद रेढू को मैदान में उतार कर बिल्लू भाई ने अपने भतीजे दिग्विजय चौटाला के वोट बैंक में सेंधमारी का ग्राउंड तैयार कर लिया है। इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिढ्ढा के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में अगर इनेलो उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा तो बिल्लू भाई की आगे की राहें और भी मुश्किल हो सकती हैं। खैर, फिलहाल खेल तो अच्छा खेला है, लेकिन अब देखना यह होगा कि जींद की सियासी पिच पर वे कितने रन बनाने में कामयाब होते हैं।
छोटूराम के बहाने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से दीनबंधु चौ. सर छोटूराम के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उन्हें सरदार बल्लब भाई पटेल के बराबर ला खड़ा किया है, हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों में छोटूराम के प्रति मान-सम्मान पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। गढ़ी सांपला किलोई में गत वर्ष मोदी की रैली के बाद इसका असर चौ. सर छोटूराम की पुण्यतिथि के मौके पर देखने को मिला। अपने सांघी वाले ताऊ यानी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही नहीं, आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई भी सोशल मीडिया पर छोटूराम को श्रद्धांजलि देते नजर आए। कांग्रेस ही नहीं, इनेलो व भाजपा के नेताओं ने भी सोशल मीडिया के जरिये छोटूराम को याद किया। वैसे छोटूराम के नाम पर राजनीति तो पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार इसका असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिला। अब चुनावी वर्ष है तो भाई लोगों को हर वोट बैंक का ख्याल रखना होगा।
तो होगा भितरघात
जींद उपचुनाव में अकेले जननायक जनता पार्टी ही ऐसा दल है, जिसमें भितरघात की संभावना सबसे कम है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जेजेपी का यह पहला चुनाव होगा। मगर सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस में भितरघात से इनकार नहीं किया जा सकता। सीएम के विशेष सचिव राजेश गोयल के अलावा अग्रवाल समाज के कई वरिष्ठ नेता टिकट के लिए लॉबिंग कर रहे थे। 32 वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे जवाहर सैनी ने तो अपनी नाराजगी जता दी है। कहते हैं, 32 वर्षों की मेहनत पर 2 महीने भारी पड़े। उनका इशारा दो माह पूर्व भाजपा में शामिल हुए कृष्ण मिड्ढा पर है, जिन्हें पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार रहे प्रमोद सहवाग के अलावा आधा दर्जन के करीब और ऐसे नेता हैं, जो टिकट की मांग कर रहे थे। ऐसे में इन नेताओं से भितरघात का डर लगा रहेगा। वैसे प्रबंधन के मास्टर माने जाने वाले सुरजेवाला रूठों को मनाने में कामयाब भी हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा असंतुष्टों को कैसे संतुष्ट करती है।
काका का हौसला
जींद उपचुनाव के नतीजे क्या होंगे, इस बारे में तो अभी कुछ कह नहीं सकते, लेकिन इतना जरूर है कि अपने ‘खट्टर काका’ के हौसले बुलंद हैं। हाल ही में उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा, जींद के नतीजों से आगामी लोकसभा चुनावों का रुझान तय होगा। मुख्यमंत्री के मुख से निकले इन शब्दों के बड़े मायने हैं। राजनीति में आमतौर पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल होता रहता है, लेकिन इस बार बात बड़ी गंभीर है। इतना तो तय है कि काका के यह कहने के पीछे ठोस वजह होगी। अगर ऐसा नहीं होता तो वे इस तरह का बयान कभी नहीं देते। जींद उपचुनाव में अगर भाजपा की हार होती है तो काका के कहे अनुसार जीतने वाली पार्टी को लोकसभा चुनाव में फायदा मिलेगा। और काका के उम्मीदवार को जीत हासिल हुई तो पांच निगमों में जीत के बाद जींद से भी कांग्रेस के उस विजयी रथ को बड़ा ब्रेक लगेगा, जो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से चला है।

-दिनेश भारद्वाज


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