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राजरंग

Posted On December - 14 - 2018

चार्जशीट मास्टर
अपने पलवल वाले चौधरी यानी कर्ण दलाल ‘चार्जशीट’ के मास्टर बन गए हैं। वह अकसर विरोधी दलों की सरकारों की चार्जशीट बनाते हैं। चौटाला की चार्जशीट भी उन्होंने बनाई और अब खट्टर सरकार के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर डाली है। सवा 300 पेज से अधिक की चार्जशीट वह राज्यपाल को भी सौंप चुके हैं। सरकार पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार करने के आरोप दलाल ने जड़े हैं। अब साहब ने चार्जशीट तो राज्यपाल को दे दी है, लेकिन इस पर कार्रवाई क्या होगी, यह कहा नहीं जा सकता। वैसे चौधरी साहब इंतजार का फल मीठा होता है। सो, आप भी थोड़ा इंतजार करें।

पंचसितारा में किसान
अपने बादली वाले ‘छोटे स्वामीनाथन’ का भी कोई जवाब नहीं है। ताऊ देवीलाल के जमाने का एक किस्सा बड़ा सुर्खियों में रहा है। एक जमाने में ताऊ ने हरियाणा सहित उत्तरी भारत के किसानों को एक सप्ताह के लिए दिल्ली के ताज पैलेस होटल में रुकवा दिया था। अब छोटे स्वामीनाथन यह तो नहीं कर सके, लेकिन प्रदेश के चुनिंदा किसानों को फाइव स्टार होटल का मजा जरूर उन्होंने दिलवा दिया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उनके साथ राउंड टेबल बैठकें कर रहे हैं। पिछले दिनों खट्टर काका की मौजूदगी में चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल माउंटव्यू के व्यंजनों का आनंद किसानों को दिलवाया। अब कहने वालों को कोई रोक थोड़े ही सकता है। कुछ लोग कह रहे हैं कि पंचतारा होटलों में बैठकों से किसानों का कल्याण नहीं होने वाला। खैर, अब छोटे स्वामीनाथन ने एक शुरुआत तो कर ही दी है। कहने वालों का क्या है, कहने दो।

गुर्जरों की दहाड़
राजनीति में हिस्सेदारी मांगने की रिवायत शुरू से है। कभी ब्राह्मण सियासत में अपना हक मांगते हैं तो कभी कोई और जाति। अब देशभर के गुर्जरों ने भी अपनी आबादी के हिसाब से डिमांड शुरू कर दी है। एक जमाने में गुर्जरों के बड़े नेता रहे राजेश पायलट ने हरियाणा के समालखा में गुर्जरों का राष्ट्रीय सम्मेलन किया था। इस बार गुर्जरों ने 16 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सम्मेलन का ऐलान किया है। समालखा से पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता धर्म सिंह छोक्कर इसमें मुख्य अतिथि होंगे। सम्मेलन में राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट सहित कई दिग्गजों को बुलाया गया है। राजस्थान में सीएम पद को लेकर चल रहे घमासान के बीच पायलट के आने और नहीं आने पर नज़रें हैं।

जयहिंद को कार
हरियाणा की सियासत में बरसों बाद पुरानी परंपरा लौटी है। अपने चेहतों नेताओं को समाज के लोगों की ओर से गाड़ी भेंट करने की शुरुआत हुई है। प्रदेशभर के ब्राह्मणों ने पिछले दिनों पानीपत में आम आदमी पार्टी प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद को स्कोरपिया गाड़ी भेंट की। यही नहीं, ब्राह्मणों ने जयहिंद को एक करोड़ रुपये इकट्ठा करके देने का भी ऐलान किया है। वैसे नवीन के लिए यह गाड़ी इसलिए शुभ मानी जा रही है क्योंकि गाड़ी का नाम स्कोरपियो है और उनकी राशि भी  यही है।

चार-चार सभाएं
वैसे तो प्रदेश के पांचों नगर निगमों में मेयर का चुनाव फसा हुआ है लेकिन खट्टर काका के निर्वाचन क्षेत्र करनाल पर सभी की नज़रें लगी हैं। भाजपा ने रेणु बाला गुप्ता को अपने सिम्बल पर मैदान में क्या उतारा, पूरे चुनाव के समीकरण ही बदल गए। इनेलो-बसपा गठबंधन के अलावा कांग्रेस द्वारा भी निर्दलीय प्रत्याशी आशा वधवा को समर्थन देने की वजह से मुकाबला रोचक हो चला है। आमतौर पर मुख्यमंत्री निगमों के चुनावों में प्रचार नहीं किया करते। अब अपने काका को करनाल में ही चार-चार सभाएं करनी पड़ रही हैं। अब तो आप मान रहे हैं ना कि मुकाबला कांटे का है।

1986 वाली बुग्गी
ताऊ देवीलाल की राजनीतिक विरासत को संभालने की कवायद के बीच हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला ने जींद में सफल रैली करके अपनी ताकत दिखा दी। ‘समस्त हरियाणा सम्मेलन’ के नाम से हुई इस रैली में पहुंची बैलगाड़ी चर्चाओं का विषय बनी रही। देवीलाल द्वारा 1986 में जींद में ‘न्याययुद्ध’ के आगाज के दौरान किए गए समस्त हरियाणा सम्मेलन में भी बैलगाड़ी पहुंची थी। दुष्यंत ने 1986 वाली बुग्गी ही अपनी रैली में ग्राउंड के बीचों-बीच खड़ी की हुई थी। एक जमाने में ताऊ देवीलाल की पार्टी का चुनाव-चिह्न भी दो बैलों की जोड़ी रहा है। इसी वजह से दुष्यंत द्वारा रैली स्थल पर खड़ी की गई लगभग 32 वर्ष पुरानी बुग्गी चर्चाओं का विषय बनी रही।

किसान सम्मेलन
23 दिसंबर को जींद स्थित चौ़ रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में किसान सम्मेलन हो रहा है। अपने बांगर वाले चौधरी साहब के अधिकारी पुत्र इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता होंगे। इस तरह के पोस्टर लगे हुए हैं और सोशल मीडिया पर भी प्रचार हो रहा है। अब किसान का बेटा किसानों के सम्मेलन में चला भी जाए तो इसके राजनीतिक मायने तो नहीं निकालने चाहिए। अब लोगों ने यही प्रचार शुरू कर दिया कि चौधरी साहब अपने बेटे को राजनीति में लाने की तैयारी में हैं। सोनीपत या हिसार से लोकसभा चुनाव लड़वाए जाने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। वैसे साहब इस तरह की चर्चाओं को खारिज कर चुके हैं।

अब ‘मां’ पर घमासान
जींद की रैली में दुष्यंत चौटाला ने मंच पर पहुंचते ही सबसे पहले मां और डबवाली से विधायक नैना सिंह चौटाला के पांव छूए। नैना ने भी जोरदार भाषण दिया। दो दिन बाद ही ‘चाचा’ यानी बिल्लू भाई का बयान आ गया कि जो लोग अपनी मां की उंगलियां पकड़ कर राजनीति कर रहे हैं, वह प्रदेश का क्या भला करेंगे। पहले तो बात सोशल मीडिया तक ही सीमित रही लेकिन बृहस्पतिवार को दिग्गी भाई यानी दिग्विजय चौटाला ने भी अपने चाचा पर पलटवार कर दिया। अब तो बिल्लू भाई और दिग्गी में होने वाली सियासी बहस लोगों में चर्चाओं का केंद्र बनने लगी है।

चुनावी असर
पांच राज्यों में भाजपा की हार का हरियाणा में लोकसभा, विधानसभा या फिर हाल ही में चल रहे निगम चुनावों पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बात अब भाजपा के भाई लोग कह रहे हैं। इन चुनावों में अगर भाजपा जीत जाती तो फिर यही कहा जाएगा कि मिशन-2019 से पहले देश की जनता ने ट्रेलर दिखा दिया है। अब जब पूरी फिल्म साफ हो चुकी है, तो इसे मानने को तैयार नहीं हैं। वैसे राजनीति के खेल होते ही निराले हैं। यहां बात वही कही जाती है जो मौके के हिसाब से सही जचती है।

-दिनेश भारद्वाज


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