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राजरंग

Posted On December - 21 - 2018

जनता के रंग

जनता कब क्या सोचती है और क्या करती है, इसका आभास नहीं होने देती। इसका ताजा उदाहरण है नगर निगम के हालिया चुनाव। चुनाव प्रचार के दौरान पानीपत में भाजपा के मंत्रियों-विधायकों व नेताओं को भीड़ ने डांस करने पर मजबूर कर दिया था। जनसभा से यूं लोगों का उठकर जाना सत्तारूढ़ भाजपा की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी था, लेकिन नतीजों ने हैरान कर दिया। पानीपत में 26 वार्डों में से 22 में भाजपा पार्षद तो जीते ही। साथ ही, मेयर का चुनाव भी भाजपा प्रत्याशी अवनीत कौर ने सबसे अधिक मतों के अंतर से जीता। ऐसे में कहा जा रहा है कि लोगों ने कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पंवार, पानीपत ग्रामीण के विधायक महिपाल ढांडा और भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजय भाटिया को डांस करने के लिए केवल इसलिए मजबूर किया था, ताकि वे जनता की भावनाओं को समझ सकें। नतीजों से यह भी आभास हो गया है कि शहर के लोगों ने भाजपा को जीतने का मन तो पहले से ही बनाया हुआ था, लेकिन नेताओं को सबक सिखना भी जरूरी था।

गैर-जाटों में पकड़
नगर निगम चुनावों के नतीजों ने प्रदेश में लोकसभा व विधानसभा चुनावों की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। बेशक, लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे निकाय चुनाव से एकदम अलग होते हैं, लेकिन अब यह कहा जा सकता है कि भाजपा का अगला चुनाव गैर-जाट को फोकस करके ही लड़ा जाएगा।
रोहतक निगम के 22 वार्डों में से किसी जाट प्रत्याशी को टिकट नहीं देकर भाजपा इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि गैर-जाट की नब्ज टटोलने के लिए भाजपा ने रोहतक में ट्रायल किया था। इसमें पार्टी पूरी तरह से कामयाब रही। ऐसे में अब आगामी चुनावों में इसी दिशा में पार्टी बढ़ती नज़र आ सकती है।

पंजाबियों ने मारी पलटी
करनाल निगम में इनेलो-बसपा गठबंधन और कांग्रेस द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार आशा वधवा को खुला समर्थन देने के बाद भाजपा उम्मीदवार रेणुबाला गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गई थीं। चुनाव पूरी तरह से फंस चुका था, लेकिन ऐन-मौके पर पंजाबियों ने पलटी मार दी। माना जा रहा है कि रेणुबाला द्वारा दिया गया विज्ञापन भी काफी कारगर सिद्ध हुआ। इस विज्ञापन में रेणुबाला ने साफ तौर पर लिखा था, ‘52 साल में मिला हरियाणा को पहला पंजाबी मुख्यमंत्री। अगर आज गलती की तो 60 साल में फिर मौका नहीं मिलेगा’। माना जा रहा है कि इस नारे ने काफी असर किया और पंजाबियों ने एकजुट होकर खट्टर को अपना नेता स्वीकार करते हुए करनाल ही नहीं, पांचों निगमों में चमत्कार करके दिखा दिया।

बिल्लू का ऐलान
अपने इनेलो वाले बिल्लू भाई ने एक बार फिर बड़ा ऐलान कर दिया है। जन-अधिकार यात्रा लेकर निकले बिल्लू भाई ने बाढड़ा हलके में जनसभा के दौरान कहा, सत्ता में आते ही एसवाईएल का पानी लेकर आएंगे और बिजली के मीटर जोहड़ में फेंक देंगे। वैसे इसी तरह का नारा अपने इनेलो सुप्रीमो भी पहले लगा चुके हैं। वे तो कहा करते थे न तो मीटर होगा और न ही रीडर। इतना कहने के बाद भी बात नहीं बनी। अब बिल्लू भाई ने बिजली के मीटरों को इतना बड़ा मुद्दा बनाया है तो इसके पीछे उनकी बड़ी और गहरी राजनीतिक सोच ही होगी।

रॉक स्टार के गुरुजी
अपने खट्टर काका के ‘रॉक स्टार’ ने अब हरियाणा के एक आला नौकरशाह को अपना ‘गुरु’ बना लिया है। राष्ट्रीय राजनीति में पीएम नरेंद्र मोदी को अपना सबसे बड़ा ‘गुरु’ बताने वाले कैथल के ये रॉक स्टार इन दिनों काका की ही मुसीबत बढ़ाने में जुटे हैं। स्कूलों व अस्पतालों का दौरा करके वहां खामियां निकाल रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि सरकार को इसकी भनक नहीं है। बताते हैं कि सीएमओ के सबसे ताकतवर नौकरशाह का रॉकी को पूरा ‘आशीर्वाद’ मिला हुआ है। स्कूलों व अस्पतालों के दौरों के बाद रॉक स्टार अपनी रिपोर्ट भी अपने इन्हीं गुरुजी को सौंप रहे हैंं। यही नहीं, रॉक स्टार ने अब यह भी कहना शुरू कर दिया है कि आगे से वे काका के लिए एक भी गाना न तो लिखेंगे और न ही गाएंगे। कहने को यह भी कह रहे हैं कि अगर मुझे फ्री-हैंड दिया जाए तो प्रदेश में दोबारा से भाजपा की सरकार बनवा सकता हूं। अब इन साहब को कौन समझाए कि गानों से भीड़ तो रुक जाती है, लेकिन वोट नहीं मिला करते।

काका के ‘हनुमान’
करनाल निगम चुनाव में भाजपा की जीत में काका का तो योगदान है ही, साथ ही, थानेसर वाले ‘काका के हनुमान’ ने भी इन चुनावों में पूरा जोर लगाया। विधायक सुभाष सुधा काफी मिलनसार हैं। पंजाबियों में उनकी अच्छी पैठ है। ऐसे में निगम चुनावों में रेणुबाला गुप्ता के लिए सुधा ने रिश्तेदारों के साथ-साथ करीबियों और समाज के लोगों में प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यही नहीं, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री कर्णदेव काम्बोज ने भी करनाल में मोर्चाबंदी की। इन दोनों-काम्बोज और सुधा की जोड़ी भी काफी सुर्खियों में रहती है। जीत के बाद जोड़ी फिर से चर्चाओं में आ गई है। कहने वाले सुधा को काका का ‘हनुमान’ कहने लगे हैं।

युवा हुंकार
नगर निगम चुनावों के नतीजे आते ही हिसार से सांसद और जननायक जनता पार्टी नेता दुष्यंत चौटाला ने भाजपा के जीते हुए मेयर उम्मीदवारों को बधाई दी। फिर उन्होंने ट्वीट करके यह भी जताने की कोशिश की कि जेजेपी मैदान में नहीं थी, इसलिए भाजपा को आसान जीत मिली। शायराना अंदाज में दुष्यंत ने कहा, ‘जुल्मों का हिसाब करना बाकी है, हवाओं के भी पर कतरना बाकी है। मत इतरा खाली मैदान की जीत पर, अभी युवाओं का रण में उतरना बाकी है।’ शेर तो ठीक है, लेकिन नेताजी अभी आपकी हुंकार बाकी है। बता तो दो, वह कब होगी।

आखिर में बहनजी
केंद्र में मंत्री रहीं और सोनिया गांधी के करीब मानी जाने वाली कुमारी शैलजा का जादू भी निगम चुनाव में नहीं चला। यमुनानगर निगम में मेयर का चुनाव लड़ रहे राकेश शर्मा को ‘बहनजी’ का पूरा समर्थन और आशीर्वाद था। शैलजा समर्थकों ने चुनाव में पूरा मोर्चा भी संभाला हुआ था, लेकिन आखिर में हार ही नसीब हुई। इन नतीजों के बाद यह चर्चा छिड़ गई है कि जब पार्टी ने सिम्बल पर चुनाव लड़े ही नहीं तो फिर समर्थन देकर उम्मीदवार उतारने की क्या जरूरत थी। कम से कम फजीहत से तो बच जाते।
-दिनेश भारद्वाज


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