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पड़ोसियों की मदद

Posted On December - 6 - 2018

पड़ोसियों की मदद करना हरियाणा की संस्कृति का हिस्सा है। वैसे भी इन दिनों राजनीतिक माहौल ऐसा है कि चुनाव प्रचार में खुद के अलावा दूसरे राज्यों के नेताओं को भी मोर्चाबंदी करनी होती है। राजस्थान हरियाणा से सटा है और दोनों राज्यों का खान-पान और पहनावा काफी मेल खाता है। जातिगत वोट समीकरण भी ऐसे हैं कि हरियाणा के कई नेताओं का राजस्थान में प्रभाव है। सत्तारूढ़ भाजपा ही नहीं विपक्षी दल कांग्रेस के भी कई वरिष्ठ नेताओं ने हरियाणा से सटे कई इलाकों में प्रचार की कमान संभाली। अपने सांघी वाले ताऊ ही नहीं, उनके सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा भी पड़ोसियों के यहां प्रचार में जुटे रहे। साइकिल वाले प्रधानजी यानी अशोक तंवर और कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने भी राजस्थान में खूब प्रचार किया। महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी रामबिलास शर्मा का तो जिला ही राजस्थान से सटा है। सो, उन्होंने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में भाजपा को मजबूत करने का काम किया। जाट वोट बैंक को साधने का जिम्मा भाजपा ने वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को सौंपा हुआ था। वैसे बिश्नोई वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए अपने हिसार वाले कुलदीप बिश्नोई ने भी पूरा जोर लगाया। अब तो बस नतीजों का इंतजार है। चुनावी परिणाम यह भी साबित कर देंगे कि भाई लोगों के प्रचार का कितना फायदा पड़ोसियों को मिला। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला के साले अभिषेक मटौलिया राजस्थान के नोहर हलके से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अभय प्रचार के लिए नहीं गए।
चुनाव चिह्न से परहेज क्यों
प्रदेश में लगातार 10 साल तक सत्ता में रही कांग्रेस ने नगर निगम चुनाव चिह्न पर नहीं लड़ने का फैसला लेकर विरोधियों को घर बैठे मुद्दा दे दिया। यह बात समझ से बाहर है कि जब कांग्रेसी मानते हैं कि 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ऐतिहासिक जीत हासिल करेगी तो फिर निगम चुनावों से इतना डर क्यों? अपने साइकिल वाले प्रधानजी तो आखिर तक पार्टी हाईकमान को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी एक न चली। इस बात का जवाब अब किसी के पास नहीं है कि जब चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े ही नहीं जा रहे तो फिर अपनी पसंद के प्रत्याशी क्यों उतारे जा रहे हैं। सांघी वाले ताऊ ने रोहतक में नगर सुधार मंडल के पूर्व चेयरमैन सीताराम सिंगला को मैदान में उतार दिया है। वहीं हिसार में भजन और जिंदल परिवार ने मिलकर भाजपा से बागी हुए हनुमान ऐरन की पत्नी रेखा ऐरन को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में कांग्रेसियों की यह सियायत चर्चाओं में तो आएगी ही।
काका के ‘केजरीवाल’
‘खट्टर काका’ के पास भी ‘मानव बमों’ की कोई कमी नहीं है। दिल्ली में राज कर रहे मफलर वाले नेताजी से तो काका ने अस्पतालों और स्कूलों के मुद्दे पर जैसे-तैसे पीछा छुड़वाया, लेकिन अब काका अपने ही ‘केजरीवाल’ को कैसे रोकें। जी हां, काका की सरकार के ‘रॉक स्टार’ इन दिनों केजरीवाल की ही भूमिका में दिख रहे हैं। दिल्ली सीएम को तो असंध की डिस्पेंसरी का निरीक्षण करने से रोक दिया गया था, लेकिन अपने ये रॉक-स्टार अपनी मर्जी से किसी भी स्कूल और अस्पताल में जा पहुंचते हैं। दोनों ही जगहों पर कमियां ढेरों हैं। ऐसे में मीडिया की भी सुर्खियां बन रही हैं और काका की सरकार के इन दोनों विभागों की फजीहत भी खूब हो रही है। अब सवाल यह है कि इन रॉक स्टार को ऐसा करने से रोके भी तो कौन। ये भाई साहब तो सचिवालय में भी कह देते हैं कि उनकी नियुक्ति तो दिल्ली से हुई है।
उलटी गंगा
राजनीति में नोटों की माला और सोने-चांदी के उपहार लेना-देना एक तरह से अधिकार माना जाता है। वैसे कुछ समय से राजनीति में बदलाव भी देखने को मिल रहा है। अब अपने हिसार वाले युवा सांसद दुष्यंत चौटाला को ही ले लें। पिछले दिनों कुरुक्षेत्र में आयोजित इंसाफ रैली के संयोजक जयभगवान शर्मा ‘डीडी’ ने उन्हें चांदी की गदा भेंट की। सांसद ने यह गदा हाथों-हाथ ही ज्योतिसर धाम को दान दे दी। वैसे यह बात प्रदेशभर के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बनी हुई है। अब पुराने लोग समझ गए होंगे कि चर्चाओं का मुख्य कारण क्या है। वैसे कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह तो उलटी गंगा बह निकली।
युवराज के बड़े बोल
इनेलो वाले बिल्लू भाई साहब के बेटों कर्ण और अर्जुन की जोड़ी भी अब राजनीति में सक्रिय हो गई है। छात्रों और युवाओं को पार्टी से साथ जोड़कर पिता के हाथ मजबूत करने की कोशिश में दोनों भाई जुट गए है। जगह-जगह युवा सम्मेलन कर रहे हैं। अब पिछले दिनों होडल के सम्मेलन को ही ले लें। कर्ण चौटाला इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। सम्बोधन में बहन-बेटियों की चर्चा करते हुए कहा, ताऊ देवीलाल ने 5000 रुपये कन्यादान शुरू किया था, जिसे चौटाला साहब की सरकार में बढ़ाकर 5 लाख किया गया। कहने लगे, इनेलो-बसपा गठबंधन की सरकार आते ही इसे 25 लाख करेंगे।
अभय का हमला, भाभी का जवाब
इनेलो वाले चाचा यानी बिल्लू भाई ने भतीजे दुष्यंत चौटाला पर जन-अधिकार यात्रा में फिर बड़ा हमला बोला। कहने लगे, दुष्यंत अपनी गलती मान लें, उन्हें माफ कर दिया जाएगा। दुष्यंत इसका जवाब देते उससे पहले भाभी यानी डबवाली विधायक नैना चौटाला ने ही अपने देवर को जवाब दे दिया। दो-टूक कहा, माफी वो मांगेगा, जिसने गलती की हो। साथ ही, अपने पति अजय चौटाला की भाषा में कहा, याचना नहीं अब रण होगा। वैसे गन्नौर में बिल्लू भाई का यह कहना भी कई सवालों को जन्म दे गया कि चौटाला साहब उसूल के पक्के हैं, दुष्यंत के साथ नहीं जाएंगे। चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर ऐसा बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी।
सियासत से ऊपर
हरियाणा में सामाजिक रिश्ते, राजनीतिक रिश्तों से बहुत ऊपर माने जाते हैं। प्रदेश के सहकारिता मंत्री रहे सतपाल सांगवान की 94 वर्षीय माता मोहरा देवी का पिछले दिनों देहांत हो गया। भूतपूर्व सीएम स्व. चौ.बंसीलाल के सबसे करीबियों में शामिल रहे सतपाल सांगवान और राज्य के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के बीच राजनीतिक तौर पर छत्तीस का आंकड़ा है। धनखड़ ही नहीं कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह सहित कई मंत्री और विधायक शोक जताने पहुंचे। चौटाला राज में तो पुलिस केस तक सांगवान ने झेले हैं, लेकिन इन बातों से इत्तर डबवाली विधायक नैना चौटाला दादरी स्थित सांगवान के आवास पर शोक प्रकट करने पहुंचीं। आप प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद के अलावा दर्जनों सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी सांगवान के यहां पहुंचे। इसलिए कहते हैं राजनीति अपनी जगह है और सामाजिक रिश्ते और संस्कार अपनी जगह।
-दिनेश भारद्वाज


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