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प्रधानजी के पकौड़े

Posted On November - 15 - 2018

अपने साइकिल वाले कांग्रेसी प्रधानजी सुर्खियां बटोरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। पार्टी में अपने विरोधी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रथ के मुकाबले साइकिल यात्रा शुरू करने की बात हो या फिर चंडीगढ़ में मोर्चाबंदी की, वह हमेशा आगे रहते हैं। अब यह संयोग ही है या फिर इसके पीछे प्रधानजी की रणनीति है कि जब भी सांघी वाले ताऊ का चंडीगढ़ प्रवास होता है, प्रधानजी भी एक दिन पहले या बाद में चंडीगढ़ का प्रोग्राम बना लेते हैं। बृहस्पतिवार को ताऊ ने प्रदेशभर के कांग्रेसियों की चंडीगढ़ में बैठक बुलाई तो प्रधानजी ने बुधवार को ही पिंजौर की एचएमटी फैक्टरी में जाकर कढ़ाही चढ़ा दी। फैक्टरी बंद करने का विरोध उन्होंने पकौड़े तलकर किया। लगे रहो प्रधानजी।
मेरे नवरत्न
राजनीति में हर कोई हर किसी को पसंद आए, यह संभव नहीं। इनेलो में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। अपने डॉक्टर साहब यानी अजय चौटाला को जो चेहरे पसंद नहीं, बिल्लू भाई यानी अभय चौटाला के वही पसंदीदा हैं। दिग्विजय चौटाला इनेलो के प्रधान महासचिव आरएस चौधरी को पार्टी और परिवार को तोड़ने का मुख्य साजिशकर्ता मानते हैं। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे केसी बांगड़ को प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण अत्रे के लोकदली होने पर संदेह था। बिल्लू भाई ने दोनों को ही अपना सबसे करीबी और अहम साबित करते हुए साफ कह दिया कि चौधरी साहब तो इनेलो में तब से हैं, जब हम पैदा भी नहीं हुए थे। अत्रे को अपने नवरत्नों में बताते हुए बिल्लू ने कहा, प्रवीण अत्रे ने तो पार्टी के लिए परिवार को भी छोड़ा हुआ है। उन जैसा संघर्षशील और बलिदानी कोई नहीं। अब यह तो निजी पसंद और नापसंद का मामला है, इसमें आप और हम चुप ही रहें तो बेहतर होगा।
नेताजी गायब
इनेलो के कम से कम आधा दर्जन विधायक ‘अंडरग्राउंड’ हैं। बुधवार के घटनाक्रम के बाद से ही उनका अता-पता नहीं है। मोबाइल फोन भी रेंज से बाहर है। चर्चाएं तरह-तरह की हैं। एक पक्ष कह रहा है कि 17 को जींद में इनेलो प्रदेश कार्यकारिणी में सभी विधायक पहुंचें, इसके लिए ‘पुख्ता’ प्रबंध किया गया है। दूसरा खेमा कह रहा है कि इसी दिन जींद में अजय चौटाला के शक्ति प्रदर्शन को देखते हुए यह लुक्का-छिपी का खेल खेला गया है। ‘गायब’ हुए विधायकों में से तीन तो बागड़ी बेल्ट के हैं। तीनों के ही निर्वाचन क्षेत्र पंजाब से सटे हुए बताए गए हैं। अब राजनीति चीज ही ऐसी है।
पार्टी का ऐलान
हरियाणा की सियासत का सेंटर माना जाने वाला जींद 17 नवंबर को नयी राजनीतिक इबारत लिखने जा रहा है। अपने ही परिवार और पार्टी से अलग होने के बाद पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला नयी राह पकड़ सकते हैं। अजय खेमा अलग राजनीतिक दल बनाने की राह तो पहले ही तय कर चुका था, लेकिन इसकी विधिवत घोषणा दिसंबर में करने की योजना थी। अब बदले हुए हालात में यह काम समय से पहले हो सकता है। इस काम के लिए 17 नवंबर की तारीख सबसे बेहतर मानी जा रही है। पंडितों ने भी आकलन शुरू कर दिए हैं। बहुत संभव है कि 17 को ही नयी पार्टी के साथ-साथ नये बैनर तले प्रदेश स्तर की रैली का भी ऐलान हो जाए। देखा जाए तो आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में अब वक्त भी कम ही बचा है। ऐसे में अजय को जो भी करना है, अभी करना होगा। अब देर की तो बहुत देर हो सकती है।
हुड्डा का मास्टर स्ट्रोक
जींद विधानसभा के उपचुनाव का ऐलान तो जब होगा तब होगा, लेकिन अपने सांघी वाले ताऊ ने पहले ही मास्टर स्ट्रोक मार दिया है। पूर्व मंत्री एवं जींद में अच्छी पकड़ रखने वाले पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला के बेटे अंशुल सिंगला के हाथ कांग्रेस के हाथ से मिलवाने में ताऊ कामयाब रहे हैं। अपने खट्टर काका ने पिछले दिनों पूर्व विधायक स्व. हरिचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को भाजपा में शामिल करवा इसकी शुरुआत की थी। बताते हैं कि इस उपचुनाव में जातिगत समीकरण काफी काम करेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए पहले काका और अब ताऊ ने अपनी चाल चल दी। अब बारी विपक्ष के नेताजी यानी अपने बिल्लू भाई और अलग राह पकड़ चुके अजय और दुष्यंत चौटाला की है। यह तो अब साफ है कि दोनों के अलग-अलग उम्मीदवार ही मैदान में होंगे। वैसे सिंगला पर नज़रें और भी कई लोगों की थी, लेकिन ताऊ बाजी मार ले गए।
मोदी की रैली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर हरियाणा आ रहे हैं। 19 नवंबर को केएमपी एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ करेंगे। इसी दिन गुरुग्राम के सुल्तानपुर में बड़ी रैली होगी। भाजपा इसे ऐतिहासिक बनाने में जुटी है। चार लोकसभा क्षेत्रों-गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक और सोनीपत के नेताओं एवं वर्करों की भीड़ जुटाने के लिए ड्यूटी लगा दी गई है। यह भी प्रचार किया जा रहा है कि इसी रैली के जरिये मोदी मिशन-2019 यानी आगामी लोकसभा चुनावों का आगाज करेंगे। एक चर्चा जहां इस बात को लेकर है कि वर्किंग-डे यानी सोमवार के दिन रैली करके भाजपा भीड़ कैसे जुटाएगी। वहीं दूसरी ओर अपने अहीरवाल वाले बड़े राव साहब यानी इंद्रजीत सिंह ने फिर से बड़ा बयान दे दिया है। रैली की तैयारियों के दौरान कह दिया कि अगर रैली में भीड़ नहीं जुटी तो फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार भी नहीं आएगी। वैसे नेताओं के दिमाग से यह बात पता नहीं कब निकलेगी कि रैलियों की भीड़ हमेशा वोटों में नहीं बदला करती।
चिट्ठी पर बवाल
पूर्व सांसद अजय चौटाला को इनेलो के प्रधान महासचिव पद से हटाने और पार्टी से निष्कासित करने के बाद नयी बहस छिड़ गई है। इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने जो निष्कासन पत्र पढ़कर मीडिया को सुनाया, उसके बारे में दावा किया गया कि इसमें चौटाला के हस्ताक्षर नहीं हैं। विवाद बढ़ा तो इनेलो ने चौटाला के साइन वाली चिट्ठी भी जारी कर दी। यह चिट्ठी जारी होते ही अजय खेमा फिर लामबंद हो गया। अब कहा गया कि जब चिट्ठी पर हस्ताक्षर 12 नवंबर को हुए तो तिहाड़ जेल अथॉरिटी ने इसे 15 नवंबर को क्यों सत्यापित किया। जेल नियमों के अनुसार तो 12 नवंबर की चिट्ठी उसी दिन सत्यापित होनी चाहिए। बातें तो चौटाला के फर्जी साइनों की भी चल पड़ी हैं। अब जब परिवार में ही इतना बड़ा बवाल चल रहा है तो स्वाभाविक है चिट्ठियों और हस्ताक्षरों पर भी बवाल हो सकते हैं।
-दिनेश भारद्वाज


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