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दिल्ली में घमासान

Posted On November - 29 - 2018

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों सियासी पारा उफान पर है। हरियाणा के दोनों राष्ट्रीय दलों सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में ही डेरा डाला हुआ है। हरियाणा के 5 नगर निगमों-यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक व हिसार के चुनाव के लिए टिकट की लॉबिंग चली रही है। भाजपाई पार्टी नेताओं से लेकर संघ मुख्यालय तक की परिक्रमा में जुटे हैं। सिफारिशें तलाशी जा रही हैं। भाजपा चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेगी, इसलिए टिकटों को लेकर मारा-मारी है। भाजपा प्रदेश चुनाव समिति की बैठक एक और 2 दिसंबर को दिल्ली में है। अब देखना यह है कि निगम चुनाव के लिए ग्राउंड पर शुरू होने वाली जंग से पहले दिल्ली में चल रहे संघर्ष के क्या नतीजे निकलते हैं।
मेयर की चेयर
खट्टर काका ने निगमों में मेयर के चुनाव डायरेक्ट करवाने का फैसला क्या लिया, समूचे प्रदेश की सियासत गरमा गई। समीकरण बदल गए हैं। लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव से पहले निगमों के ये चुनाव किसी सेमीफाइनल से कम नहीं हैं। भाजपा तो शुरू से ही शहरी पार्टी रही है। वैसे भी पहली बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई है। ऐसे में निगमों के चुनाव जीतना उसके लिए बड़ी चुनौती है। मेयर की चेयर को लेकर घमासान इसलिए भी तेज हो गया है, क्योंकि इसका फैसला अब सीधे जनता करेगी। तभी तो मेयर चुनाव विधायक के चुनाव से भी बड़ा हो गया है। हो भी क्यों नहीं, यमुनानगर जैसे निगम में तो तीन-तीन विधानसभा हलके आते हैं। यानी तीन विधायकों के ऊपर होगा एक मेयर। संग्राम इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि सीधे चुने जाने के बाद मेयर को हटाने का अधिकार पार्षदों के पास रहेगा भी नहीं। यानी न किसी तरह का दबाव और न ही अविश्वास प्रस्ताव का खतरा।
बाबा का नजला
दाढ़ी वाले कामरेड बाबा यानी अनिल विज का पारा कब सातवें आसमान पर जा पहुंचे, कह नहीं सकते। तीन दिन पुरानी बात है। अम्बाला से निकले तो सिविल सचिवालय के लिए थे। चंडीगढ़ पहुंच भी गए। हाईकोर्ट चौक पर अचानक मन बदला और गाड़ी को सचिवालय की बजाय साथ पड़ने वाले एमएलए हॉस्टल की डिस्पेंसरी में मुड़वा दिया। अपने चिर-परिचित अंदाज में डिस्पेंसरी में पहुंचते ही डॉक्टरों से पूछताछ करनी शुरू कर दी और साथ ही, वहां मौजूद रिकार्ड रजिस्टर को खंगालना शुरू कर दिया। फार्मासिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट और डाइटीशियन पर बाबा का नजला गिरा। तीनों ने ही अपना एपरेन नहीं पहना था। फिर क्या था, इसी बात पर बाबा आग-बबूला हो गए और तीनों को सस्पेंड करने के आदेश दे डाले। दफ्तर पहुंचे तो कुछ फरियादी आए हुए थे। उनके कागजात पर साइन कर दिए। एक-दो ने जब कहा कि पहले भी कागज साइन हुए थे काम नहीं हुआ तो बाबा बोले, मेरे यहां से फाइल गोली की तरह निकलती है।
राम आएंगे काम
चुनाव देखकर भाजपा और संघ को एक बार फिर ‘राम’ की ‘याद’ सताने लगी है। केंद्र सरकार दिसंबर में ही अध्यादेश लाने की तैयारी में है। सुप्रीमकोर्ट में जल्द सुनवाई को लेकर 9 दिसंबर को देशभर के हिंदू संगठन दिल्ली में एकजुट हो रहे हैं। कई हिंदू संगठनों के साथ-साथ अंदरखाते अपने संघी भाई भी इसके लिए ग्राउंड बना रहे हैं। हरियाणा के अधिकांश मंदिरों के बाहर पोस्टर लगाकर 9 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले सम्मेलन का निमंत्रण दिया जा रहा है। इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। यही नहीं, हरियाणा के कई शहरों में 9 से पहले संघ नेताओं की गोपनीय बैठकें भी हो रही हैं। वैसे इसमें कुछ बुरा भी नहीं है। अब जब चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे में ‘राम’ भी तो काम आएंगे ना।
ब्राह्मणों पर दांव
9 दिसंबर को जींद के पांडु-पिंडारा गांव में प्रदेश स्तरीय रैली कर रहे हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चल पड़े हैं। प्रदेश की राजनीति में नया विकल्प देने में जुटे दुष्यंत ब्राह्मणों पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। वे जिस तरह से अपने साथ ब्राह्मण नेताओं को जोड़ रहे हैं, उससे साफ है कि उनके नये दल पर किसी जाति विशेष की पार्टी होने का ठपा नहीं लगेगा। इनेलो को गांवों और जाटों की पार्टी कहा जाता रहा है। अब इनेलो से बाहर आ गए हैं तो नयी पार्टी में चेहरे भी नये होंगे और समीकरण भी एकदम अलग। अपने नारनौंद वाले वयोवृद्ध पंडितजी और पूर्व विधायक रामकुमार गौतम ने भी दुष्यंत को ‘आशीर्वाद’ दे दिया है। इससे पहले डीडी शर्मा और बृज शर्मा जैसे बड़े नाम जुड़ चुके हैं। खबरें हैं कि आने वाले दिनों में कई और बड़े ब्राह्मण चेहरे दुष्यंत के साथ नज़र आएंगे। अब यह तो सांसद महोदय ही बताएंगे कि नयी पार्टी के गठन से पहले ही उन्होंने किसे अपनी कुंडली दिखाई है।
ताऊ की भीड़
सांघी वाले ताऊ ने पिछले दिनों हिसार के बरवाला में शक्ति प्रदर्शन किया। जनक्रांति रथयात्रा के सातवें चरण की शुरुआत उन्होंने रैली से की। हिसार जैसे क्षेत्र में ताऊ द्वारा जुटाई गई भीड़ उम्मीदों से कहीं अधिक थी। अब ताऊ राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार में जाएंगे और चुनावी नतीजों के बाद ही हिसार जिले की अपनी इस यात्रा को पूरा करेंगे। बताते हैं कि रैली में भजन पुत्र कुलदीप बिश्नोई को भी आना था, लेकिन ऐन-मौके पर वे ‘सियासी डेंगू’ का शिकार हो गए। वैसे डेंगू ‘मरीजों’ की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वे दस-पंद्रह दिन से पहले उठ पाएं, लेकिन ये भाई साहब तीन दिन बाद ही राजस्थान में चुनाव प्रचार के लिए भी जा पहुंचे। अब तो आप भी समझ गए होंगे।
दल नहीं पार्टी
इनेलो को पूरी तरह से अलविदा कहने के बाद हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला और उनकी पूरी टीम अब नयी पार्टी के गठन की तैयारियों में जुटी है। बताते हैं कि पिछले दिनों वरिष्ठ नेताओं व जननायक सेवादल के कोर ग्रुप के साथ 9 दिसंबर को बनने वाली पार्टी के नाम को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान किसी साथी ने जननायक जनता दल का सुझाव दिया। इस पर तपाक से कहा गया कि दल नहीं हम पार्टी बनाएंगे। वैसे बात ठीक भी है जब लोकदल से बाहर आना ही है तो दल का साथ तो छोड़ना ही होगा। वैसे भी आजकल दल से अधिक पार्टी पर अधिक जोर दिया जा रहा है। वैसे राजनीति को दल-दल ही कहा जाता है। अब युवा सांसद इससे कैसे बाहर निकलेंगे, ये तो वही जाने।
– दिनेश भारद्वाज


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