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केएमपी-केजीपी एक्सप्रेस-वे फर्राटे का सफर

Posted On November - 22 - 2018

पुरुषोत्तम शर्मा
केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट कुंडली-गाजियाबाद पलवल (केजीपी) और कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे फर्राटा भरने के लिए तैयार है। यह दिल्ली समेत एनसीआर के शहरों का एक वैकल्पिक आउटर बाइसपास है। जितना रोमांचित करने वाला इन एक्सप्रैस-वे का सफर होगा, उससे कहीं अधिक रोचक इनके निर्माण की कहानी है। केएमपी का निर्माण करने के लिए 3 बार अलग-अलग सरकारों में उद्घाटन हुआ और अंतत: काम अब पूरा हुआ है। केजीपी के निर्माण में किसानों के आंदोलन ने रोड़ा अटकाया तो कभी एनजीटी के निर्देश बाधा बने। हालांकि इन सबके बीच ये दोनों एक्सप्रेस-वे आधुनिक तकनीक के साथ अपने तय समय से पहले पूरे कर लिए गए हैं। इनका तय समय मार्च 2019 था, लेकिन नवंबर 2018 में ही इनका निर्माण पूरा कर लिया गया है।
दिल्ली में बढ़ती भीड़ और प्रदूषण को कम करने और एक विकल्प के तौर पर एनसीआर को आउटर रिंग रोड देने के लिए लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के इन दोनों प्रोजेक्टों की नींव नवंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। तय हुआ था कि मार्च 2019 तक यह निर्माण पूरा किया जाएगा। एक्सप्रेस-वे के निर्माण में करीब 5900 करोड़ रुपये अकेले किसानों को मुआवजे के तौर पर दिया गया।
सबसे पहले 2004 में केंद्र में तत्कालीन वाजपेयी और हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला की सरकार ने केएमपी प्रोजेक्ट तैयार किया। इसकी सोनीपत के कुंडली में नींव रखी गई।
बाद में सत्ता बदली तो यह प्रोजेक्ट भी लटक गया। इसके बाद, 2008 में इसका दोबारा से उद्घाटन हुआ, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका।
अब 2015 में केएमपी के साथ-साथ केजीपी प्रोजेक्ट भी एक साथ शुरू किया गया। यह दोनों प्रोजेक्ट तैयार हैं और इन पर वाहन चालक फर्राटा भर सकते हैं। यानी दिल्ली का जाम और भीड़ से बचने के लिए कुंडली से जयपुर हाईवे और कुंडली से आगरा हाईवे तक का रास्ता साफ है। उत्तर भारत के लिए यह एक्सप्रेस-वे लाइफ लाइन से कम नहीं। चूंकि जिस तेजी से भीड़ बढ़ रही है और दिल्ली सिकुड़ती जा रही थी, उसमें केजीपी व केएमपी का विकल्प बेहतर प्रयास है। अगले 25 सालों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह हाईवे बनाए गए हैं। इन्हें इसी कारण से 8 लेन बनाया गया है कि यह ट्रैफिक के बोझ को झेल सकें। इस प्रोजेक्ट के लटकने को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया तो सरकारें जागीं और तय समय से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया गया।
केएमपी के साथ बसेंगे 5 नये शहर
प्रदेश के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए केएमपी के साथ 5 नये शहर विकसित करने की हरियाणा सरकार की योजना है। इसके तहत एजुकेशन सिटी कुंडली सोनीपत, आईटी सिटी बादली-जहांगीरपुर झज्जर, जैव प्रौद्योगिकी पार्क सांपला, रोहतक, फैशन सिटी गुरुग्राम सोहना के निकट, लॉ यूनिवर्सिटी आईएमटी मानेसर, फेयर सिटी पलवल और ग्लोबल कॉरीडोर दिल्ली-हरियाणा प्रमुख हैं।
इतना ही नहीं केजीपी-केएमपी को इस तकनीक से तैयार किया गया है कि आपातकाल में यहां जेट फाइटर प्लेन भी उतारा जा सकता है। यह कहा जा सकता है कि यह हाईवे मल्टीपर्पज इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं। दरअसल, विश्व के ज्यादातर विकसित देशों में इसी तकनीक पर सड़कें बनाई जा रही हैं। ये सड़कें आपात स्थिति में हवाई जहाज लैंडिंग कराने से लेकर जेट फाइटर प्लेन तक के लिए रन-वे का काम करती हैं। करीब दो साल पहले पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी इस तकनीक का इस्तेमाल लाहौर-इस्लामाबाद हाईवे पर किया था। इसके बाद से ही भारत में इस तकनीक को लेकर भूतल परिवहन मंत्रालय काम कर रहा है। मंत्रालय ने नोएडा के युमना एक्सप्रेस-वे पर यह ट्रायल पूरा भी कर लिया है। यहां जेट फाइटर प्लेन को उतारा गया था। इसके बाद इस तकनीक को सरकार ने देश के तमाम महानगरों में बनने वाले एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर लागू किया है।
बेहतरीन हाईवे, पर अभी भी कई पेंच
वैसे तो केजीपी और केएमपी का कोई मुकाबला देश के अब तक बनाए गए हाईवे में किसी से नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कई पेंच इन हाईवे में अभी भी हैं। सबसे पहला पेंच तो यह है कि तय समय से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरा करने और सुप्रीमकोर्ट के डंडे के चलते आधी-अधूरी तैयारी के बीच यह हाईवे शुरू कर दिए गए। केजीपी और केएमपी पर अभी भी हर 25 किलोमीटर पर टायलेट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। दूसरा, जगह-जगह मिट्‌टी कमजोर होने से हाईवे के धंसने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसा केएमपी में होने की गुंजाइश कम यूं मानी जा रही है कि केएमपी के लिए मिट्‌टी भराई का काम कई साल पहले कर लिया गया था। ऐसे में यहां मिट्‌टी पूरी तरह जम चुकी है, लेकिन केजीपी पर इस तरह की शिकायतें सबसे अधिक हैं। पिछले दिनों तो यहां केजीपी के लिए बनाई गई आर्ट गैलरी ही धंस गई थी।
हाईवे पर जलपान की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। पेट्रोल पंप और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में हाईवे पर फर्राटा भरने वालों को सोच-समझ कर सड़क पर उतरना पड़ता है। सुरक्षा भी एक बड़ा सवाल है। हाईवे पर पुलिस की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों से लूटपाट जैसी वारदातों से इनकार नहीं किया जा सकता है।
केजीपी और यमुना एक्सप्रेस-वे का नहीं जुड़ाव
केंद्र के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट केजीपी का जो लाभ वाहन चालकों को मिलने की उम्मीद थी, वह उन्हें नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि केजीपी को यमुना एक्सप्रेस-वे से लिंक नहीं किया गया। इसकी वजह से वाहनों को लंबा फेर और मोटे टोल टैक्स का फटका लग रहा है। तेल और पैसा दोनों ही देने के बावजूद भी उन्हें फर्राटा भरने को जगह नहीं मिलती। यमुना एक्सप्रेस-वे पर लिंक जाम से मुक्ति दिलाता, पर केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट में इसका जिक्र तक नहीं था। ऐसे में वाहन चालकों को लगभग 50 किलोमीटर लंबा फेर और यहां तक जाने के लिए 250 रुपये अधिक टोल अदा करना पड़ता है। इसके बाद पलवल में उतरते ही आगरा तक के लिए फिर से टोल अदा करना पड़ता है।
अब केजीपी शुरू होने के बाद सरकार को याद आया कि यह लिंक होना जरूरी था तो इस पर काम शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट अब यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जोड़ने पर विचार किया जा रहा है, जिससे वाहन चालकों को बड़ा लाभ इससे मिले। इसका लाभ केवल कुंडली से आने वाले वाहनों को नहीं मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश से आने वाले वाहनों के लिए भी रूट बेहद कारगर साबित होगा। इसके लिए यमुना एक्सप्रेस-वे पर एफ-वन रेसिंग ट्रैक के पास इंटरचेंज बनाया जाएगा। इंटरचेंज के लिए यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसे बनाने का जिम्मा यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी को सौंपा गया है। इसके बन जाने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना सिटी में रहने वाले लोग यमुना एक्सप्रेस-वे से केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) पर आसानी से आ जा सकेंगे।
वहीं, जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा। अभी तक यमुना एक्सप्रेस -वे से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचने के लिए लोगों को सिरसा में बने इंटरचेंज पर पहुंचने के लिए करीब 11 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वह भी गांव के रास्ते से होकर, जिस पर छोटे वाहन तो जैसे-तैसे आ-जा सकते हैं, लेकिन भारी वाहनों के लिए यह रूट आसान नहीं है। केजीपी से जुड़ाव के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी से पलवल, सोनीपत, बागपत, फरीदाबाद आने-जाने वाले लोगों को फायदा होगा। इसके अलावा, यमुना एक्सप्रेस-वे से आगरा, मथुरा, जेवर, अलीगढ़, हाथरस से पलवल, सोनीपत, बागपत, फरीदाबाद आने-जाने वालों को लाभ होगा।
कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी)
कुंडली सोनीपत से केजीपी के जीरो प्वाइंट से शुरू होकर यह प्रोजेक्ट झज्जर, गुरुग्राम और मेवात होते हुए पलवल में केजीपी के लिंक पर जाकर मिलता है। इस एक्सप्रेस-वे को राज्य सरकार ने दो टुकड़ों में बनाया है। पहले चरण में पलवल से मानेसर तक हाईवे का निर्माण किया गया, जो करीब छह माह से वाहनों के लिए खोला जा चुका है। दूसरे चरण में कुंडली के जीरो प्वाइंट से लेकर मानेसर तक का हाईवे बनाया गया है। यह भी करीब 135 किलोमीटर लंबा हाईवे है और इस पर चार रेलवे ओवरब्रिज, बड़े और छोटे 38 पुल, 9 मल्टी स्पैन अंडर पास, सात ओवर पास, 27 अंडर पास और 33 खेतों के लिए जाने के रास्तों पर अंडर पास बनाए गए हैं। इसी तरह पशुओं के लिए 31 अंडर पास, पैदल जाने के लिए 61 अंडर पास और ट्रक पार्किंग के लिए दो स्थल बनाए गए हैं। यह प्रोजेक्ट मूलरूप से 2004 में शुरू हुआ था और 2015 तक लटका रहा। अब इसका निर्माण कार्य पूरा किया गया है। तारकोल से बनाया गया यह हाईवे हरियाणवीं संस्कृति और कला का अनूठा उदाहरण भी बनेगा। इसके लिए हर दस किलोमीटर पर मूर्तियां लगाई गई हैं। इन्हें कलाकारों ने गढ़ा है और इसके जरिय संस्कृति की झलक राहगीरों को दर्शाने का प्रयास किया गया है, जिससे यहां से गुजरने वालों को प्रदेश की उन्नत संस्कृति और सभ्यता से रू-ब-रू कराया जा सके। कुंडली में डिजिटल आर्ट गैलरी बनाई गई है। इसमें 14 प्रोजेक्टर लगे हैं। इन पर केएमपी बनाने में इस्तेमाल की तकनीक के बारे में बताया गया है। इसके अलावा हरियाणा के इतिहार और संस्कृति की जानकारी भी इन प्रोजेक्टों के माध्यम से दी जा रही है।

कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी)
केजीपी प्रोजेक्ट के तहत सोनीपत के कुंडली से शुरू होकर यह एक्सप्रेस-वे गाजियाबाद व नोएडा होते हुए फरीदाबाद-पलवल तक जाता है। 135 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 3 बड़े पुल बनाए गए हैं। इनमें यमुना नदी का पुल, हिंडन नदी व आगरा कैनाल पुल शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में हरियाणा और यूपी का हिस्सा लगता है। इसमें जमीन अधिग्रहण पर लगभग 5900 करोड़ रुपये का खर्च आया है। प्रोजेक्ट में सोनीपत जिले का 13 किलोमीटर, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का करीब 20 किलोमीटर, गाजियाबाद का 25 किलोमीटर, नोएडा का 42 किलोमीटर और हरियाणा के फरीदाबाद का 36 किलोमीटर का क्षेत्र पड़ता है। इस हाईवे से सीधे तौर पर एनएच एक, 2, 24, 58, 91 का जुड़ाव हुआ है, तो यूपी के स्टेट हाईवे 57 का लिंक भी एक्सप्रेस-वे पर हो गया है। इस एक्सप्रेस-वे पर हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, वीडियो इंसीडेंट डिटेक्शन, एक्सेस कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। साथ ही करीब ढाई लाख पेड़ केजीपी पर लगे हैं। पूरा केजीपी का सिस्टम और लाइटिंग का काम सोलर पर है। ताकि बिजली की बचत की जा सके। हाईवे पर हर 500 मीटर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है तो हर 25 किलोमीटर पर टायलेट की सुविधा है। कुंडली से पलवल के बीच 8 इंटरचेंज व 4 फ्लाईओवर, 71 व्हीकल अंडरपास, 6 रोड ओवरब्रिज बनाए गए हैं। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से रोहतक, झज्जर, सोनीपत, बहादुरगढ़, मानेसर, गुरुग्राम, बावल, धारुहेड़ा, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ आईएमटी हरियाणा के मुख्य औद्योगिक शहरों को सीधा लाभ है। इनको आपस में जोड़ने के लिए दिल्ली या फिर गुरुग्राम से झज्जर के लिए बना नया रोड मुख्य भूमिका अदा करता है।


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