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माननीयों का व्यवहार

Posted On September - 15 - 2018

हरियाणा विधानसभा इस बार ‘माननीयों’ के व्यवहार की वजह से ‘शर्मसार’ होती नज़र आई। कांग्रेस और इनेलो विधायकों के बीच आपसी टकराव तो स्वाभाविक है, लेकिन इस बार जिस तरह से सदन में जूते तने और गालियां चलीं, वह अच्छे संकेत नहीं हैं। पूरे घटनाक्रम में सरकार की भूमिका को भी अच्छा नहीं कहा जा सकता। वैसे राजनीतिक रूप से देखा जाए तो भाजपाइयों को इनेलो और कांग्रेस नेताओं की यह लड़ाई रास आ रही थी। कहने वाले कह रहे हैं कि इस तरह की घटनाओं से आने वाले दिनों में सदन का माहौल और खराब हो सकता है।
‘बी’ टीम
कांग्रेसी अकसर इनेलो को भाजपा की ‘बी’ टीम कहते हैं। उधर, इनेलो वाले भाई लोग कांग्रेसियों पर आरोप लगाते हैं कि वे भाजपा के साथ मिलकर राजनीति कर रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दोनों ही स्थितियां सही हैं। मानसून सत्र में भाजपा और इनेलो जिस तरह से कई मुद्दों पर सुर मिलाते नज़र आए, उससे एक बार फिर ‘बी’ टीम का मुद्दा गरमा गया है। अब सरकार तो सरकार है। पहले तो सीएम ने दो-टूक कहा, हम न इनसे मिले हैं और न उनसे मिले हैं। हम जनता से मिले हैं, लेकिन जब दूसरी बैठक में बिल पास करने की बात आई तो स्पीकर चेयर इनेलो विधायक जाकिर हुसैन के हवाले कर दी गई। बेशक, इसमें गैर-कानूनी कुछ भी नहीं है, लेकिन यह बात हर कोई समझना चाह रहा है कि आखिर ऐसा करके क्या संदेश दिया गया।
काका का जवाब
मानसून सत्र से फारिग होते ही खट्टर काका ने अपने आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई और इसमें आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों की तैयारियों की रणनीति पर चर्चा की। पहली नवंबर को करनाल में महारैली करने का फैसला हुआ। अब भाजपा विधायकों को तो अपना दर्द बताने का मौका चाहिए। सो, बैठक में भी कुछ भाई लोगों ने अधिकारियों द्वारा सुनवाई नहीं करने का दुखड़ा सुनाया। कुछ विधायकों ने कहा कि जिलों के अधिकारी सुनवाई नहीं करते। बताते हैं कि इस पर काका ने सपाट-सा जवाब दिया – मेरी तो सुनते हैं। इस पर नाराज़गी जताने वाले माननीयों के पास चुप रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
लंच से दूरी
पलवल से कांग्रेस विधायक कर्ण सिंह दलाल का विधानसभा की कार्यवाही से एक साल के लिए निलंबन क्या हुआ, कांग्रेस के सभी विधायकों ने स्पीकर के लंच का बहिष्कार कर दिया। मंगलवार को मानसून सत्र में डबल सिटिंग थी। ऐसे में दोपहर भोजन का प्रबंध स्पीकर की ओर से किया गया। स्पीकर ने इसके लिए सभी विधायकों, अधिकारियों एवं पत्रकारों को लंच का न्योता दिया। जिस समय न्योता दिया, उससे कुछ मिनट पहले ही दलाल का निलंबन हुआ था। इस पर महम विधायक आनंद सिंह दांगी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि स्पीकर साहब इतनी बड़ी कार्रवाई करने का बाद लंच का भी न्योता दे रहे हैं। कांग्रेस विधायकों ने तो बहिष्कार किया अपने विरोध के तौर पर, लेकिन विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला भी लंच में शामिल नहीं हुए। वे लंच के लिए गए तो थे, लेकिन वहां जब सीएम व स्पीकर नहीं दिखे तो वापस आ गए। इनेलो के बाकी विधायकों ने व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
अकेले पड़े बाबा
दाढ़ी वाले कामरेड बाबा यानी अनिल विज इस बार विधानसभा में अकेले पड़ते नजर आए। वैसे तो बाबा जब आक्रामक होते हैं तो अकेले ही सब पर भारी पड़ते हैं, लेकिन पिछले कुछ सत्रों से वे कुछ ज्यादा ही शांत रहते हैं। उनके समर्थन में सबसे अधिक और बुलंद आवाज के साथ खड़े होने वाले उनके दोस्त यानी महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी इस बार सत्र में नहीं थे। उनकी माताजी के बीमार होने की वजह से वे सत्र में नहीं आए। पंडितजी की यह कमी न केवल बाबा, बल्कि सत्तापक्ष व विपक्ष के विधायकों को भी खली।
दो मंत्रियों की फील्डिंग
विपक्ष के नेता अभय चौटाला और पलवल विधायक कर्ण दलाल के बीच के झगड़े में सरकार के दो मंत्रियों की फील्डिंग काफी कारगर साबित हुई। जिस तरह से इन मंत्रियों ने पूरे मामले को हैंडल किया, उससे साफ दिख रहा था कि वे मामले को शांत नहीं होने देना चाहते थे। दलाल द्वारा कहे गए ‘कलंकित’ शब्द को इस कदर मुद्दा बनाया कि इसे प्रदेश और मातृभूमि के साथ-साथ किसानों और जवानों के मान-सम्मान से जोड़ दिया। हालांकि, ‘कलंकित’ शब्द को किसी भी तरह से असंसदीय नहीं माना जा सकता, लेकिन जब सियासत का तवा चढ़ा हो तो हर कोई उस पर रोटियां सेंकता है। सो, अपने भाई लोगों ने भी सेंकीं तो बुरा क्या है। अब यह तो अभय और दलाल को समझना था कि वे किस तरह से बुने हुए जाल में फंसते जा रहे हैं।
ताऊ का समर्थन
सांघी वाले ताऊ के खिलाफ गुरुग्राम में एफआईआर दर्ज होने के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि कांग्रेस में उनके विरोधी भी उनके साथ खड़े नज़र आ रहे हैं। पार्टी में अंदरखाने हुड्डा के साथ छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले साइकिल वाले प्रधानजी भी इस मामले में हुड्डा के साथ खड़े हैं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि हुड्डा के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से केस दर्ज हुआ है। यही नहीं, कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने भी पूर्व सीएम का खुलकर समर्थन किया है। वैसे कहने वाले तो कह रहे हैं, क्योंकि एफआईआर में राबर्ट वाड्रा का भी नाम है, इसलिए एफआईआर का विरोध करना इनकी मजबूरी है। अब कोई इसके भी राजनीतिक मायने निकालने लग जाए तो क्या किया जा सकता है।
-दिनेश भारद्वाज


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