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फोटो प्रेम

Posted On September - 20 - 2018

भाजपाई लोग इन दिनों बड़े परेशान हैं। कुछ हद तक परेशानी जायज भी है। विभाग का मंत्री चाहे कोई भी हो, जब कभी अखबारों और चैनलों पर विज्ञापन की बात आती है तो फोटो ‘खट्टर काका’ का ही दिखता है। वैसे इस बात पर मंत्रियों की नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी है। कुछ दिन तक तो सही चला। पब्लिक रिलेशन के विज्ञापनों में संबंधित मंत्रियों के फोटो प्रकाशित होने लगे, लेकिन अब फिर ‘बड़े साहब’ ही नजर आते हैं। बेशक, सुप्रीमकोर्ट के आदेश हैं कि विज्ञापनों पर एक से अधिक फोटो नहीं लगेंगे, लेकिन यह ‘एक’ विभाग का मंत्री भी तो हो सकता है। अब भाई लोग एक ही मुद्दे पर बार-बार नाराजगी जताते या बात रखते सही भी नहीं लगते। सो, अब ‘जो हो रहा है, सही हो रहा है’ वाले हालात हैं और भाई लोगों ने इसे स्वीकार करना भी सीख लिया है।
इनेलो में ‘संग्राम’
इनेलो में चाचा-भतीजे के संबंधों को लेकर चल रही कानाफूसी अब सार्वजनिक होने लगी है। बेशक, दोनों ही ओर से किसी भी तरह के मतभेद या मनभेद नहीं होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पार्टी के अंदर-बाहर चर्चा है, उससे लगता है कि सबकुछ ठीक नहीं है। कैथल और दादरी की घटना के बाद तो यह बात और भी तेजी से फैलने लगी है। कैथल में एक वर्कर को केवल इसलिए झाड़ पड़ गई कि उसने इनसो अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला का कार्यक्रम चंडीगढ़ मुख्यालय की मंजूरी के बिना कर लिया। दादरी में भी एक वर्कर को इसी तरह की फटकार झेलनी पड़ी। ये दोनों पूर्व सांसद अजय चौटाला के समर्थक बताए जाते हैं। दादरी के भूपेंद्र बौंद का तो वीडियो वायरल हो गया, जिसमें पुराने खासकर अजय समर्थकों के साथ पार्टी में अच्छा व्यवहार नहीं होने की बात कही जा रही है।
गृह में ग्रह
राज्य में जिस तरह से अपराधों की ग्रहचाल बिगड़ी है, उससे गृह मंत्रालय वाले िचंतित हैं। बात चाहे गैंगरेप की हो या फिर सरेआम हत्या की, बदमाश बेखौफ हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों से कहा तो यही जा रहा है कि शिकायत के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज होगी, लेकिन आए दिन ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जिनमें कई-कई दिन तक पुलिस केस दर्ज नहीं करती। रेवाड़ी में छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में भी तो नीचे से लेकर ऊपर तक ढिलाई और लापरवाही बरती गई। खुलकर बेशक कोई न बोलें, लेकिन अब तो दबी जुबान में काका के मंत्री भी कहने लगे हैं कि अपराध पर कोई बात न करें। मामला गृह मंत्रालय का है और इस पर गृहमंत्री ही बयान दें तो अच्छा है। हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बेबाक टिप्पणी और ट्वीट करने वाले अपने दाढ़ी वाले कामरेड बाबा भी इस तरह के मामलों में चुप्पी ही साधे रखते हैं। इस हालात पर तो यही कहा जा सकता है कि भाई लोग भी टिप्पणी न करने के बहाने यही बताना चाहते हैं कि गृह मंत्रालय काका के पास ही है। सुनने में यह भी आया है कि किसी पहुंचे हुए पंडित से ग्रहचाल भी दिखाई गई है। गृह में कुछ ग्रहों के वक्री होने की आशंका है। अब इस दोष का निवारण भी कोई पहुंचा हुआ पंडित ही बताएगा।
पुरानी बातें
पिछले दिनों रोहतक के भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों एवं प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई। मिशन-2019 की तैयारियों को लेकर इसे अहम बताया गया। बैठक में पार्टी व सरकार के अधिकांश कर्ता-धर्ता मौजूद रहे। अपने दिल्ली वाले लालाजी यानी प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन भी रोहतक पहुंचे हुए थे। ऐसी बैठकों में नेता अपना दर्द बयां न करें, यह नहीं हो सकता। सो, इसमें भी कहा-सुना तो बहुत कुछ गया, लेकिन अब ये बातें गौण हो गई हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सुनाई उसे जाती है, जो सुनने को तैयार हो। अब इन बातों का कोई मतलब नहीं रह गया। बैठक में हुई चर्चा पर जब मंत्रीजी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें तो इन बैठकों में भाग लेते हुए दशकों हो गए। वही, चालीस साल पुरानी बातों पर चर्चा होती है। पार्टी को बूथ तक मजबूत करना है। लोगों के बीच जाकर काम करना है। केंद्र व राज्य की नीतियों को पहुंचाना है। वे तो यहां तक टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटे – अब बैठकों में जाने का कोई क्रेज नहीं रहा। जाते केवल इसलिए हैं कि जाना है।
एक्सटेंशन बनाम रिटायरमेंट
खाकी वाले बड़े साहब के प्रति खट्टर काका का उमड़ता ‘प्रेम’ पुलिस के कई आला अफसरों को रास नहीं आ रहा। साहब की रिटायरमेंट 30 सितंबर को होनी है और काका संधू साहब को एक्सटेंशन दिलाने की फिराक में हैं। केंद्र को पत्र भी लिखा जा चुका है। बताते हैं कि इस बड़ी कुर्सी के लिए लॉबिंग में जुटे भाई लोगों में से किसी ने ऐसा जुगाड़ फिट किया कि संधू साहब की ‘रिटायरमेंट’ की चिट्ठी जारी हो गई। पूरी सरकार इससे हिल गई। खुद संधू साहब भी हैरान और परेशान दिखे। सीधे ही गृह सचिव के पास जा पहुंचे। बताते हैं कि बड़ी मशक्कत से छह घंटे बाद रिटायरमेंट वाली चिट्ठी को वापस करवाया गया। पूरे घटनाक्रम में यह बात समझ से परे है कि क्या सरकार में एक भी ऐसा शख्स नहीं, जो बार-बार हो रही सरकार की फजीहत को बचा सके। जब एक्सटेंशन दी ही जानी है तो फिर रिटायरमेंट की चिट्ठी जारी कैसे हो गई। अब जब चिट्ठी निकल ही गई तो इसके पीछे शामिल चेहरों से भी तो पर्दा हटना चाहिए, लेकिन नहीं। बस चिट्ठी वापसी के आर्डर जारी करके इतिश्री हो गई।
चिट्ठी-चिट्ठी का खेल
पलवल वाले कांग्रेस विधायक कर्ण सिंह दलाल और विपक्ष के नेता अभय चौटाला के बीच हुआ जूता प्रकरण विधानसभा से निकल कर सड़कों, पुलिस थानों, कोर्ट-कचहरी और जनता के बीच तक जा पहुंचा है। अब दलाल साहब को तो मौका चाहिए था, जो अपने बिल्लू भाई ने उन्हें दे दिया। उसी दिन से चिट्ठी-पे-चिट्ठी लिखी जा रही है। आधा दर्जन से अधिक खत दलाल अभी तक लिख चुके हैं। चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत देने के साथ-साथ बसपा सुप्रीमो एवं यूपी की पूर्व सीएम कुमारी मायावती को भी पत्र लिखा जा चुका है। पटियाला कोर्ट में भी दलाल अपील दाखिल कर रहे हैं। खबरें तो यह भी हैं कि तिहाड़ जेल के महानिदेशक, दिल्ली के गृह सचिव, डीजीपी सहित और भी कई बड़े अधिकारियों को दलाल ने पत्र लिखा है। अपने बिल्लू भाई भी कम थोड़े ही हैं। लोगों के बीच जाकर पूछ रहे हैं – मैंने जूता दिखाकर ठीक किया ना। अब समर्थक तो समर्थक हैं। उन्हें अच्छे-बुरे से क्या मतलब। वैसे भी जब बड़े साहब कुछ पूछें तो हां में ही जवाब देना होता है। सो, अपने लोकदल वाले वर्कर भी बिल्लू भाई को यही कह रहे हैं, आपने बिल्कुल सही किया।
और आखिर में बड़े ताऊ का इंतजार
सिरसा वाले बड़े ताऊ यानी पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला को पैरोल नहीं मिल पाई है। उनके समर्थकों व इनेलो पार्टी वर्करों को उनके बाहर आने का इंतजार था। इंतजार इसलिए भी था कि सभी को लगता था कि इस बार ताऊ की कड़क आवाज उन्हें गोहाना के सम्मान दिवस समारोह में सुनने को मिलेगी। तैयारियां तो इनेलो के कर्ता-धर्ताओं ने भी पूरी की हुई थी, लेकिन सब धरी रह गई। फिलहाल तो पार्टी दिग्गजों व वर्करों के हाथ केवल इंतजार आया है। करते रहिए।
-दिनेश भारद्वाज


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