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नेक सलाह

Posted On September - 6 - 2018

हरियाणा की संस्कृति भी बड़ी गजब की है। कौन, कब, कहां, किसको क्या सलाह दे दे कुछ कह नहीं सकते। ताजा सलाह बड़ी दिलचस्प और गुदगुदा देने वाली है। गुरुग्राम में पिछले साल ऐसा ‘महाजाम’ लगा कि दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक हिल गया। बड़ी योजनाएं बनीं, लंबे-चौड़े दावे हुए। अब इंद्र तो देव हैं, उन्हें सरकारों से क्या सरोकार। पिछले दिनों हुई बारिश से यह शहर फिर जलमग्न हो गया। जाम भी लगना ही था। इस पर वक्त के मारे और एक बेरोजगार भाजपाई ने सलाह दी है कि सरकार तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में ‘नौकायन’ का नया ट्रेड शुरू करे। ऐसी विकट परिस्थिति में लोग कम से कम नावों के जरिये तो इधर-उधर आ-जा सकेंगे। और यह तो ऐसी सर्विस है, जिसके लिए न तो डीजल-पेट्रोल की जरूरत ही न परमिट की।
अपनों से भी पर्दा
काका की सरकार को 4 साल होने को हैं। खट्टर काका के दिमाग में क्या चल रहा होता है, ये पार्टी व सरकार के दिग्गजों को तो क्या उनके खासमखास मंत्रियों तक को नहीं पता होता। वैसे आजकल काका कुछ ज्यादा ही सस्पेंस बनाकर चलने लगे हैं। सरकार और संगठन के मंथन शिविर को लेकर काका ने आखिरी पल तक पर्दा डाले रखा। मंत्रियों तक को खबर नहीं थी कि चिंतन शिविर में उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। कुछ भाई लोग इस बात से नाराज भी हैं। एक मंत्रीजी तो यहां तक कहने लगे कि काका को 8 से कुछ ज्यादा ही प्रेम हो गया है। कभी रात को 8 बजे कैबिनेट बुला लेते हैं, कभी मंत्रियों को सुबह 8 बजे अपने यहां तलब कर लेते हैं। पर काका को भला इन बातों से क्या मतलब, वह तो ठहरे फक्कड़।
आयरन लेडी
आपने लौह पुरुष बल्लभ भाई पटेल और आयरन लेडी इंदिरा गांधी के बारे में तो सुना ही होगा। क्या कोई हरियाणा की ‘आयरन लेडी’ को भी जानता है। हम भी नहीं जानते थे। चार रोज पहले ही पता लगा कि अपने आदमपुर वाले विधायक ‘कुल्लू भाई’ की पत्नी रेणुका बिश्नोई को उनके समर्थकों ने ‘आयरन लेडी’ के तौर पर प्रोजेक्ट किया है। उनका जन्मदिन था। दूसरे नेताओं की तरह उन्हें भी शुभकामनाएं देने वालों की होड़ लगनी ही थी। अब यह बात हर किसी की समझ से परे है कि उन्होंने ऐसा क्या और किससे लोहा ले लिया कि उनके समर्थकों ने उनको यह तमगा दे दिया। वैसे खट्टर काका ने कुछ माह पहले आदमपुर जाकर ‘कुल्लू भाई’ पर निशाना क्या साधा, चारों ओर से समर्थक बौखला गये थे। कहीं, इसलिए तो यह नया नामकरण नहीं हुआ…!
सिर पर सेहरा
प्रदेश की भाजपा सरकार 26 अक्तूबर को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे करेगी। इस मौके पर 28 अक्तूबर को सीएम सिटी करनाल में प्रदेश स्तर की रैली होगी। पीएम नरेंद्र मोदी को रैली में बुलाने की तैयारी है। करनाल में रैली करने के पीछे पूरी कहानी है। दरअसल, मोरनी के थापली फोरेस्ट गेस्ट हाउस में हुए चिंतन शिविर में सरकार की वर्षगांठ पर प्रदेश स्तर की रैली के जरिये शक्ति प्रदर्शन का सुझाव आया है। रैली के लिए कई शहरों के नाम पर चर्चा हुई। बताते हैं कि अपने ‘भाई लोगों’ ने बड़ी सहजता और चालाकी के साथ यह ‘मौका’ काका को ही दे दिया। अब काका करनाल से विधायक हैं और उनके निर्वाचन क्षेत्र में रैली हो रही है तो सेहरा भी उनके सिर ही बंधना था।
भरत मिलाप
राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं। यहां हमेशा कोई किसी का दोस्त या दुश्मन नहीं होता। दशकों पूर्व सिनेमाघरों में धूम मचाने वाले लावारिस फिल्म के गाने – कब के बिछड़े हम आज यहां आकर मिले.. ने खूब तालियां बटोरी थीं। यह गाना कैथल के विधायक रणदीप सुरजेवाला और कलायत वाले निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ‘जेपी’ की जुगलबंदी पर सही बैठता है। एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे ये दोनों नेता पिछले सप्ताह दिल खोलकर गले मिले। ऐसा मिलन कम ही देखने को मिलता है। न कोई गिला-शिकवा। कहा तो केवल इतना कि उत्तरी हरियाणा के हक के लिए एक हुए हैं। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि इस मिलने के पीछे जितनी जरूरत बताई जा रही है, उतनी ही मजबूरियां भी हैं।
सरकार ने भरा टोल टैक्स
मोरनी की पहाड़ियों में स्थित थापली फोरेस्ट रेस्ट हाउस में चिंतन शिविर के लिए ‘सरकार’ को उस समय अपनी जेल ढीली करनी पड़ी, जब मोरनी में एंट्री करने से पहले टोल प्लाजा आ गया। अब चूंकि इस शिविर को गुप्त रखा जा रहा था। सो, टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों को भी यह नहीं बताया गया कि बस में कौन बैठा है। सीएम सहित कैबिनेट के अधिकांश मंत्री व दिग्गज रोडवेज की वॉल्वो बस में सवार थे। टोल प्लाजा आने के बाद एक मंत्रीजी ने अपनी जेब से टोल टैक्स भरा। अब कहने वाले कह रहे हैं, अगर सभी टोल प्लाजा पर इसी तरह साहब लोग टोल चुकता करना शुरू कर दें तो शायद उन्हें जनता की समस्या का भी पता लग जाए।
विपक्ष को भाये पंडितजी
महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी की मेहनत को भाजपा ने भले ही नहीं समझा, लेकिन विपक्षियों को उनके वजूद का अच्छे से पता है। तभी तो भाजपाइयों से अधिक विपक्षी पंडितजी के चेहरे के नाम पर लोगों को रिझा रहे हैं। संचार विभाग वाले कांग्रेसी नेताजी यानी रणदीप सुरजेवाला ने तो खुलकर कह दिया है कि भाजपा ने वोट तो पंडितजी का चेहरा दिखाकर मांगे और बाद में मुख्यमंत्री उनसे जूनियर को बना दिया। सत्ता में आने के बाद ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन का भी वादा नेताजी ने कर डाला है। वैसे अब जिस तरह से जाति आधारित सियासत ने प्रदेश में जोर पकड़ा है, उसे देखते हुए यह लगने लगा है कि आने वाले चुनावों में भी यह मुद्दा हावी हो सकता है।
आखिर में आंकड़ेबाजी
इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला भी किसी आरटीआई एक्टिविस्ट से कम नहीं रहे हैं। हर 15-20 दिन में आरटीआई से जानकारी जुटाकर कोई न कोई पटाखा फोड़ देते हैं। अपने दाढ़ी वाले मंत्रीजी के मंत्रालय में दवाइयों व उपकरणों की खरीद में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश कर चुके दुष्यंत युवाओं पर भी पूरा फोकस किए हुए हैं। उनके द्वारा उठाया लोकसेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की नौकरियों में आवेदन शुल्क का मुद्दा छाया हुआ है। बात सही भी लगती है। जब नौकरी मुट्ठीभर लोगों को मिलनी है तो उसके लिए हजारों युवा क्यों अपनी जेब ढीली करें।

-दिनेश भारद्वाज


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