4 करोड़ की लागत से 16 जगह लगेंगे सीसीटीवी कैमरे !    इमीग्रेशन कंपनी में मिला महिला संचालक का शव !    हरियाणा में आर्गेनिक खेती की तैयारी, किसानों को देंगे प्रशिक्षण !    हरियाणा पुलिस में जल्द होगी जवानों की भर्ती : विज !    ट्रैवल एजेंट को 2 साल की कैद !    मनाली में होमगार्ड जवान पर कातिलाना हमला !    अंतरराज्यीय चोर गिरोह का सदस्य काबू !    एक दोषी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 17 को !    रूस के एकमात्र विमानवाहक पोत में आग !    पूर्वोत्तर के हिंसक प्रदर्शनों पर लोकसभा में हंगामा !    

‘लाटसाहब’ के वारंट

Posted On August - 30 - 2018

पुराने ‘लाटसाहब’ को हरियाणा राजभवन से विदा करवाने वाले भले ही खुश होते रहें, लेकिन साहब को तो यह ‘विदाई’ भी रास आ गई है। प्रो. साहब हरियाणा में 4 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे। उनके पास एक और साल बचा था, लेकिन कुछ ‘चाहनेवालों’ की कोशिश के चलते वे समय से पहले ही यहां से रुखस्त हो गए। मगर उनके ताजा वारंट से कइयों को तगड़ा ‘झटका’ लगा है। साहब की त्रिपुरा में ट्रांसफर नहीं हुई, बल्कि नयी पोस्टिंग है। वह भी पूरे पांच साल के लिए। खाटी संघी संस्कृति वाले प्रो. साहब को ‘संघी भाइयों’ ने बड़ा सोच-समझ कर ‘नयी-नवेली’ त्रिपुरा की सरकार के यहां भेजा है। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि आज के दिन मध्यप्रदेश का पूरा संघ त्रिपुरा में ही सक्रिय है। ऐसे में साहब की वहां खूब जमने वाली है। अब यहां वालों के पास तो गालिब दिल बहलाने को बस ‘विदाई’ का बहाना ही काफी है।
काका का ट्राईसिटी प्रेम
अपने खट्टर काका इन दिनों ट्राईसिटी के दीवाने हैं। मंचों पर साफ कहने लगे हैं अभी तो चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली के विकास की योजना बनी है। इसे केंद्रीय गृह मंत्री तक लेकर जाएंगे। कोई न कोई प्रोजेक्ट लेकर आना है। यूं तो काका करनाल, गुरुग्राम व पंचकूला में भी डेवलेपमेंट पर खासी नजर रखे हुए हैं, लेकिन अब ट्राईसिटी का प्रेम राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।
स्वामी की ‘चालीसा’
भाजपा सरकार और पार्टी संगठन ने भी तमाम कोशिश की कि रोहतक में आयोजित अटल की सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में किसी तरह की राजनीति न हो, लेकिन जब किसी को यह ‘कीड़ा’ काट जाए तो उसे रोक पाना मुश्किल होता है। भाजपा और संघ से नजदीकियां रखने वाले एक ‘धर्म स्वामी’ को बोलने का मौका क्या मिला, उन्होंने मोदी से लेकर योगी और खट्टर तक की ‘चालीसा’ पढ़ डाली। शायराना हुए स्वामी ने कहा- ‘महफिल में अंधेरा होगा मेरे जाने के बाद, या नहीं-नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा। कभी कोई मोदी होगा, कभी कोई योगी होगा, कभी कोई खट्टर होगा मेरे जाने के बाद।’ कहने वाले कह रहे हैं कि भगवा वाले इन स्वामीजी को भी राजनीति का ‘चस्का’ लग चुका है। साहब चुनाव लड़ने की भी योजना बना रहे हैं। लोकतंत्र में ये अधिकार सभी का है, लेकिन हर मंच राजनीति के लिए तो नहीं होता। अब कोई रोके भी तो कैसे।
‘खाकी’ का जलवा
सूचना आयोग के चीफ बने अपने ‘खाकी’ वाले साहब के रौब में कोई कमी नहीं आई है। पहले की तरह सुरक्षा के पूरे तामझाम साथ लेकर चलते हैं। सिक्योरिटी का प्रबंध दफ्तर में भी है और कोठी पर भी। अब साहब पुलिस के मुखिया रहे हैं तो कोई यह पूछने वाला भी नहीं है कि अभी तक भी अपनी पुलिस के ब्लैक कमांडो कैसे साथ चल रहे हैं। आयोग के चीफ तो पहले भी बहुत रहे, लेकिन ऐसा जलवा किसी का देखने को नहीं मिला। ताजा-ताजा आयोग में आए अपने एक आईएएस साहब भी इसमें पीछे नहीं हैं। वे भी सिक्योरिटी साथ लेकर चलते हैं। किसी ने ठीक ही कहा है, अपने लोकसेवा आयोग वाले ‘भाई लोगों’ को नकल ही करनी थी तो अपने इन चीफ साहब की करते। बेचारे ‘जूनियर’ कर्मचारी चयन आयोग वाले ‘भाई लोगों’ की सिक्योरिटी और एचपीएससी वालों के चक्कर में जाती रही।
बड़े साहब का खत
अपने गृह विभाग वाले बड़े साहब ने पुलिस मुखिया को खत क्या लिखा, पूरी सरकार हिल गई। इस खत से ही पता लगा खाकी वाले संधू साहब अपनी मर्जी से ही हरियाणा पुलिस सेवा (एचपीएस) के अधिकारियों को बदल देते हैं। वैसे तो साहब के पास इंस्पेक्टर तक बदलने के ही अधिकार हैं। अब ये ‘खेल’ कैसे हो गया, पता ही नहीं। गृह विभाग वाले ‘सेठजी’ को जब इसकी भनक लगी तो तुरंत लम्बी-चौड़ी चिट्ठी लिख डाली। मामला सरकार तक भी पहुंच गया। बताते हैं काफी ‘हंगामा’ हुआ। वैसे इसके बाद भी साहब को अगर आने वाले दिनों में तीन महीने की एक्सटेंशन मिल जाए तो आपको हैरान होने की जरूरत नहीं है। ये सरकार है और इसमें सब ‘जायज’ है।
और क्लीन-चिट
दाढ़ी वाले कामरेड बाबा यानी अनिल विज पिछले कुछ दिनों से काफी ‘दुविधा’ में हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि सिस्टम में हो क्या रहा है। सत्ता के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक दर्जनों मामलों की विजिलेंस जांच के आर्डर दे चुके हैं। कुछ मामले तो चौथे माले से नीचे ही नहीं उतर पाए। कुछ पंचकूला मुख्यालय तक पहुंचे तो अपने साथ ‘क्लीन-चिट’ लेकर पहुंचे। अब तो बाबा यहां तक सोचने लगे हैं कि कहीं कोई उनसे ही तो गड़बड़ नहीं हो गई। पीजीआई रोहतक से जुड़े एक मामले की ताजा ‘क्लीन-चिट’ से तो बाबा काफी आहत भी हैं। अब तो कहने भी लगे हैं, यहां कुछ नहीं हो सकता।
छात्र संघ चुनाव
1996 में चौधरी बंसीलाल ने शैक्षणिक संस्थानों के चुनाव पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2014 में भाजपा ने सत्ता में आने से पहले शैक्षणिक संस्थाओं के चुनाव कराने का वादा किया था। अब सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराना चाहती है, जबकि छात्र संघ प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव की वकालत कर रहे हैं। यही नहीं, वे विधानसभा का घेराव करने की धमकी दे चुके हैं। सियासत के गलियारों में यह बड़ा मुद्दा है, क्योंकि सोशल मीडिया से ये ग्रुप सबसे अधिक जुड़ा है। ऐसे में कोई भी दल नहीं चाहेगा कि छात्र संघ के साथ बिगाड़ी जाए। बहरहाल, चुनाव सितंबर के अंत में होने हैं, इससे पहले चुनावी सिस्टम का ऊंट किस करवट बैठेगा यह समय बताएगा।
50 के बराबर एक वर्कर
अगले साल विधानसभा और लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में सभी पार्टियों को वर्करों की याद आने लगी है। सभी को ऐसे वर्कर चाहिएं, जो सोशल मीडिया से जुड़े हों। एक वर्कर ऐसे में 50 के बराबर होगा। ये समाज के बड़े वर्ग तक पहुंच रखेगा। ऐसे वर्करों की तलाश में बाकायदा स्कूल, कॉलेज और आईटीआई के बाहर ठेकेदारों का जमावड़ा लगने लगा है। कहते हैं पैसे कमाने हैं तो सोशल मीडिया से पार्टी के प्रचार का काम देखना होगा। पढ़ते भी रहना, साथ में कमाई भी होगी। पैसे की कड़की वाले युवा इन कथित ठेकेदारों की बातों पर सहमति जता चुके हैं।

-दिनेश भारद्वाज


Comments Off on ‘लाटसाहब’ के वारंट
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.