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जाटलैंड में काका

Posted On August - 9 - 2018

वैसे तो ‘खट्टर काका’ को गुरुग्राम सबसे ज्यादा रास आता है। चर्चा यह भी चली कि काका ‘साइबर सिटी’ को अपना चुनावी क्षेत्र बनाना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। दो-टूक कहा कि करनाल को नहीं छोड़ेंगे। खैर, यह तो बात पुरानी हो गई। नया किस्सा यह है कि काका जाटलैंड में दस्तक देने जा रहे हैं। फसलों के समर्थन मूल्य में केंद्र द्वारा की गई बढ़ोतरी को भुनाने में जुटे काका प्रदेश में 4 बड़ी रैलियां कर चुके हैं। जाटलैंड में रैली करने का फैसला नया है। शुरुआत में इसका प्रस्ताव नहीं था। 12 को गोहाना में रैली करके किसानों को लुभाने की कोशिश करेंगे। इससे पहले अहीरवाल के महेंद्रगढ़ में बाजरा, जीटी रोड बेल्ट के शाहबाद में सूरजमुखी व घरौंडा में धान तथा बागड़ी बेल्ट के बरवाला (हिसार) में कपास रैली कर चुके हैं। अब ये रैलियां क्या रंग लाएंगी यह तो समय ही बताएगा।
ताऊ का रथ
संयोग ही होगा कि खट्टर काका, जहां अपने सांघी वाले ताऊ के गढ़ यानी ओल्ड रोहतक के गोहाना में 12 को रैली करेंगे तो उसी दिन ताऊ अहीरवाल के महेंद्रगढ़ में अपने लिए जमीन तलाशते नज़र आएंगे। ताऊ की जनक्रांति रथयात्रा इसी दिन महेंद्रगढ़ में पहुंचेगी। वे जिले के सभी हलकों में एक-एक दिन लगाने वाले हैं। वैसे अहीरवाल में रामपुरा हाउस वाले बड़े राव साहब की अच्छी-खासी पकड़ है। ताऊ और राव साहब के दोस्ताना संबंध भी किसी से छुपे नहीं हैं। यह बात अलग है कि 2014 में कांग्रेस छोड़ने से पहले राव साहब और ताऊ की काफी खटपट हो चुकी है, लेकिन राजनीति अपनी जगह है और रिश्ते अपनी जगह। ताऊ की रथयात्रा भी इस बार देखने वाली होगी। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि यह रथ चारों तरफ तो दौड़ रहा है, लेकिन जाटलैंड में अभी नहीं पहुंचा है। ताऊ ही बता सकते हैं कि रथ जाटलैंड कब आएगा।
पुरानी राह
काका की सरकार भी पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार की राह पर चल पड़ी है। 60 वर्ष तक सरकारी सेवाओं में रहने के बाद आईएएस अधिकारियों की ताजपोशी में काका भी पीछे नहीं हैं। बताते हैं कि इस बार एक आईएएस और एक आईपीएस को राज्य सूचना आयोग में एडजस्ट करने की तैयारी है। इससे भी रोचक यह है कि आयोग में सूचना आयुक्त के पद बाद में खाली होते हैं, उनके लिए विज्ञापन पहले जारी हो जाते हैं। योगेंद्र गुप्ता के रिटायर होने के साथ ही दो पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ। दूसरा पद अभी 24 अगस्त को समीर माथुर खाली करेंगे। जब 152 लोगों के आवेदन आ गए और चारों ओर से दबाव पड़ा तो 31 अक्तूबर को रिटायर हो रहे हेमंत अत्री वाली कुर्सी के लिए भी विज्ञापन जारी करने की तैयारी हो गई।
बताते हैं कि इस बार अपने पुलिस वाले बड़े साहब और गाने-बजाने के शौकीन आईएएस की लॉटरी लग सकती है। तीसरी पोस्ट पर किसी संघ वाले भाई साहब का नंबर लगना तय है।
पड़ोसियों को सुकून
सुरक्षा और वीवीआईपी प्रबंधों के चलते सुर्खियों में रहे पंचकूला के सेक्टर-6 में रहने वाले आईपीएस की यमुनानगर से बदली क्या हुई, पूरे मोहल्ले के लोगों ने सुकून की सांस ली। सरकारी कोठी को ‘अभेदद्य दुर्ग’ में बदल चुके साहब के घर के बाहर हमेशा पीसीआर रहती थी। जैसे ही बदली के आदेश आए, पीसीआर भी गायब हो गई। वैसे साहब ने अपनी चलती में कसर कोई नहीं छोड़ी थीं। कोठी के आगे की ही नहीं, पीछे की भी दीवारें इतनी ऊंची उठा दी थी कि पड़ोसी हवा को भी तरस गए थे। कभी बड़े साहब की सिक्योरिटी में रहे इन आईपीएस महोदय के ‘जुगाड़’ का हर कोई लोहा मानता है।
बिल्लू का गुस्सा
इनेलो वाले बिल्लू भाई साहब ने परिवार के मुखिया के जेल जाने के बाद पार्टी को तो बखूबी संभाला हुआ है, लेकिन वे अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पा रहे। कभी भी आग-बबूला हो सकते हैं। अब तो मीडिया भी उनके निशाने पर रहता है। परिवार में चाचा-भतीजे से जुड़ा सवाल आते ही वे बेकाबू हो जाते हैं। पिछले दिनों करनाल में भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक पत्रकार साथी ने सवाल क्या पूछ लिया, उसे ही अपना परिवार संभालने की नसीहत देने में जुट गए। अब भाई साहब को कौन समझाए न तो पहले वाला जमाना रहा और न ही मीडिया।
डॉक्टर साहब की परेड
चुनावी वर्ष में सरकार घोषणाओं में जुटी है और लोगों को गुस्सा निकालने का मौका मिल रहा है। अब पब्लिक तो पब्लिक है, उसे समझाए भी तो कैसे। नाराज़गी जताने के बहुत से तरीके हैं। अब हिसार के घटनाक्रम को ही ले लें। अपने ‘डॉक्टर साहब’ तो समर्थकों के साथ सड़क से गुजर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि पीछे से एकाएक हमला होगा। काले झंडे लेकर पहुंचे लोगों और महिलाओं ने परेड कराई सो कराई। अब तो वीडियो भी वायरल हो गया। गौभक्त नेताजी के साथ इस तरह का व्यवहार, अब पार्टी के दूसरे नेताओं की भी चिंता बढ़ा रहा है।
आखिर में पंडितजी के प्रवचन
महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी के काम निराले हैं। अब तो उनकी जुबान भी फिसलने लगी है। रोहतक में जाकर कह दिया कि जाट आंदोलन से निपटने में चूक हो गई। अपने पैतृक गांव राठीवास में साध्वी ऋतंभरा के प्रवचन का आयोजन किया। पंडित जी भी प्रवचन करने में नहीं चूकते। कई बार तो विधानसभा में ही शुरू हो जाते हैं। पंडितजी भाजपा में अकेले ऐसे नेता हैं, जिनके राज्य के सभी नब्बे हलकों में समर्थक और चाहने वाले हैं। राठीवास में हुई ‘अमृतवाणी’ का आनंद अपने बड़े साहब भी उठाने से नहीं चूके। समर्थकों की संख्या भी कम नहीं थी।
-दिनेश भारद्वाज


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