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बाबा रिटर्न

Posted On July - 19 - 2018

anil vij45अंबाला के दाढ़ी वाले कामरेड बाबा फिर से फॉर्म में लौट आए हैं। सत्ता के शुरुआती दिनों में सबसे मशहूर रहे बाबा बीच में कुछ ठंडे पड़ गए थे। अब फिर से उन्होंने गब्बर वाला रूप धारण कर लिया है। पानीपत और कैथल जिला की ग्रीवेंस कमेटी के प्रभारी मंत्री दाढ़ी वाले बाबा से भाजपाई वर्कर पूरी तरह से खुश हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और वर्करों की सुनवाई जो शुरू कर दी है। जिलों में जाते ही वे डीसी-एसपी से लेकर जिला के तमाम अधिकारियों को तलब करते हैं और पार्टी पदाधिकारियों एवं वर्करों को अपने साथ बैठाते हैं। पहले ग्रीवेंस कमेटी में लोगों की समस्याएं निपटाते हैं। फिर वर्करों से उनके काम पूछते हैं। अधिकारियों को खुद ही काम करने के आदेश देते हैं। साथ ही, ये निर्देश भी हैं कि अगर कोई वर्कर आए तो उसे अपने साथ बैठाएं और पूरा मान-सम्मान दें। एक चेतावनी भी होती है कि अगली बार मीटिंग में आऊंगा तो वर्करों द्वारा दिए गए काम का स्टेट्स चेक करूंगा। चूक हुई तो ठीक नहीं। अब वर्कर भी कहने लगे हैं -बाबा इज रिटर्न।
खाकी से प्रेम   
हरियाणा का मंत्री कार सेक्शन लम्बे समय से परेशान है और दुविधा में भी। मुख्यमंत्री से लेकर सभी मंत्रियों व आला अफसरों को सरकारी गाड़ियां यही सेक्शन मुहैया कराता है। कार तो सीएम काफिले में भी मंत्री कार सेक्शन की ही हैं, लेकिन ‘बड़े साहब’ को ये कार पसंद नहीं। आमतौर पर मंत्री कार सेक्शन की गाड़ी काफिले में तो होती है, लेकिन अपने साहब को पुलिस वाली कार में बैठना ज्यादा पसंद है। यह बात कार सेक्शन के लोगों को रास नहीं आ रही। दबी जुबान में कह रहे हैं हम तो फिर भी सैकड़ों मंत्री देख चुके हैं, लेकिन पुलिस वालों का ज्यादा ‘भरोसा’ करना कहीं साहब को आने वाले दिनों में भारी न पड़ जाए। वैसे यह पहला मौका है जब सत्ता के शीर्ष वाले ‘बड़े साहब’ को ‘खाकी’ से इतना प्रेम हुआ है।
मानसून में फसल राग   
मानसून की दस्तक के साथ ही सरकार भी लोगों के बीच दस्तक देने जा रही है। मानूसन में किसानों के बीच जाकर सरकार फसल राग अलापेगी। केंद्र द्वारा फसलों का समर्थन मूल्य लागत पर 50 फीसदी मुनाफे के साथ तय करने के फैसले को भुनाने में जुटी सरकार ने राज्य के चारों कोनों में रैलियां रखी हैं। शनिवार को अहीरवाल में बाजरा किसानों की रैली होगी। अगले ही दिन 22 को शाहबाद में सूरजमुखी किसानों को लुभाया जाएगा। 29 को घरौंडा में धान रैली और 5 अगस्त को बरवाला में कपास किसानों को साधने की कोशिश होगी। सरकार भले ही किसानों को खुशहाल करने का दम भर रही है, लेकिन किसान संगठन अब भी आंदोलन पर आमादा हैं।
बेचारे माननीय  
हरियाणा के माननीय इन दिनों काफी परेशान हैं। भाई लोगों को देने की आदत कम ही है। ऐसे में जब खाते से पैसे निकलेंगे तो परेशानी तो होगी ही। सरकार भी बड़ी बेदर्द और बेरहम निकली। जरा भी सुनवाई नहीं की। अपने स्पीकर साहब के आग्रह को भी ठुकरा दिया। अब साहब इससे ज्यादा मदद कर भी क्या सकते थे। मजबूरी है। अब तो भाई लोगों को आयकर का पैसा चुकाना ही होगा। सुना है, एक साथ रिकवरी करने की बजाय भाई लोगों ने किस्तों में अदा करने का सुझाव दिया है। इस पर तो सुनवाई हो ही सकती है।
चित भी संघ की और पट भी
हिसार वाले पायलट साहब का सीएमओ से जाना, संघी लोगों को रास नहीं आया। रोकने की तमाम कोशिशें हुईं, लेकिन जब हटवाने वालों में भी संघी भाई ही शामिल हों तो फिर कोई क्या कर सकता है। पायलट साहब को तो चेयरमैनी मिल गई, लेकिन करनाल के ‘सुपरमैन’ रहे अपने यूपी वाले भाई साहब की अब सीएम सिटी में एंट्री नहीं हो पाएगी। बताते हैं अपने पायलट भाई के ससुर को करनाल में सीएम कार्यालय का प्रभारी लगा दिया गया है। वे पुराने संघी बताए जाते हैं। इन घटनाक्रमों को भाजपाई कुछ अलग ही नजरिये से देखते हैं। कहते हैं, सरकार में चित भी संघ की और पट भी।
काका के मेहमान
महेंद्रगढ़ वाले बड़े पंडितजी ने चुनाव से पहले ऐसे-ऐसे वादे कर डाले, जो अब न लिए पड़ रहे हैं और न दिए। सांघी वाले ताऊ की सरकार के खिलाफ मोर्चे पर बैठे गेस्ट टीचर को दादा ने सत्ता में आते ही पहली कलम से पक्का करने का ऐलान कर डाला। जब से खट्टर काका सत्ता पर काबिज हुए हैं, इनसे निपटने के लिए बार-बार कलम चला रहे हैं। अब तो वेतन भी बढ़ा दिया, लेकिन शिक्षक हैं कि माने नहीं मान रहे। बात दिल्ली तक पहुंच गई है। भाजपा मुख्यालय के बाहर डेरा डाला हुआ है। मानो, मास्टरजी ‘काका’ के स्थायी मेहमान हो गए हैं।
भाजपाई ‘सद्दाम’
साइबर सिटी वाले विधायकजी का नया नाम सामने आया है। गत दिवस हरियाणा सिविल सचिवालय में जब माननीय पहुंचे तो एक मंत्री ने उनका स्वागत – ‘आइए मेरे सद्दाम’ कहकर किया। वैसे हुक्का गुड़गुड़ाने के शौकीन अपने विधायक जी के बहुत किस्से हैं। अब यह सद्दाम की कहानी समझ से बाहर है। मंत्रीजी को भी खूब टटोला, लेकिन उन्होंने सद्दाम का राज नहीं खोला। अब तो अपने गुरुग्राम वाले छोटे राव साहब ही इससे पर्दा उठा सकते हैं।
टिकट बचाओ मुहिम
भाजपा के एक अंदरूनी सर्वे से कई विधायकों की नींद उड़ी हुई है। बताते हैं कि तीन दर्जन नये चेहरे मैदान में उतारने की योजना चल रही है। अगर यह सही है तो मौजूदा 47 विधायकों में से लगभग एक दर्जन को ही टिकट मिलेगा। ऐसे में अब भाई लोग टिकट बचाओ मुहिम में जुटे हैं। हलके में भी सक्रियता बढ़ा दी है और वर्करों की भी सुनवाई करने लगे हैं। पार्टी से लेकर संघ तक में अपने-अपने आकाओं के यहां गणेश परिक्रमा जारी है। अब बोलने वालों को तो कोई रोक नहीं सकता। एक भाई साहब ने कह ही दिया, 2014 में तो ‘अड़ोस-पड़ोस’ के लोगों को टिकट देकर बात बनी थी। अब इतने नये चेहरे कहां से लाएंगे।

-दिनेश भारद्वाज


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