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सड़क दुर्घटनाएं रोकने को कारगर पहल

Posted On May - 22 - 2017

अनूप भटनागर
Gavel, Alcoholic Drink and Car Keysभारत में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनायें होती हैं, जिनमें कम से कम डेढ़ लाख व्यक्ति अपनी जान गंवा देते हैं। इन दुर्घटनाओं में शराब के नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाने की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। शायद इसीलिये पिछले साल दिसंबर में उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों से शराब की दुकानों को हटाने और उन्हें कम से कम पांच सौ मीटर दूर करने का आदेश दिया था।
‘भारत में सड़क दुर्घटनायें-2015’ के अनुसार इन दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण सर्वाधिक हादसे हुए। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार 2015 में वाहन चालकों की गलती के कारण हुई 3,86,481 सड़क दुर्घटनाओं में से 2,40,463 दुर्घटनायें तेज रफ्तार से वाहन चलाने की वजह से हुईं, जिनमें 64633 व्यक्तियों की मृत्यु हुई। यदि इन दुर्घटनाओं में शराब के नशे या मादक पदार्थों के सेवन का योगदान देखा जाये तो कुल 5,01,423 दुर्घटनाओं में इनकी भागीदारी 16298 हादसों में रही। एक तथ्य यह भी है कि राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में 2012 में 48768 व्यक्ति मारे गये थे जबकि 2015 में इनकी संख्या बढ़कर 51204 पहुंच गयी थी। अकेले 2014 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर एक लाख 24 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें एक लाख 35 हजार लोग जख्मी हुए जबकि 46110 व्यक्तियों की मृत्यु हुई।
देश के विभिन्न हिस्सों में बन चुके एक्सप्रेस-वे पर भी 4208 हादसे हुए और इनमें 1802 व्यक्तियों की जान गयी और 4229 लोग जख्मी भी हुए लेकिन इसके बावजूद तेज रफ्तार के शौकीनों पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। केन्द्र सरकार इस तरह की दुर्घटनाओं के आंकड़ों के साथ समय-समय पर राज्यों के मुख्य सचिवों को परामर्श भेजकर उचित कदम उठाने की हिदायत देती रहती है।
मई, 2014 में भेजे गये इस तरह के परामर्श के अनुसार 2012 में करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख 38 हजार व्यक्ति मारे गये। इस दौरान शराब पीकर वाहन चलाने की वजह से 23979 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें 7835 व्यक्तियों की मृत्यु हुई और 23403 अन्य जख्मी हुए। वर्ष 2013 में भेजे गये इस तरह के एक परामर्श में कहा गया था कि 2011 में चार लाख नब्बे हजार सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख 42 हजार व्यक्ति मारे गये जबकि इनमें शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या 24655 थी, जिनमें 10553 व्यक्तियों की मृत्यु हुई और 21,148 व्यक्ति जख्मी हुए। इन आंकड़ों की पृष्ठभूमि में यह नितांत जरूरी हो गया है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के प्रति अधिक सख्ती की जाये।
सरकार इस स्थिति से निपटने के लिये कड़े कदम उठा रही है। इसमें शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पकड़े जाने की स्थिति में जुर्माने को बहुत अधिक बढ़ाना और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर जब्त करना जैसे कदम भी शामिल हैं। देश की शीर्ष अदालत ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्देश केन्द्र और राज्य सरकारों को दिये हैं। स्थिति यह है कि जहां एक ओर बिहार सरीखे राज्य अपने यहां पूर्ण नशाबंदी लागू कर रहे हैं वहीं कई ऐसे भी राज्य हैं जो अपने राजस्व में जबरदस्त कमी होने की दुहाई देकर कोई न कोई राहत चाहते हैं। न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को इस साल एक अप्रैल से राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के नजदीक शराब की बिक्री के लाइसेंस नहीं देने का निर्देश दिया था लेकिन कुछ राज्य इसका विकल्प खोजने में जुटे हुए हैं तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में महिलाओं ने आबादी वाले इलाकों में स्कूल और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानें खोलने की इजाजत देने के किसी भी प्रयास के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
शीर्ष अदालत के निर्देश एक अप्रैल से प्रभावी होने थे लेकिन 31 मार्च को इसके कुछ पहलुओं पर सवाल उठाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। इसमें न्यायालय के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए उसे ही न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से नीति तैयार करने जैसा बताने का प्रयास किया गया लेकिन न्यायालय ने सख्ती से कहा कि उसने अपने न्यायिक अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए किसी प्रकार की नीति नहीं बनायी है और न ही उसने विधायिका का काम अपने हाथ में लिया है। सवाल यह है कि राज्य के राजस्व की दुहाई देकर आखिर कब तक राज्य सरकारें जनता के भविष्य से खिलवाड़ करती रहेंगी? क्या राज्य सरकारें राजस्व से इतर विकास कार्यों के लिये कोई अन्य ठोस और रचनात्मक उपाय नहीं खोज सकतीं।
उम्मीद की जानी चाहिए कि केन्द्र और राज्य सरकारें कोई न कोई ऐसा रास्ता अवश्य खोजने का प्रयास करेंगी, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और नशे में वाहन चलाने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लायी जा सके। बेहतर होगा कि यातायात पुलिस अधिक मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाये।


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