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श्रीनगर से श्रीगणेश

Posted On May - 19 - 2017

सामने आया जीएसटी का चेहरा
Edit-1आखिरकार आजादी के बाद देश में आर्थिक सुधारों की सबसे बड़ी पहल की तस्वीर सामने आ गई है। जीएसटी के क्रियान्वयन को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर राजग सरकार ने तमाम बाधाओं को पार कर इसे एक जुलाई से लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है। यह महत्वाकांक्षी आर्थिक नीति ऐसे समय सिरे चढ़ रही है, जब केंद्र सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। सरकार इसका राजनीतिक श्रेय लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी, मगर प्रमुख विपक्षी दलों के सहयोग को नकारा नहीं जा सकता। बहरहाल, जीएसटी परिषद की निर्णायक बैठक के लिए अशांत श्रीनगर को चुनना कई प्रतीकात्मक संदेश दे गया। सबसे बड़े लोकतंत्र में इतने बड़े आर्थिक सुधार का उद्घोष श्रीनगर से पूरी दुनिया में जायेगा। संदेश कश्मीर के युवाओं और पृथकतावादियों को भी है कि भारतीय लोकतंत्र कश्मीर से कन्याकुमारी तक कितना सशक्त है। बहरहाल एक देश, एक टैक्स की पहल में यह राहतकारी है कि जीएसटी लागू हो जाने के बाद खाद्यान्न, मोटे अनाज और दूध सस्ता हो सकता है। बैठक में 1205 श्रेणियों की वस्तुओं की कर दरें तय हुईं। सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए जहां शिक्षा और हेल्थकेयर को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है, वहीं फाइनेंशियल सर्विसेस मसलन बैंक, बीमा आदि 18 फीसदी के दायरे में आने से महंगे हो जाएंगे। वहीं मोटरसाइकिल, कारों, निजी विमानों, लग्जरी नौकाओं, तंबाकू को जीएसटी की शीर्ष कर दरों में उपकरों के साथ निर्धारित किया गया है।
दरअसल, जिन 1205 वस्तुओं की कर दरों पर फैसला किया गया है, उनमें सात फीसदी वस्तुएं छूट की श्रेणी में, 14 फीसदी को पांच प्रतिशत कर श्रेणी में, 17 फीसदी को 12 प्रतिशत की श्रेणी में और 43 फीसदी को 18 फीसदी की श्रेणी में रखा गया। केवल 19 फीसदी को 28 फीसदी की उच्च कर श्रेणी में रखा गया। यह अच्छी बात है कि कुल 81 फीसदी से अधिक वस्तुएं 18 फीसदी से कम कर के दायरे में रहेंगी। एक देश, एक कर से उत्पादक व  उपभोक्ता को फायदा होगा। करों के दोहराव में कमी आएगी। अब देखना होगा कि सरकार जीएसटी को कितनी मुस्तैदी व पारदर्शिता के साथ लागू करवा पाती है। चुनौती महंगाई पर नियंत्रण रखने की  भी होगी। जीएसटी लागू होने से देश की विकास दर आठ फीसदी तक होने की संभावना जताई गई है और सकल घरेलू उत्पाद का आकार बढ़ने से भारत ग्लोबल रेस में आ जायेगा। साथ ही सबसे जटिल कर प्रणाली एक सरल कर प्रणाली में तबदील हो जायेगी। बहरहाल, सोने के प्रेमियों को इसके कर निर्धारण के बारे में जानने के लिए 3 जून की काउंसिल का इंतजार करना होगा।


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