भगौड़े को पकड़ने गयी पुलिस पर हमला, 3 कर्मी घायल !    एटीएम को गैस कटर से काट उड़ाये 12.61 लाख !    कुल्लू में चरस के साथ 2 गिरफ्तार !    बारहवीं की छात्रा ने घर में लगाया फंदा !    नेपाल को 56 अरब नेपाली रुपये की मदद देगा चीन !    इस बार अब तक कम जली पराली !    पीएम की भतीजी का पर्स चुरा सोनीपत छिप गया, गिरफ्तार !    फरसा पड़ा महंगा, जयहिंद को आयोग का नोटिस !    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रचार करेंगी मायावती !    ‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ !    

विकास की कूटनीति

Posted On May - 25 - 2017

चीन के जवाब में कई मोर्चे
विकास के रास्ते चीनी साम्राज्यवाद से भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम बड़े देश चिंतित हैं। महत्वाकांक्षी ‘वन रोड, वन बेल्ट’ के बहाने जिस तरह चीन सामरिक घेराबंदी कर रहा है, उसके निहितार्थ पूरी दुनिया समझ रही है। लिहाजा उसी की तर्ज पर कई मोर्चों पर जवाब देने की कवायद जारी है। अहमदाबाद में अफ्रीकन डेवलेपमेंट बैंक की सालाना बैठक को इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि भारत इस बैंक के प्रबंधन से तीन दशक पहले जुड़ा मगर यह पहला मौका है जब इसकी पांच दिवसीय सालाना बैठक भारत में हो रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत की विदेश व आर्थिक नीतियों में अफ्रीका की भूमिका हाल के वर्षों में बढ़ी है। मगर बदले हालात में भारत ने इसे प्राथमिकता में शामिल किया है। जिसके क्रम में प्रधानमंत्री ने तमाम महत्वपूर्ण अफ्रीकी देशों की यात्राएं भी कीं। अब भारत व जापान अफ्रीका के विकास के सहयात्री बनने को खासे उत्सुक हैं। जापान व भारत नयी वैश्विक कनेक्टिविटी के लिये अफ्रीका को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि चीन की ‘वन बेल्ट, वन रोड’ नीति का जवाब दिया जा सके। अफ्रीकन विकास बैंक की सालाना बैठक में जापानी उप-वित्तमंत्री की उपस्थिति को इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
वहीं भारत और अमेरिका भी चीन को जवाब देने के लिये एशिया में नया आर्थिक गलियारा बनाने की तैयारी में हैं। अमेरिका में हाल में जारी वार्षिक बजट में इस बात का जिक्र किया गया है कि चीन के आर्थिक गलियारे के मुकाबले न्यू सिल्क रोड परियोजना को नये सिरे से चढ़ाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल दक्षिण और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाली इस परियोजना में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है। इस परियोजना को शुरू करने की घोषणा बराक ओबामा के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चेन्नई में वर्ष 2011 में की थी। मगर ओबामा के दूसरे कार्यकाल में देशकाल परिस्थितियों के चलते योजना को मूर्त रूप देने के गंभीर प्रयास नहीं हुए। अब डोनाल्ड ट्रंप सरकार में इसे नये सिरे से चढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसे इंडो-पैसिफिक इकॉनाेमी कोरिडोर के नाम से पुकारा जायेगा जो दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया में साझे आर्थिक कार्यक्रम को गति देगा। इसके अंतर्गत व्यापार और निवेश से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जायेगा। इसके जरिये भारत, अफगानिस्तान व पड़ोसी देश इससे लाभान्वित होंगे। इस नये आर्थिक गलियारे का पूरा खाका सामने आना बाकी है। माना जा रहा है कि ऊर्जा जरूरतों की नयी संभावनाओं को भी गति मिलेगी।


Comments Off on विकास की कूटनीति
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.