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रूहानी की नयी कहानी

Posted On May - 22 - 2017

उदार ईरानी चेहरा भारत के हित में
लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने दुनिया के साथ बातचीत और विकास का रास्ता चुना है। कट्टरपंथी प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम रईसी को भारी मतों से परास्त कर ईरान के जनमानस ने भी दुनिया को बताया है कि देश तरक्की की राह पर जाना चाहता है। सही मायनो में पश्चिमी देशों के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते और तरक्की के रास्ते पर बढ़ने का प्रतिसाद ईरानी जनमानस ने दिया है। माना जा रहा है कि निर्णायक जनादेश उन्हें सुधार लागू करने तथा अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिये मिला है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में पश्चिमी देशों के प्रतिबंध से राहत और आर्थिक सहयोग के बदले ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक दिया था। दूसरे शब्दों में जनमानस ने इस फैसले पर अपनी मोहर लगाई है। इस बात की पुष्टि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामनोई के ट्विटर पर दिये बयान से होती है, जिसमें उन्होंने कहा है कि चुनाव परिणाम देश की बढ़ती प्रगति को दर्शाते हैं। युवाओं व महिलाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी व जीत के बाद जश्न इसी सोच का द्योतक है।
भारत के नजरिये से इस जीत के बड़े मायने हैं। हमेशा से उदार ईरानी नेतृत्व के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं। रूहानी की जीत भारत व भारतीय कंपनियों के लिये अच्छी खबर है। इससे अब भारत ईरान के साझा उपक्रम चाबहार बंदरगाह के काम में तेजी आ सकेगी। चाबहार के जरिये भारत अफगानिस्तान व मध्य एशिया से जुड़ सकेगा। भारत जापान व दक्षिण कोरिया का निवेश चाबहार के जरिये हासिल करने की जुगत में है। सही मायनो में इस महत्वाकांक्षी परियोजना से भारत को मध्य एशिया का दरवाजा मिल जायेगा। नये चुनाव परिणाम से निष्कर्ष निकालना कठिन नहीं है कि अगले चार सालों में भारत के ईरान से रिश्ते प्रगाढ़ होने वाले हैं। इसके भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। अफगानिस्तान व ईरान के साथ मिलकर पाकिस्तान की जमीन से पैदा किये जा रहे आतंकवाद का मिलकर मुकाबला किया जा सकता है। पाकिस्तान में पाले-पोसे जा रहे सुन्नी आतंकवादियों के खिलाफ पाक जमीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की चेतावनी पहले ईरान पाक को दे चुका है। पश्चिम के प्रति उदार रवैया रखने वाले रूहानी से उम्मीद है कि वे सऊदी  अरब के नेतृत्व में सुन्नी देशों को संरक्षण देने वाले व ईरान को आंखें दिखाने वाले ट्रंप प्रशासन से बेहतर तालमेल बना पायेंगे।


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