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पत्रिकाएं मिलीं

Posted On May - 20 - 2017

सृजन का स्मरण
अरुण नैथानी
12005cd _Image_ 00 (57)समकालीन लेखन को समर्पित प्रेरणा का ताजा अंक कवि प्रेमशंकर रघुवंशी को समर्पित है। उनके जीवन के पहलुओं व रचनाकर्म का विवेचन अंक में शामिल हैं। कुछ पल अंतरंग शीर्षक से विनीता रघुवंशी के लेख के अलावा रामकुमार कृषक, सूरज पालीवाल, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, विजय मोहन तिवारी आदि ने रघुवंशी जी के रचनाकर्म, साहित्य साधना और व्यक्तित्व को उकेरा है। उनकी कुछ अप्रकाशित कविताएं अंक को पठनीय बनाती हैं। साथ में सभी स्थायी स्तंभ शामिल हैं।
0पत्रिका : प्रेरणा 0संपादक : अरुण तिवारी 0प्रकाशक : प्रेरणा पब्लिकेशन, देशबंधु भवन, भोपाल     0पृष्ठ     संख्या : 162 0मूल्य : ~ 50.
रचनाक्रम के सरोकार
12005cd _Image_ 00 (53)अभिनव इमरोज के ताजा अंक में सभी स्थायी स्तंभों के अलावा डॉ. रमेश कुंतल मेघ के आलोचकीय कृतित्व पर संपादित ग्रंथ के अग्रलेख का विवेचन बलदेव वंशी ने किया है। अभिनव इमरोज के इस समीक्षा अंक में मेघ की कविताएं अलग आकर्षण हैं। इसके अलावा देश-विदेश के रचनाकारों की कविता-कहानी और विचारोत्तेजक लेख संकलित हैं। साथ की इतिहास व संस्कृति का मूल्यांकन करते लेख अंक को पठनीय बनाते हैं। ग्लेज पेपर पर प्रकाशित अभिनव इमरोज स्थापित व नवोदित रचनाकारों का संगम नजर आता है।
0पत्रिका : अभिनव इमरोज 0संपादक : देवेंद्र बहल 0प्रकाशक: 3223 वसंत कुज, दिल्ली 0पृष्ठ     संख्या : 46    0मूल्य : ~ 50.
साहित्य में श्रमिक
12005cd _Image_ 00 (54)नया ज्ञानोदय का ताजा अंक श्रमिक जीवन के आज के हालात पर केंद्रित है। साहित्य में मजदूर जीवन पर आधारित रचनाएं और कविताएं अंक में संकलित हैं। समीक्ष्य अंक में मजदूर आंदोलन का सच : संजीव, यह मशाल बुझ न जाए : अजय तिवारी, हिंदी कथाओं में झांकती उदास आंखें : वैभव सिंह, साहित्य में मजदूर की मौजूदगी : जीतेन्द्र गुप्ता, मई दिवस का अवसान अब समीप है : प्रियदर्श और हिंदी कविता में मजदूर खंड में शमशेर, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन,भगवत रावत व वीरेन डंगवाल की विचारोत्तेजक कविताएं संकलित हैं।
0पत्रिका : नया ज्ञानोदय 0संपादक : लीलाधर मंडलोई 0प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ,     नई दिल्ली  0पृष्ठ संख्या : 120 0मूल्य : ~ 30.
सूर काव्य का विवेचन
12005cd _Image_ 00 (56)नई पीढ़ी सूरदास के साहित्य से कम ही परिचित है। शायद इसी मकसद से हरिगंधा के ताजा अंक को सूरदास के साहित्य पर केंद्रित किया गया है। इस अंक में सूर का रामकाव्य, सूर के काव्य में हास्य व्यंग्य, आत्मोत्सर्गपूर्ण सूर रचनाएं, सूर की पद भाषा, सूर काव्य में बालमनोविज्ञान, प्रकृति चित्रण, सूरदास का सौंदर्यबोध, सूरदास की भक्ति भावना शीर्षकों से सूर काव्य की बानगी पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश हुई है। ऐसे दौर में जब नयी पीढ़ी भारतीय संस्कृति के प्रतीक रहे साहित्यकारों को भूल रही है तो सूर साहित्य को जीवंत बनाये रखने का यह प्रयास सराहनीय है।
0पत्रिका: हरिगंधा 0संपादक :     कुमुद बंसल 0प्रकाशक : हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला     0पृष्ठ     संख्या : 80     0मूल्य : ~ 15.
रचनाशीलता की तारिका
12005cd _Image_ 00 (55)डॉ. महाराज कृष्ण जैन की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुंचाने का काम उर्मि कृष्ण बखूबी निभा रही हैं। शुभ तारिका एक तरह से हरियाणा के नवोदित रचनाकारों का मंच बन गया है। पत्रिका के ताजा अंक में साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़े लेख लघुकथा, कविता कहानी, व्यंग्य शामिल हैं। ऐसे दौर में जब साहित्यिक पत्रिकाएं अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं तो पत्रिका का  नियमित प्रकाशन सराहनीय प्रयास है। वह भी साहित्यिक मानकों के अनुरूप रचनाओं का चयन व संपादन संपादक की जवाबदेही बढ़ा देता है।
0पत्रिका :     शुभ तारिका 0संपादक :     उर्मि कृष्ण 0प्रकाशक : कृष्णदीप, अंबाला छावनी 0पृष्ठ     संख्या : 34 0मूल्य : ‍‍~ 15.


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