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नारी अंतर्मन की व्यथा

Posted On May - 27 - 2017

शील कौशिक
12705cd _Image_ 00 (50)हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में विपुल साहित्य के रचयिता मधुकांत की ‘नारायणी’ सद्य: प्रकाशित नौवीं कथा-कृति है जिसमें विविध विषयक 16 कहानियां संगृहीत हैं। ये सभी कहानियां संवेदना के ताने-बाने से बुनी नारी के अंतर्मन की व्यथा कथाएं हैं। कहानी ‘दुर्गन्ध’ व ‘आस’ में नारी शोषण व रक्षक ही भक्षक बनी पुलिस व्यवस्था का यथार्थ चित्रण है। स्वार्थी युवा बेटों द्वारा विधवा मां की उपेक्षा व तिरस्कार की संवेदनशील व बहुत अच्छी कहानी है ‘तमगा’। दो बेटों की मां जमना ने फौजी पति की देश के लिए कुर्बानी पर गर्व करते हुए कभी वैधव्य को स्वीकार नहीं किया था परन्तु बेटे-बहुओं द्वारा पुश्तैनी ज़ायदाद व पति के तमगे को बेचने पर उसका मन हुआ कि वह अपने हाथ की चूड़ियां तोड़ डाले।
मन को सुकून देती प्रेरणादायक कहानी है ‘बरगद की बेटी’। बरगद की जड़ में फेंकी नवजात कन्या को जिस तरह पूरा गांव अपना कर पालने-पोसने की जिम्मेवारी लेता है, वह अनुकरणीय है। ‘झंडा’ कहानी में एक औरत की मजबूरी व रोटी के लिए जद्दोजहद का बखूबी चित्रण किया गया है। बौने कद के कारण तिरस्कार व उपहास का पात्र बनी लड़की कजली की कहानी है ‘बौनेपन का अहसास’। कजली अपनी अध्यापक मिस वर्मा के प्रोत्साहन व मदद से हीनता दूर कर यूनिवर्सिटी टाप करती है और मिस वर्मा को अपना आदर्श मानकर शादी न करने का फैसला करती है। सरल, आम बोल-चाल की सहज व पात्रानुकूल भाषा में लिखी ये कहानियां अपने समय व संदर्भ की तर्जबयानियां हैं।
0पुस्तक : नारायणी (कहानी-संग्रह) 0कथाकार : डॉ. मधुकांत 0प्रकाशन : नवशिला,    नई दिल्ली     0पृष्ठ     संख्या : 136 0मूल्य : ~ 350.


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