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दरकना आधार का

Posted On May - 21 - 2017

तिरछी नज़र

सहीराम
आधार को तो हमेशा मजबूत ही होना चाहिए जी। पर यह जो हमारा आधार है, जो हमारी पहचान है, वह इतना वीक है कि लीक हो जाता है। बात सिर्फ धोनी की नहीं है। उनके आधार का ब्योरा लीक हुआ और उनकी पत्नी ने शिकायत की तो हल्ला मच गया। पर इधर सुना है लाखों आधार के ब्योरे लीक हो गए। अभी तक पानी के पाइप लीक होने की बात ही सुनते थे। परीक्षाओं के पर्चे भी लीक होते हैं। बाहुबली जैसी फिल्म के ट्रेलर भी सुना है लीक हो जाते हैं। पर यहां तो जिसे मजबूत होना चाहिए वही लीक हो रहा है। हालत यह है साहब कि उधर मुंबई में तो लीक होने वाले नलों को ठीक करने के लिए एक अस्सी साल का बुजुर्ग व्यंग्यकार आबिद सुरती हर घर का दरवाजा खटखटाकर पूछता है-आपका नल लीक तो नहीं कर रहा, अगर कर रहा है तो मैं ठीक किए देता हूं। और यहां सरकार है कि लाखों आधार लीक होने पर भी चिंता नहीं सताती। वह आधार को नागरिक के हर काम का आधार तो बनाना चाहती है और सुप्रीम कोर्ट के बार-बार मना करने के बावजूद बनाना चाहती है पर उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं करती।
अब देखिए सरकार कह रही है चाहे आपको राशन लेना हो या गैस, आधार जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि नहीं, इतना भी जरूरी नहीं है साहब। सरकार कहती है-आपको चाहे स्कॉलरशिप लेनी हो या एडमिशन, आधार जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट मना कर-कर के इतना थक गया कि अब तो जैसे उसने मान ही लिया है कि सरकार जो करेगी, वह तो करेगी ही, मेरी कौन सुन रहा है। हथियार तो बड़े-बड़े धुरंधरों ने डाल दिए साहब जो यह कहते थे कि यह मेरी निजता पर हमला है। पर अगर यह सरकार को इतना ही प्रिय है तो इसे वीक क्यों रखा हुआ है, थोड़ी मजबूती दो न। आधार को तो वैसे भी मजबूत होना चाहिए। पर हो यह रहा है कि पहले बैंकों के लाखों क्रेडिट और डेबिट कार्डों की डिटेल्स लीक हुई और अब आधार की लाखों डिटेल्स लीक हो गयी। न उस लीक का कुछ हुआ और न ही इस लीक का कुछ हो रहा है। एक पाइप लाइन लीक होने का, एक पर्चा लीक होने का तो कुछ होता नहीं, लाखों डिटेल्स लीक होने का क्या होगा। जरूरत इस बात की है कि यह न लीक हो और न वीक हो। और आधार को तो साहब वैसे भी मजबूत होना ही चाहिए।


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