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तिरछी नज़र

Posted On May - 28 - 2017

खेवनहार की हार
सहीराम

ऐसे शुभ अवसर पर जब सरकार अपने तीन साल पूरे कर रही थी और इसका जश्न मनाने की तैयारी थी, तब पता नहीं कैसे यह अफवाह फैल गयी कि आईटी सेक्टर में लाखों नौकरियां जा रही हैं। आखिर सरकार को यह स्पष्ट करना पड़ा कि आईटी सेक्टर में नौकरियां नहीं जा रही हैं। इसका एक फायदा यह हुआ कि नौकरियां जाने के डर से हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के सरकार के वादे को किसी ने याद नहीं किया। सरकार को भी नौकरियां देंगे और जरूर देंगे टाइप की ललकार नहीं लगानी पड़ी। उसे बस यह आश्वासन देना पड़ा कि नौकरियां नहीं जा रही हैं। वैसे भी आईटी सेक्टर में नौकरियां जाने या बचाने के चक्कर में लोगों ने दूसरे किसी सेक्टर को याद ही नहीं किया।
पिछले कुछ वर्षों में यह हमारी सरकारों की उपलब्धि रही है कि उसने आईटी को नत्थूलाल की मूंछें बना दिया। जैसे मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी, वैसे ही नौकरी हो तो आईटी की। आईटी सिर्फ प्राइवेट सेक्टर का ही लाड़ला क्षेत्र नहीं था, सरकार का भी लाड़ला था। सरकार ने कभी यह दावे नहीं किए कि हमने सरकारी सेक्टर में इतनी नौकरियां दे दीं। वह हमेशा यही दावा करती रही कि हमने आईटी में इतनी नौकरियां पैदा कर दीं। गोया आईटी अपने बच्चे से भी प्यारा बच्चा था। आईटी खेवनहार था। आईटी का गुणगान बिल्कुल भगवान की तरह होता था। उसके सामने तो आईएएस और आईपीएस की नौकरियां भी पानी भरती थीं। आईटी की नौकरी वाले के सामने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को भी पिद्दी ही समझा जाता था। आईटी की नौकरी पाने के चक्कर में लोग सरकारी सेक्टर को भूल गए और सरकार को डाउनसाइजिंग मौका मिल गया। सरकारी सेक्टर के लाखों पद खत्म कर दिए गए। किसी ने चूं तक नहीं की। क्यों करते साहब? आईटी की नौकरी थी न।
आईटी सेक्टर की तारीफ सरकार इसीलिए तो कर रही थी। इस चक्कर में इतने बच्चे इंजीनियर बन गए कि एक कंकड़ भी उछालो तो वह इंजीनियर पर गिरता है। दस-बारह हजार पर आईटी प्रोफेशनल हायर किए जा रहे हैं। और अब तो उस पर भी ऐसा संकट मंडरा रहा है कि आईटी सेक्टर में लाखों नौकरियां जाने की बात होने लगी है। अच्छा किया सरकार ने जो स्पष्ट कर दिया कि आईटी सेक्टर की नौकरियां नहीं जा रही हैं। आईटी के बिना अपना कौन सहारा?


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