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ट्वीट का खेल

Posted On May - 26 - 2017

अराजकता की आजादी

कभी अनाम ट्रॉलरों की पसंदीदा पनाहगाह बना ट्विटर अब एक नए राष्ट्रीय हंटिंग ग्राउंड के रूप में सामने आया है जहां नाम और चेहरे खुलकर रोशनी में आते हैं, खासकर बड़ी-बड़ी हस्तियां भी इस खेल में पीछे नहीं। सोशल मीडिया पर इन ट्रॉलरों के शातिर बयान लंबे समय तक गर्मागर्म बहस का भी कारण बने रहे। इसमें अगर कोई नयी बात जुड़ी है तो यह कि इस खेल में बॉलीवुड के कुछ महारथियों ने शिरकत करनी शुरू कर दी है तथा ट्वीट की इस अंतहीन बेरहम लड़ाई में अपना दांव लगा रहे हैं। बॉलीवुड का जाना-माना चेहरा गायक अभिजीत एक आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण डिजिटल जगत की आंख की किरकिरी बना है। यह टिप्पणी उन्होंने जेएनयू की एक छात्रा शहला रशीद के खिलाफ की थी जो मानवाधिकारों के हक में अकसर आवाज बुलंद करती है। अभिजीत ने ऐसा ही उत्तेजनात्मक ट्वीट पहले भी किया था। एक महिला पत्रकार के खिलाफ गलत बयानबाजी ने उन्हें पहले भी मुश्किल में डाला था। यह दुखद तो है लेकिन आश्चर्यजनक कतई नहीं कि इस व्यक्ति को अपने किए पर न तो पश्चाताप है और न ही ग्लानि। बॉलीवुड की ही एक अन्य शख्सियत सोनू निगम को अभिजीत के साथ इसलिए सुर में सुर मिलाने पड़े क्योंकि ‘अजान’ को लेकर उनकी अकारण नाराजगी ने उन्हें खबरों में ला दिया था। जिस रोष तथा क्रोध में उन्होंने ट्विटर को अलविदा कहने की बात कही, उनका वह लहजा उन्हें पीड़ित तो करार देता है लेकिन हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि उनके बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया था। बहुत देर नहीं हुई जब उन्होंने ‘अजान’ के खिलाफ बदजुबानी की थी।
अभिजीत की टिप्पणियां अकसर ट्विटर पर संदिग्ध अर्थ लिए होती हैं। जेएनयू की छात्रा के खिलाफ उनकी टिप्पणियां इतनी विषाक्त थीं कि ट्विटर को डिलीट तो करनी ही पड़ीं, साथ ही उनका एकाउंट भी बंद करना पड़ा। सांसद तथा अभिनेता परेश रावल के खिलाफ भी ट्विटर ने आंखें नहीं मूंदीं, जिन्होंने लेखिका अरुंधती राय के खिलाफ भद्दी टिप्पणी की थी। स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार की आवाज उठाने वाले ट्रॉलिंग कुटुम्ब के चैंपियनों से एक सवाल है—क्या यह आजादी बेहूदा तरीके से किसी की मान-प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाने का लाइसेंस है? ट्विटर पर दिन-रात सक्रिय रहने वाले इन लोगों को यह बात पता होनी चाहिए कि नफरत का जो ज़हर वे बीज कर आते हैं, उसका देर तक समाज खमियाजा भोगता है। डिजिटल जगत कोई कुश्ती का अखाड़ा नहीं जहां सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले लोग गाहे-बगाहे हर किसी की ताल ठोके।


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