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जन संसद

Posted On May - 28 - 2017

जीवन पर भारी परीक्षा
Ramesh chander puhaalअसली वजह
परीक्षा परिणाम आने से पहले परीक्षार्थियों द्वारा मौत को गले लगाने का सिलसिला रुक सकता है। उन्हें हताशा से उबारने के लिए परिजनों को युवाओं की समस्याओं को समझना चाहिये। उन्हें सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना चाहिए। आशावान बनना उस पीढ़ी के लिए आवश्यक है जो सफल-असफल अनुभवों से गुजरती है। इस विषय पर अभिभावकों, समाज के प्रबुद्ध लोगों सहित शिक्षकों को भी विचार करने की जरूरत है। समय-समय पर बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त करने की जरूरत है।
रमेश चन्द्र पुहाल, पानीपत

Ashok Sharma, jaghadriहौसला बढ़ाएं
परीक्षा में असफल या कम अंक आने पर छात्रों द्वारा आत्महत्या करना चिंता का विषय है। अगर अभिभावक और अध्यापकगण बच्चों को नर्सरी कक्षा से लिखने और याद करने की आदत डाल दें तो यह स्थिति उत्पन्न ही न हो । बच्चों को मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाने की भी कोशिश होनी चाहिए। समय-समय पर उन्हें स्कूलों में महान लोगों की सफलता की कहानियों से प्रेरित कराएं। परिजन और अध्यापक एक गाइड के रूप में बच्चों का मार्गदर्शन करें कि असफलता के बाद सफलता मिलती है लेकिन जीवन के बाद दूसरा जीवन नहीं।
अशोक शर्मा, जगाधरी

11009CD _11SEPT02जीवन दर्शन बताएं
परीक्षा में कम अंक आने पर छात्रों द्वारा आत्महत्या करना  चिंता का विषय है। जीवन अमूल्य है। परीक्षा में तो अगली बार अंक अर्जित किए जा सकते हैं लेकिन जीवन दुबारा नहीं मिलता। वैसे कहा भी है कि असफलता ही तो सफलता की प्रथम सीढ़ी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को हर स्थिति में मानसिक रूप से तैयार रहने के लिए मजबूत बनाएं। परीक्षा से पहले और परीक्षा के बाद भी बच्चों के मन से नकारात्मक सोच को समाप्त करने के लिए समय-समय पर उनका मार्गदर्शन करते रहें।
दीपक जानी, करनाल

Nandita Baliरुचि का ध्यान हो
आज प्रतिष्ठित संस्थानों में  मापदंड इतने अधिक हैं कि छात्र अपने संपूर्ण सामर्थ्य से पढ़ने के बावजूद अच्छे अंक तो पाता है लेकिन उसे आगे एडमिशन  नहीं मिलती। माता-पिता भी जब उसकी तुलना अन्य से करते हैं तो बच्चा अवसादग्रस्त हो जाता है। यह सही है कि हर छात्र की पढ़ने की क्षमता अलग होती है। अगर उसे अंकों के अनुरूप व रुचि के अनुसार कोर्स व विषय का चयन करने का मौका दिया जाए तो यह समस्या काफी हद तक सुलझ सकती है। अभिभावकों-अध्यापकों का सही मार्गदर्शन भी बच्चों को गलत कदम उठाने से रोक सकता है।
नंदिता बाली, बद्दी

Surender Singh bagiतनावमुक्त होना सिखाएं
परीक्षा में कम अंक आने से आहत छात्रों का आत्महत्या करना चिंतनीय विषय है। इसके पीछे प्रमुख वजह है बढ़ती प्रतिद्वंद्विता। अच्छे अंक लेने और करिअर बनाने की दोहरी चिंता से छात्रों के मन पर अनावश्यक दबाव रहने लगा है। आज मां-बाप अपने बच्चों को  केवल वीआईपी देखना चाहते हैं। आज महंगी शिक्षा के कारण बच्चे और अभिभावक दोनों परेशान  हैं। सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाये। अभिभावक बच्चों को तनावमुक्त एवं सादगीपूर्ण जीवन जीने की सलाह दें।
सुरेन्द्र सिंह बागी, महम

Sewaramअंकों का दबाव
आज का दौर प्रतिस्पर्धा का है। प्रत्येक अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा अच्छे अंक प्राप्त कर किसी बड़े ओहदे पर विराजमान हो। वह ये नहीं सोचते कि बच्चे की रुचि और उसका रुझान किस क्षेत्र में है। यही कारण है कि बच्चे अवसाद  में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। आज आम शिक्षा व तकनीकी शिक्षा महंगी हो गई है जो अभिभावकों के बूते से बाहर है। इसी के चलते  अभिभावक हर समय बच्चों पर बेहतर अंक लाने के लिए दबाव बनाये रखते हैं।
सेवा राम सिंगला, बठिंडा

Raj Kumar, rajondमानसिक तनाव हावी
आज के समय में  शिक्षा से लेकर रोजगार तक गलाकाट प्रतिस्पर्धा चल रही है। इसी के चलते छात्रों पर अनावश्यक मानसिक तनाव बढ़ गया है। परीक्षाओं में अधिक अंक लाने की अभिभावकों की उम्मीदों ने छात्रों के जीवन पर गहरा असर डाला है। मैरिट में न आने का यही दबाव छात्रों में आत्महत्या का कारण बन  रहा है। आधुनिक महंगी शिक्षा, महंगी कोचिंग, महंगी तकनीकी शिक्षा के चलते मानसिक बोझ बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी झेल रहे हैं।
राजकुमार, राजौंद, कैथल


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