भगौड़े को पकड़ने गयी पुलिस पर हमला, 3 कर्मी घायल !    एटीएम को गैस कटर से काट उड़ाये 12.61 लाख !    कुल्लू में चरस के साथ 2 गिरफ्तार !    बारहवीं की छात्रा ने घर में लगाया फंदा !    नेपाल को 56 अरब नेपाली रुपये की मदद देगा चीन !    इस बार अब तक कम जली पराली !    पीएम की भतीजी का पर्स चुरा सोनीपत छिप गया, गिरफ्तार !    फरसा पड़ा महंगा, जयहिंद को आयोग का नोटिस !    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रचार करेंगी मायावती !    ‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ !    

एकदा

Posted On May - 28 - 2017

गुरुता की विद्या
कलिंग राज्य के चाण्डाल कालदेव को सम्मोहिनी विद्या का ज्ञान था। राजा बुद्धसेन को कालदेव के बारे में ज्ञात हुआ तो उसे राज-दरबार में उपस्थित होने के लिए बुलावा भेज दिया। कालदेव तुरंत दरबार में हाज़िर हो गया। राजा ने उसे राजदण्ड का भय दिखाकर सम्मोहिनी विद्या सिखाने को कहा। मरता क्या न करता, कालदेव ने राजा के सिंहासन के सम्मुख अपना आसन जमा लिया। अब राजा सिंहासन पर था और उनके चरणों में कालदेव राजा को विद्या-दान दे रहा था। काफी समय बीतने के पश्चात भी जब राजा के पल्ले कुछ नहीं पड़ा तो उन्होंने अपने दरबारियों से मशविरा किया। एक विद्वान मंत्री ने आगे बढ़कर सकुचाते हुए कहा-महाराज, विद्या विनय से आती है। चाण्डाल से आपने विद्या सीखने के लिए उसे गुरु तो बनाया, मगर वह आपके चरणों में बैठा है और आप राज-सिंहासन पर गर्व के साथ बैठे हैं जबकि गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। भला ऐसे में विद्या किस प्रकार ग्रहण की जा सकती है। बुद्धसेन को अपनी भूल का अहसास हुआ। वह तुरंत सिंहासन से नीचे उतर गए। उन्होंने कालदेव को उच्च स्थान देकर नीचे अपना आसन लगाया और विनयपूर्वक विद्या ग्रहण करना प्रारम्भ कर दिया।                                              प्रस्तुति : मुकेश जैन


Comments Off on एकदा
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.