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ईवीएम की चुनौती

Posted On May - 22 - 2017

शंकाओं का निवारण समय की मांग
Edit-1देर से ही सही, अंतत: चुनाव आयोग इस बात पर सहमत हुआ है कि सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल आयोग के मुख्यालय आकर यह साबित करें कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ हो सकती है। कुछ राजनीतिक दलों ने आशंका जताई थी कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। आयोग ने ऐसी शंकाओं के निवारण के लिए 3 जून से ईवीएम ‘हैकथान’ शुरू करने का निर्णय लिया है। लोकतंत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जैसे अति महत्वपूर्ण उपकरण पर राजनीतिक दलों और जनता का अटूट विश्वास बनाए रखने के ऐसे किसी भी प्रयास का स्वागत ही किया जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त का यह कथन सर्वथा उचित है कि ‘हैकिंग चुनौती’ को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए। इस चुनौती को ईवीएम की विश्वसनीयता बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जाना चाहिए। अगर वोटिंग मशीन में कोई छोटी-सी खामी भी उजागर होती है तो दोनों पक्षों को उसे सहजता से लेना चाहिए और खामी को दुरुस्त किया जाना चाहिए। ‘हैकिंग चुनौती’ यानी हैकथान के लिए कुछ शर्तें और नियम तय किए गए हैं। पहला यह कि छेड़छाड़ साबित करने आये किसी भी हैकर को मशीन के किसी पुर्जे में बदलाव की इजाजत नहीं होगी। यह शर्त उचित है क्योंकि मतदान के दौरान व्यापक प्रशासनिक एवं सुरक्षा इंतजामों के चलते पुर्जों में किसी तरह के बदलाव की कोशिश संभव ही नहीं है। तथापि, आयोग चुनौती नियमों में दो संशोधनों पर विचार कर सकता है।
पहला, हैकर्स को असली मशीन अग्रिम तौर पर दी जा सकती है ताकि वे अच्छी तरह मशीन का अध्ययन कर ऐसे पुर्जों की पहचान कर सकें, जिनसे छेड़छाड़ संभव हो सकती हो। ऐसा करना इसलिए उचित और तर्कसंगत है क्योंकि हो सकता है कि इतने सालों के दौरान देश के किसी भी कोने में कुछ गलत और बेईमान तत्वों की पहुंच असली मशीन तक हो चुकी हो। नियमों में दूसरा संशोधन यह हो सकता है कि मीडिया को भी ‘हैकथान’ में बुलाया जाए ताकि सब कुछ सार्वजनिक हो सके। ऐसा करने से ‘हैकिंग चुनौती’ और भी ज्यादा पारदर्शी हो पाएगी। ईवीएम से भी ज्यादा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि चुनाव प्रणाली की साख और उस पर लोगों का भरोसा, दोनों दांव पर लगे हैं। निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र का आधार है। देश इस बात के लिए तैयार नहीं है कि चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता और पवित्रता पर किसी तरह की आंच आये। उम्मीद है, सर्वाधिक विश्वसनीय चुनाव कराने की दिशा में भारत एक मिसाल बनेगा।


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