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योगी राज में आयेंगे यूपी के अच्छे दिन?

Posted On April - 1 - 2017

yogi aditiyanathबृजेश शुक्ल
गोरखपुर के गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ को जब अमित शाह ने दिल्ली बुलाया और उनसे मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने काे कहा तो अमित शाह को भी मालूम था कि यह ताज फूलों से भरा नहीं, बल्कि कांटों भरा है और आदित्यनाथ को भी चुनौतियां मालूम थीं। योगी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य को चलाना बहुत कठिन है, इसकी परिस्थितियां अलग हैं। बाहुबलियों के हौसले बुलंद हैं, अपराधी निर्द्वंद हैं, किसान कर्ज से दबा हुआ है, बेरोजगारी सर उठा रही है। योगी आदित्यनाथ ने जिस ढंग से सबको पीछे छोड़ते हुए मुख्यमंत्री पद को ग्रहण किया है, वह एक अलग कहानी है। यह अलग बात है कि योगी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं थे और लाॅबिंग भी नहीं की थी, लेकिन इससे न योगी की चुनौतियां कम हो जाती हैं और न समस्यायें।
भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में जो वादे किये हैं, उन्हें पूरा करना हिमालय की चढ़ाई चढ़ने जैसा है। योगी ने आते ही कानून-व्यवस्था को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। बेलगाम अपराधी इस राज्य में कुछ भी करने को उतावले रहे हैं। नेताओं के संरक्षण पाये यह अपराधी इसलिए भी बेखौफ रहे कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपराधियों के खिलाफ जो कार्रवाई हुई, उसमें दलीय आधार पर भेद किया गया। अब योगी सरकार को जाति व धर्म के भेद को भूलकर पार्टी पाॅलिटिक्स को किनारे कर और अपने व परायों को छोड़कर अपराधियों पर वार करना होगा। योगी के कदमों को देखकर तो यही लगता है कि यहां धर्म और जाति और अपने परायों का भेद नहीं होगा, लेकिन राजनीतिक दबाव कभी-कभी तमाम संकल्पों को भी हिला देते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे करतब देखे जाते रहे हैं। छेड़खानी करने वाले युवकों पर जब कार्रवाई हुई और योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया तो विपक्षियों की हमदर्दी रोमियो शब्द से हो गई। विपक्षी नेताओं ने बयान जारी किये कि रोमियो प्रेम का दीवाना था, उसके नाम को बदनाम क्यों किया जा रहा था। यह हमदर्दी क्या संदेश देती है। स्कूलों के बाहर खड़े होने वाले दर्जनों आवारा युवकों के पक्ष में आखिर इतनी हमदर्दी क्यों? उत्तर प्रदेश में किसानों के हालात बहुत खराब हैं। किसान कर्ज से दबा हुआ है। पिछले 5 साल से उसकी फसल बर्बाद हो रही है। बैंक का ब्याज बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि बुंदेलखंड में तमाम गरीबों के खाने को अनाज नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह घोषणा की थी कि कैबिनेट की पहली बैठक का सबसे पहला फैसला कर्ज माफी का होगा। लगभग 62 हजार करोड़ का कर्ज माफ करना है, इतना संसाधन राज्य सरकार कहां से जुटायेगी। उससे भी बड़ी समस्या यह है कि हर पांच साल बाद किसान कर्ज के बोझ से दब जाता है, उसे इससे कैसे निकाला जाये। मोदी सरकार ने वादा किया था कि किसानों की हालत सुधारने के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जायेगी। इसलिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा। बंुदेलखंड में पानी की किल्लत है। लोग मार्च आते ही पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने लगे हैं। ऐसे बुंदेलखंड में सभी 19 सीटें भाजपा की झोली में चली गईं। बुंदेलखंड में भुखमरी भी है और पेयजल का संकट भी। अवैध खनन कर रहे माफियाओं ने नदियों को खोद डाला है। यह हजारों करोड़ों का घोटाला है।
योगी का इन माफियाओं से निपटना आसान नहीं है। फिलहाल इन समस्याओं से जूझते योगी जबरदस्त आक्रामक  मुद्रा में दिख रहे हैं, उनके काम करने की शैली अलग है। जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके प्रयास धरती पर कितना उतरते हैं।


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