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खट्टर ने भी छेड़ा कर्जमाफी का मनोहर राग

Posted On April - 8 - 2017

उपेंद्र पाण्डेय/ अजय मल्होत्रा/ सुभाष चौहान
10804cd _haryanaयूपी और पंजाब के बीच बसे हरियाणा में भी किसानों की कर्जमाफी को लेकर राजनीति गरम है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किसानों की कर्जमाफी पर मंथन की बात स्वीकार कर किसानों की उम्मीदों को हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ने इसी हफ्ते 7 अप्रैल को रोहतक में कहा कि हरियाणा के किसानों के लिए कर्जमाफी योजना लाने पर विचारमंथन चल रहा है। यूपी के किसानों को कर्जमाफी मिल चुकी है। पंजाब की कैप्टन सरकार कर्जमाफी के लिए केंद्र पर दबाव बना रही है। हरियाणा के किसान पहले भी दो बार कर्जमाफी का स्वाद चख चुके हैं। पानी, बिजली, बीज सहित प्राकृतिक मार झेलने वाले किसानों का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है, लेकिन सरकारें आईं और गईं तथा दो बार 1987 व 2008 में कर्जा माफी भी हुई, लेकिन किसान आज भी गरीबी से जूझ रहे हैं।
आम तौर पर किसानों को हरियाणा में दो प्रकार का ऋण दिया जाता है। एक तो किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए और दूसरा सहकारी समितियों के माध्यम से फसली व अन्य सामान के लिए। प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा किसान है, जिसने इन दोनों में से किसी एक योजना में ऋण न ले रखा हो। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसान को प्रति एकड़ लगभग 70 हजार रुपये ऋण दिया जाता है, जो कि उसे एक वर्ष में पांच से दस दिन के लिए जमा करवाना होता है और वह बाद में इसे फिर से ले सकता है। 10 एकड़ भूमि वाला किसान 7 लाख रुपये तक ऋण केवल 4 फीसदी ब्याज पर लेता है। इस ऋण को वह आमतौर पर खेती का सामान, ट्रैक्टर व रोजमर्रा के खर्चों में इस्तेमाल करता है। यहां तक कि शादियों तक में यह ऋण इस्तेमाल होता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले ऋण के लिए किसान को अपनी जमीन की फरद बैंक के पास जमा करवानी होती है।
दूसरा ऋण किसान को को-ओपरेटिव सोसायटी देती है। इसकी सीमा 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक है। यह ऋण आधा तो कैश में दिया जाता है और बाकि ऋण की एवेज में खाद व बीज का भुगतान होता है। आमतौर पर इस ऋण की रिकवरी 20 से 30 फीसदी है, जबकि इस पर ब्याज 10 से 12 फीसदी है। किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले ऋण की अदायगी 90 फीसदी तक है, क्योंकि यह ऋण एक बार जमा होने के बाद 10 दिन बाद फिर मिल सकता है। जहां तक किसानों के डिफाल्टर होने का सवाल है आमतौर पर को-ओपरेटिव सोसायटी से मिलने वाले ऋण के किसान डिफाल्टर बन जाते हैं। इसका ब्याज भी अधिक है और यह समयानुसार बढ़ता भी है।
हरियाणा में किसानों की दशा यूपी से ज्यादा दयनीय है। हरियाणा के करीब 15 लाख किसान 56 हजार करोड़ रुपये के कर्जमंद हैं। इन किसानों का कहना है कि उनके पास बैंकों के साथ आढ़ती का कर्ज भी है। इस कर्ज का ब्याज भी इतना ज्यादा है कि इससे उबर पाना इन हालात में नजर नहीं आ रहा है। एक किसान ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसके पास साढ़े तीन एकड़ जमीन अपनी है, लेकिन कर्ज 12 लाख रुपये का हो गया है। जमीन के हिसाब से वह कर्ज का केवल ब्याज ही दे सकता है।
अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह कहते हैं कि वर्ष 1986-87 के बाद से अब तक कृषि पूरी तरह घाटे का सौदा बन चुकी है। किसानों को गेहूं पर 1740 रुपये प्रति क्विंटल लागत के मुकाबले केवल 1625 रुपये समर्थन मूल्य मिलता है। इससे स्पष्ट है कि किसान कितने घाटे में धंधा कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के 1 दर्जन औद्योगिक घरानों पर जितना ऋण है उतना देश के करोड़ों किसानों पर नहीं है, लेकिन सरकार बड़े औद्योगिक घरानों के चित्र चस्पा करने की बजाय छोटे किसानों को परेशान करती है। वे चाहते हैं कि सरकार लागत को आंककर समर्थन मूल्य निर्धारित करे। दक्षिण हरियाणा में पिछले वर्षों में अनुकूल मौसम न होने, पानी की कमी, खाद व दवा की समस्या और फसलों का सही दाम न मिलने से किसान आर्थिक रूप से बदहाल हुआ है। किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किये हैं। भाकियू के प्रांतीय प्रधान गुरनाम चढुनी किसानों की दशा से खफा हैं। उनका कहना है कि भाकियू 9 अगस्त को पूरे देश के किसानों को एकजुट कर सांकेतिक हड़ताल करेगी।


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